आपदा में अवसरः झांसी में लौटे प्रवासी मजदूरों से हर एक गांव में खुदवा डाले तालाब, सूखे बुंदेलखंड में पानी से लबालब हुए जलाशय

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हाइलाइट्स:

  • झांसी में पानी के एक ही मुख्य श्रोत है बेतवा नदी
  • बुंदेलखंड के क्षेत्र में आने वाले झांसी में हर साल होती है पानी की किल्लत
  • झांसी डीएम ने शुरू की वन विलेज, वन पॉन्ड योजना
  • लॉकडाउन में लौटे प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा के तहत जोड़कर खुदवाए गए तालाब
  • झांसी में हैं 496 ग्राम पंचायतें, 405 में तालाबों का काम हुआ पूरा, नजर आने लगा पानी

शशि पाण्डेय मिश्रा, झांसी
बुंदेलखंड में सूखा किसी से छिपा नहीं। यहां पर हर साल जलाशय सूख जाते हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में आने वाले हर जिले में पानी के लिए त्राहि-त्राहि हो जाती है। ऐसे में झांसी प्रशासन ने सूखे से निपटने के लिए एक ऐसी योजना शुरू की जिससे हर एक गांव के तालाब लबालब हो गए। झांसी जिले के डीएम आंध्रा वामसी ने ‘वन विलेज, वन पॉन्ड’ पहल की थी। इसके तहत 405 गांव के तालाबों को पुनर्जीवित किया गया है।

झांसी के डीएम आंध्रा वामसी ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते मार्च में लॉकडाउन लगा दिया गया था। लॉकडाउन के बाद अप्रैल और मई महीने में लगभग 11,000 प्रवासी श्रमिक लौटकर आए। इन प्रवासी श्रमिकों को वन विलेज वन पॉन्ड योजना में लगाया गया। श्रमिकों से तालाब खुदवाए गए।

सूखे की स्थिति से स्थिति से बहुत हद तक मिलेगी निजात
डीएम ने कहा कि जिले में तालाबों को फिर से जीवित करने के पीछे मूल विचार यह था कि जिले की हर एक ग्राम पंचायत में एक तालाब हो। इतना ही नहीं तालाब भी ऐसा हो जो पानी से भरा हो जिससे इलाके में सूखे की स्थिति से बहुत हद तक निपटा जा सके।

पहले, कार्य के दौरान और बाद क स्थिति

405 तालाब हुए लबालब
आईएएस आंध्रा वामसी ने बताया कि झांसी में कुल 496 ग्राम पंचायतें हैं। हर एक गांव में तालाब के हिसाब से 496 तालाब खोदने की योजना थी। अब तक 405 तालाब खोद लिए गए हैं। सभी तालाबों में पानी भरा है। डीएम ने कहा कि उन्होंने यह काम आपदा को अवसर में बदलने की दिशा में किया।

1.12 लाख लोगों को मनरेगा से जोड़ा गया
डीएम ने बताया कि जिले में अब तक 1.12 लाख लोगों को मनरेगा के जरिए जोड़कर योजना में शामिल किया गया है। मनरेगा योजना के तहत हर एक श्रमिक को रोज के काम के बदले 182 रुपये का भुगतान किया जाता है। अब तक तालाबों को खोदने में लगभग छह करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

पहले, कार्य के दौरान और बाद क स्थिति

पहले, कार्य के दौरान और बाद क स्थिति

बेतवा है इकलौता पानी का श्रोत
डीएम ने बताया कि झांसी में पानी का सिर्फ एक मुख्य श्रोत बेतवा नदी है। गर्मी के दिनों में जब सूखा पड़ता है तो पानी के लिए त्राहि-त्राहि होती है। किसानों को भी पानी की किल्लत से जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन तालाबों के जरिए सूखे के दौरान सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के लिए पानी मिल सकेगा। इतना ही नहीं तालाबों से भूजल स्तर में भी सुधार होगा।



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