अब कमाई नहीं जीवन स्तर तय करेगा गरीबी रेखा की परिभाषा, सरकारी पेपर में सामने आई बात

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सुबोध घिल्डियाल, नई दिल्ली
एक तरफ पूरा देश कोरोना की मार झेल रहा है वहीं दूसरी तरफ गरीब दाने-दाने को मोहताज है, इसी बीच केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वर्कींग पेपर ने भविष्य में गरीबी का पैमाना तय करने के लिए नई परिभाषा गढ़ दी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रकाशित किए गए एक पेपर के मुताबिक आने वाले समय में गरीबी रेखा आपकी इनकम यानि कमाई से नहीं बल्कि आपके रहने के जीवन स्तर से तय की जा सकेगी। जिसमें प्रमुख तौर पर आवास, शिक्षा और स्वच्छता जैसी सुविधाएं आपके जीवन स्तर का पैमाना बनेंगी।

दरअसल केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक पेपर जारी किया है जिसमें गरीबी रेखा को लेकर कई टिप्पणियां की गईं हैं। पेपर में लिखा गया है कि कोरोना वायरस महामारी ने कुछ आवश्यक चीजों को मुख्य तौर पर रेखांकित किया है, इनमें स्वास्थ्य की गुणवत्ता, शिक्षा और जागरूकता, पानी और स्वच्छता की सुविधा, पर्याप्त पोषण और रहने की जगहों की आवश्यकता जहां सामाजिक दूरी यानि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सकता है।

लोवर मिडिल क्लास की एक दिन की कमाई 75 रुपए- वर्ल्ड बैंक
दिलचस्प बात यह है कि पेपर में वर्ल्ड बैंक ने भारत को निम्न मध्यम आय वर्ग वाले देश के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसका प्रति दिन 75 रुपये प्रति व्यक्ति आय है, जो कि वर्तमान में भारत के आंकड़े की तुलना में अधिक है। पेपर के नोट्स में लिखा गया है कि भारत को समय के हिसाब से निम्न मध्यम-आय वाले वर्ग के लिए एक नई वास्तविकता को ढालने की आवश्यकता होगी, जिसमें गरीबी का मतलब भूख से किनारे पड़े रहना नहीं है, बल्कि, एक बढ़ती अर्थव्यवस्था द्वारा अवसरों का लाभ न उठा पाना है।

गरीबी रेखा का पैमाना का होना एक अहम जरूरत
आरडी विभाग के प्रमुख आर्थिक सलाहकार और आर्थिक सलाहकार सीमा गौड़ और एन श्रीनिवास राव द्वारा लिखे गए एकेडमिक पेपर में दशकों से फैली गरीबी मापने के इतिहास का पता लगाते हैं। इसके अलावा विवादों ने इस प्रक्रिया को अपनी प्रकृति की वजह से बदल दिया है। हालांकि, पेपर यह पेपर इस नतीजे पर पहुंचता है कि नीति निर्माताओं के लिए एक ‘गरीबी रेखा’ आवश्यक नंबर है क्योंकि उन्हें विकास के मुद्दे और नीतियो को बनाने में इससे काफी मदद मिलती है।

नौकरियों के अवसर बनाकर दूर की जा सकती है गरीबी
पेपर में कहा गया है कि 8% की औसत सालाना जीडीपी वृद्धि दर को ध्यान में रखते हुए नौकरियों का निर्माण करके गरीबी पर हमला करने की रणनीति महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आरडी मंत्रालय सामाजिक-आर्थिक जाति की जनगणना पर अधिकार होने के नाते, गरीबी को मापने और मुकाबला करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो वंचित परिवारों की पहचान करने के लिए मौजूदा समय में बैरोमीटर है साथ ही प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के पैमाना भी हैं। यह कहते हुए कि वैश्विक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत गरीबी से लड़ने में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है, पेपर में कहा गया है कि गरीबी में कमी और भारत में सामाजिक आर्थिक संकेतों में सुधार को काफी असमानताओं बांटा गया है।



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