अब आर्मीनिया ने उड़ाया T-90S टैंक, अजरबैजान की सेना को पहुंचा भारी नुकसान

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हाइलाइट्स:

  • आर्मीनिया और अजरबैजान में 22 दिन भी युद्ध जारी, अबतक 700 से ज्यादा लोगों की मौत
  • युद्ध को भड़का रहे तुर्की और पाकिस्तान, अजरबैजान का कर रहे खुला समर्थन
  • दोनों देशों में युद्धविराम की सभी बातचीत विफल, रूस ने दोनों देशों पर बढ़ाया दबाव

बाकू
आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच जारी लगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। 22 दिनों से जारी इस युद्ध में अभी तक दोनों पक्षों के 700 से ज्यादा सैनिक और आम लोग मारे जा चुके हैं। रविवार को आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी सेना ने अजरबैजान के सात प्रमुख युद्धक टैंको को नष्ट कर दिया है। इसमें रूस से खरीदा गया टी-90एस टैंक भी शामिल है। बता दें कि टी-90एस भारत का भी मेन बैटल टैंक है, लेकिन भारतीय सेना ने इसमें अपनी जरूरतों के हिसाब से कई अहम बदलाव भी किए हैं।

आर्मर्ड व्हीकल को भी उड़ाया
आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने पांच आर्मर्ड पर्सनल कैरियर को भी नष्ट किया है। युद्ध क्षेत्र में सेना के जवान इस तरह की गाड़ियों में बैठकर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। इससे वे हल्की और मध्यम स्तर की गोलीबारी से भी बचे रहते हैं। हालांकि, भारी हथियारों के हमले में यह गाड़ियां भी नष्ट हो जाती हैं।

नागरिक इलाकों को निशाना बना रहे दोनों देश
आर्मीनिया ने दावा किया है कि अजरबैजानी फोर्स नागोर्नो-काराबाख की राजधानी स्टेपानाकर्ट को निशाना बना रही है। इस हमले में उसकी तरफ के सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं। वहीं अजरबैजान का दावा है कि आर्मीनिया की सेना उसके दूसरे सबसे बड़े शहर गांजा पर मिसाइल दाग रही है। शनिवार को एक ऐसे ही मिसाइल हमले में 12 से अधिक अजरबैजानी लोग मारे गए जबकि 40 से ज्यादा घायल हो गए।

कितना शक्तिशाली है T-90S टैंक
रूस का T-90S टैंक तीसरी पीढ़ी का मेन बैटल टैंक है। इसमें 125 एमएम की स्मूथबोर कैनन लगी होती है। यह टैंक सामान्य गोले दागने के अलावा कई तरह के अन्य हथियारों को भी फायर करने में सक्षम है। इस टैक में एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर लगी होती है जो दुश्मन के किसी भी हमले को झेलने में सक्षम है। इस टैंक में लगी मिसाइल लो फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स जैसे हेलिकॉप्टर और छोटे ड्रोन को भी मार गिराने में सक्षम है। इसमें 7.62 मिलीमीटर की मशीनगन और 12.7 मिलीमीटर की एयर डिफेंस मशीनगन भी लगी होती है।

भारतीय सेना में 2004 में शामिल हुआ था यह टैंक
यह टैंक रूसी सेना में 1992 में शामिल हुआ था। 2001 में इस टैंक के पहले विदेश खरीदार के रूप में भारत ने रूस से संपर्क किया था। इस समझौते में भारत ने रूस से कुल 310 टैंक खरीदा। इसमें से 124 रूस से बनकर भारत को मिले थे,जबकि बाकी टैंक को भारत में ही ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने बनाया था। 2019 में भी भारत ने रूस से इस टैंक के 464 अतिरिक्त यूनिट को बनाने के लिए एक डील की थी। भारतीय सेना को उसका पहला टी-90एस टैंक 2004 में मिला था।

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किस मुद्दे को लेकर दोनों देशों में छिड़ी जंग
दोनों देश 4400 वर्ग किलोमीटर में फैले नागोर्नो-काराबाख नाम के हिस्से पर कब्जा करना चाहते हैं। नागोर्नो-काराबाख इलाका अंतरराष्‍ट्रीय रूप से अजरबैजान का हिस्‍सा है लेकिन उस पर आर्मेनिया के जातीय गुटों का कब्‍जा है। 1991 में इस इलाके के लोगों ने खुद को अजरबैजान से स्वतंत्र घोषित करते हुए आर्मेनिया का हिस्सा घोषित कर दिया। उनके इस हरकत को अजरबैजान ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कुछ समय के अंतराल पर अक्सर संघर्ष होते रहते हैं।

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