अमेरिका-चीन में युद्ध हुआ तो दक्षिण-पूर्व एशिया का कौन सा देश किसका देगा साथ?

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पेइचिंग
अमेरिका और चीन के बीच जारी तल्खी लगातार बढ़ती जा रही है। साउथ चाइना सी एशिया में तनाव का दूसरा पॉइंट बन गया है। चीन, ताइवान, अमेरिका, इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम की नौसेना इस इलाके में अपना-अपना प्रभुत्व जमाने के लिए लगातार गश्त कर रही हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर अमेरिका और चीन आपस में टकरा जाते हैं तो इस क्षेत्र के कौन-कौन से देश किसका साथ देंगे।

कहां है साउथ चाइना सी
साउथ चाइना सी प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे से सटा हुआ है। चीन का दक्षिण-पूर्व हिस्सा इस सागर से छूता हुआ है। इस सागर के पूर्वी तट पर वियतनाम स्थित है जबकि पश्चिमी तट पर फिलीपींस का कब्जा है। साउथ चाइना सी के उत्तरी हिस्से में ताइवान स्थित है। यह सागर गल्फ ऑफ थाईलैंड और फिलीपीन सागर से भी जुड़ा हुआ है। चीन का दावा है कि साउथ चाइना सी का 80 फीसदी हिस्सा उसका है।

चीन क्यों जमाना चाहता है अपना अधिकार
कई देशों से जुड़े होने के कारण यह क्षेत्र दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। इस रास्ते से दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 20 फीसदी आवागमन होता है। जिसकी कुल कीमत 5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। ऐसे में जिस भी देश का इस क्षेत्र पर प्रभुत्व हो जाएगा वह आर्थिक और सामरिक रूप से शक्तिशाली बनेगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समुद्र में 11 अरब बैरल प्राकृतिक गैस और तेल तथा मूंगे के विस्तृत भंडार मौजूद हैं।

फिलीपींस की मजबूरी है अमेरिका की मदद करना
साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट ने मनीला के डिफेंस रिसर्चर जोस एंटोनियो कस्टोडियो के हवाले से लिखा है कि अगर इस क्षेत्र में जंग छिड़ती है तो फिलीपींस पर अमेरिका का अधिकार चलेगा। यहां की सरकार अमेरिका के किसी भी आदेश को मानने से इनकार नहीं कर पाएगी। इस देश की सेना कमजोर है और विदेश नीति भी सही नहीं है। यह दक्षिणी पूर्वी एशिया में अमेरिका के दो सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों में से एक है।

अमेरिका का खुलकर साथ देगा ताइवान
ताइवान भी खुलकर अमेरिका का साथ देगा। मेनलैंड चाइना से उसकी दुश्मनी जग जाहिर है। इस समय चीनी सेना ताइवान की खाड़ी में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास कर रही है। चीनी लड़ाकू और टोही विमान भी आए दिन ताइवानी एयरस्पेस में घुसने की कोशिश करते हैं। ताइवान अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर है। ऐसे में कोई दो राय हो ही नहीं सकती कि ताइवान अमेरिका का साथ नहीं देगा।

इंडोनेशिया का मूड भांपना मुश्किल
इंडोनेशिया और चीन में द्वीपों को लेकर विवाद है। कुछ दिन पहले ही इंडोनेशियाई नौसेना ने अपने जलक्षेत्र में तीन दिन से घुसी चीनी तटरक्षक बल की नौका को खदेड़ दिया था। वहीं दूसरी तरफ इंडोनेशिया चीन की मुद्रा युआन का उपयोग बढ़ा रहा है। वह जिनपिंग की महत्वकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा भी है। ऐसे में यह कहना मुश्किल होगा कि इंडोनेशिया किसके पाले में जाता है। संभावना यह है कि वह इस स्थिति में तटस्थ रहना स्वीकार करेगा।



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