अंतरिक्ष में चीन को मिली बड़ी कामयाबी, चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतारा अंतरिक्षयान चांग-ई-5

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हाइलाइट्स:

  • चीन ने चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतारा अपना अंतरिक्षयान
  • चांद की मिट्टी को लेकर धरती पर वापस आएगा चांग ई-5 स्पेसक्राफ्ट
  • पूरे मिशन में 23 दिन लगने का अनुमान, लैंडिंग के बाद भेजी तस्वीर

पेइचिंग
चीन का अंतरिक्षयान चांग ई-5 (Chang’e-5) मंगलवार को सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतर गया। चीन की नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह अंतरिक्षयान चंद्रमा की सतह पर पूर्व निर्धारित जगह के बिलकुल पास उतरा है। इस मिशन को चीन के सबसे शक्तिशाली रॉकेट लांग मार्च-5 के जरिए 24 नवंबर को लॉन्च किया गया था। इस मिशन के जरिए चीन चंद्रमा की सतह से मिट्टी के नमूनों को धरती पर लाएगा।

44 साल बाद चंद्रमा पर उतरा कोई अंतरिक्षयान
चंद्रमा की सतह पर 44 साल बाद कोई अंतरिक्षयान उतरा है। इससे पहले रूस का लूना 24 मिशन चांद पर 22 अगसत् 1976 को चांद की सतह पर उतरा था। तब लूना अपने साथ चांद से 200 ग्राम मिट्टी लेकर वापस लौटा था। जबकि, चीन का यह स्पेसक्राफ्ट अपने साथ 2 किलोग्राम मिट्टी लेकर वापस आएगा।

चंद्रमा की सतह पर उतरा अंतरिक्षयान चांग ई-5 का लैंडर
चंद्रमा की कक्षा में पंहुचने के बाद चांग-ई-5 ने अपने लैंडर को उसके सतह पर भेजा। जो सुरक्षित रूप से पूर्व निर्धारित जगह पर उतर गया, जबकि उसका ऑर्बिटर चंद्रमा का चक्कर लगा रहा है। लैंडर चांद की जमीन में खुदाई कर मिट्टी और चट्टान निकालेगा। फिर से इस नमूने का लेकर असेंडर के पास जाएगा। असेंडर नमूने लेकर चंद्रमा की सतह से उड़ेगा और अंतरिक्ष में चक्‍कर काट रहे अपने मेन यान से जुड़ जाएगा।

पूरे मिशन में लगेंगे 23 दिन
चीन का मुख्‍य अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह के नमूने को एक कैप्‍सूल में रखेगा और उसे फिर पृथ्‍वी के लिए रवाना कर देगा। इस पूरे मिशन में कम से कम 23 दिन लग सकता है। करीब 4 दशक बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब कोई देश चंद्रमा के सतह की खुदाई करके वहां से चट्टान और म‍िट्टी पृथ्‍वी पर लाने जा रहा है। इस पूरे मिशन को चीन का सबसे महत्‍वाकांक्षी मिशन कहा जा रहा है।

चीन के सबसे शक्तिशाली रॉकेट से लॉन्च हुआ मिशन
चीनी मिशन अगर सफल हो जाता है तो उसकी चंद्रमा के बारे में समझ बढ़ेगी और इससे उसे चंद्रमा पर बस्तियां बसाने में मदद मिलेगी। चीन के अंतरिक्ष यान को चांद तक पहुंचाने के लिए लांग मार्च-5 रॉकेट का इस्‍तेमाल किया गया है। यह रॉकेट तरल केरोसिन और तरल ऑक्‍सीजन की मदद से चलता है। चीन का यह महाशक्तिशाली रॉकेट 187 फुट लंबा और 870 टन वजनी है।



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