अगले हफ्ते धरती से बेहद करीब से गुजरेगा यात्री विमान से भी बड़ा Asteroid, नासा की रहेगी नजर

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वॉशिंगटन
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने एक ऐसे ऐस्टरॉइड की खोज की है जो से धरती की तरफ बढ़ रहा है। इस ऐस्टरॉइड का नाम 2020 RK2 है जो सात अक्टूबर को धरती की कक्षा में प्रवेश करेगा। इस ऐस्टरॉइड को सितंबर महीने में पहली बार वैज्ञानिकों ने देखा था। नासा ने कहा है कि इस ऐस्टरॉइड से धरती को कोई नुकसान नहीं होगा फिर भी वैज्ञानिक इसकी चाल के ऊपर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

24046 किलोमीटर प्रति घंटा की है स्पीड
नासा ने बताया कि ऐस्टरॉइड 2020 RK2 धरती की तरफ 24046 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से आ रहा है। अनुमान जताया जा रहा है कि इस ऐस्टरॉइड का व्यास 36 से 81 मीटर के बीच में हो सकता है, जबकि चौड़ाई 118 से 265 फीट तक हो सकती है। इस लंबाई का ही बोइंग 737 यात्री विमान होता है।

धरती से नहीं देगा दिखाई
यह ऐस्टरॉइड धरती से दिखाई नहीं देगा। नासा ने बताया कि पूर्वी मानक समय के अनुसार यह ऐस्टरॉइड दोपहर के एक बजकर 12 मिनट और ब्रिटेन के समय के अनुसार शाम के 6 बजकर 12 मिनट पर धरती के बेहद करीब से गुजरेगा। नासा ने अनुमान जताया है कि यह ऐस्टरॉइड धरती से 2,378,482 मील की दूरी से निकल जाएगा।

अगले 100 सालों तक NASA की नजर
NASA का Sentry सिस्टम ऐसे खतरों पर पहले से ही नजर रखता है। इसमें आने वाले 100 सालों के लिए फिलहाल 22 ऐसे ऐस्टरॉइड्स हैं जिनके पृथ्वी से टकराने की थोड़ी सी भी संभावना है। इस लिस्ट में सबसे पहला और सबसे बड़ा ऐस्टरॉइड 29075 (1950 DA) जो 2880 तक नहीं आने वाला है। इसका आकार अमेरिका की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग का भी तीन गुना ज्यादा है और एक समय में माना जाता था कि पृथ्वी से टकराने की इसकी संभावना सबसे ज्यादा है।

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धरती से टकरा सकता है यह Asteroid
2020-2025 के बीच 2018 VP1 नाम Asteroid के पृथ्वी से टकराने की संभावना है लेकिन यह सिर्फ 7 फीट चौड़ा है। इससे बड़ा 177 फीट का Asteroid 2005 ED224 साल 2023-2064 के बीच पृथ्वी से टकरा सकता है।


तो क्या होते हैं Asteroids?
ऐस्टरॉइड्स वे चट्टानें होती हैं जो किसी ग्रह की तरह ही सूरज के चक्कर काटती हैं लेकिन ये आकार में ग्रहों से काफी छोटी होती हैं। हमारे सोलर सिस्टम में ज्यादातर ऐस्टरॉइड्स मंगल ग्रह और बृहस्पति यानी मार्स और जूपिटर की कक्षा में ऐस्टरॉइड बेल्ट में पाए जाते हैं। इसके अलावा भी ये दूसरे ग्रहों की कक्षा में घूमते रहते हैं और ग्रह के साथ ही सूरज का चक्कर काटते हैं। करीब 4.5 अरब साल पहले जब हमारा सोलर सिस्टम बना था, तब गैस और धूल के ऐसे बादल जो किसी ग्रह का आकार नहीं ले पाए और पीछे छूट गए, वही इन चट्टानों यानी ऐस्टरॉइड्स में तब्दील हो गए। यही वजह है कि इनका आकार भी ग्रहों की तरह गोल नहीं होता। कोई भी दो ऐस्टरॉइड एक जैसे नहीं होते हैं। आपने कई बार सुना होगा कि एवरेस्ट जितना बड़ा ऐस्टरॉइड धरती के पास से गुजरने वाला है तो कभी फुटबॉल के साइज का ऐस्टरॉइड आने वाला है। ब्रह्मांड में कई ऐसे ऐस्टरॉइड्स हैं जिनका डायमीटर सैकड़ों मील का होता है और ज्यादातर किसी छोटे से पत्थर के बराबर होते हैं।



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