अमेरिकी दूतावास पर चीन-क्‍यूबा में दागी गई थी ‘लेजर गन’? जांच रिपोर्ट से उठे गंभीर सवाल

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लद्दाख में भारतीय सैनिकों पर PLA के माइक्रोवेब वेपन के इस्‍तेमाल की अटकलों के बीच अमेरिका ने लंबी जांच के बाद लेजर हथियारों के इस्‍तेमाल को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। अमेरिका के राष्ट्रीय विज्ञान समिति अकादमी की बहुप्रतिक्षित रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन और क्यूबा में अमेरिकी राजनयिक ‘निर्दिष्ट’ माइक्रोवेव विकिरण के कारण बीमार हुए होंगे। विदेश विभाग ने यह अध्ययन किया था और शनिवार को जारी की गई रिपोर्ट वर्ष 2016 में हवाना में अमेरिकी राजनयिकों के अचानक किसी रहस्मयी बीमारी की चपेट में आने के मामले का पता लगाने की कड़ी में नया प्रयास माना जा रहा है। इसे हवाना सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं पूरा मामला….

अमेर‍िकी वैज्ञानिकों के ल‍िए बीमारी बनी रहस्‍य

अमेरिकी अध्ययन में यह पाया गया कि ‘सिर में भारी दबाव महसूस करना, चक्कर आना और अन्य दिक्कतें निर्दिष्ट, पल्स रेडियो फ्रीक्वेंसी माइक्रोवेव ऊर्जा के कारण हुई हो सकती हैं।’ अध्ययन में हालांकि ऊर्जा के स्रोत के बारे में नहीं बताया गया और यह भी नहीं कहा गया कि यह किसी हमले के बाद पैदा हुई थी, लेकिन यह जरूर कहा गया कि इस प्रकार की बीमारी पर पूर्व में सोवियत संघ में सामने आए थे। इस रिपोर्ट में 19 सदस्यीय समिति ने कहा कि इस चिकित्सा रहस्य की तह तक जाने में उन्हें कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें से सभी में लक्षण समान नहीं थे और नैशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज रिसर्च बीमारी पर अतीत में हुए सभी अध्ययनों के नतीजे हासिल नहीं कर सकी जिनमें से कुछ गोपनीय थे।

जांच रिपोर्ट में किसी हथियार के इस्‍तेमाल का खुलासा नहीं

समिति के अध्यक्ष डेविड रिलमैन ने कहा, ‘समिति ने पाया कि ये मामले काफी चिंताजनक हैं, न सिर्फ निर्दिष्ट, पल्स रेडियो फ्रीक्वेंसी ऊर्जा को एक तंत्र के रूप में इस्तेमाल करने की भूमिका के संदर्भ में, बल्कि उन अहम दिक्कतों के कारण भी जो उनमें से कुछ लोगों में पैदा हुई हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमें एक राष्ट्र के रूप में इन विशिष्ट मामलों और भविष्य में सामने आ सकने वाले मामलों से एक ठोस, समन्वित और व्यापक दृष्टिकोण के साथ निपटने की आवश्यकता है।’ अमेरिका के एनबीसी न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक भले ही इस जांच रिपोर्ट में किसी हथियार या जानबूझकर माइक्रोवेव ऊर्जा के इस्‍तेमाल का खुलासा नहीं हुआ हो लेकिन यह बहुत परेशान करने वाली संभावना को जन्‍म देता है।

‘तेज आवाज के बाद सिर चकराने लगा, देखने में द‍िक्‍कत’

एनबीसी न्‍यूज के मुताबिक साल 2018 में अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना था कि विदेशों में अ‍मेरिकी राजनयिकों और खुफिया एजेंसी सीआईए के अधिकारियों पर जानबूझकर हमले के पीछे रूस प्रमुख संदिग्‍ध है। हालांकि ताजा रिपोर्ट में इस दिशा में कुछ भी निर्णायक निकलकर नहीं आया है। जांच के दौरान अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 40 से ज्‍यादा अमेरिकी राजनयिकों की जांच की। इनमें से कई लोगों ने बताया कि उन्‍हें बहुत तेज आवाज सुनाई दी और सिर में दबाव महसूस होने लगा और इसके बाद उनका सिर चकराने लगा तथा देखने में दिक्‍कत होने लगी थी। कई राजनयिकों को तो लंबे समय तक कई परेशानियों से जूझना पड़ा है।

‘अमेरिक‍ियों पर हमले के समय मौजूद थे रूसी जासूस’

वर्ष 2016 में क्‍यूबा में अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने शिकायत की थी कि उन्‍हें उल्‍टी, नाक से खून और बेचैनी हो रही है। इस मामले के बाद इसे हवाना सिंड्रोम कहा जाने लगा था। कहा जाता है कि अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ छिपकर सोनिक वेपन का इस्‍तेमाल किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने इसी तरह की घटनाओं की शिकायत चीन और रूस में भी की है। उन्‍होंने कहा कि दूतावास की इमारत के कुछ कमरों में उन्‍हें इस तरह की दिक्‍कत का सामना करना पड़ा। एक सूत्र ने बताया कि इन हमलों की जब सीआईए ने मोबाइल फोन लोकेशन डेटा के आधार पर जांच की थी तो उन्‍हें उसी शहर में कुछ ऐसे रूसी एजेंटों के मौजूद होने के बारे में जानकारी मिली थी जो माइक्रोवेब वेपन कार्यक्रम पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा कोई ठोस साक्ष्‍य नहीं मिला था।



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