आर्मीनिया का जवाबी ऐक्शन अजरबैजान पर पड़ा भारी, 12 की मौत, 40 से अधिक घायल

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बाकू
आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबाख इलाके में कब्जे को लेकर युद्ध अब भी जारी है। बुधवार को सैन्य ठिकानों पर अजरबैजान के हमलों के बाद अब आर्मीनियाई सेना ने जवाबी कार्रवाई की है। अजरबैजान ने दावा किया है कि आर्मीनिया की गोलीबारी में उसके 12 आम नागरिक मारे गए हैं, जबकि 40 से अधिक घायल हैं। अजरबैजान सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि आर्मीनियाई सेना के दो रॉकेट गांजा शहर के आबादी वाले इलाकों में आकर गिरे हैं।

आर्मीनिया ने पहले ही दी थी हमले की चेतावनी
आर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता शुशन स्टीफनियन ने बुधवार को नागोर्नो-काराबाख इलाके में उसकी सेना पर हमले को लेकर अजरबैजान की आलोचना की थी। उन्होंने तभी चेतावनी देते हुए कहा था कि आर्मीनिया की सेना इस हमले का बदला जरूर लेगी। वहीं आर्मीनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनियन ने बुधवार को कहा कि अजरबैजान का उद्देश्य नागोर्नो-करबाख के क्षेत्र पर पूरी तरह से कब्जा करना है।

इस शहर को आर्मेनिया ने बनाया निशाना
330,000 से अधिक की आबादी वाला गांजा शहर नागोर्नो-काराबाख की राजधानी स्टेपानाकर्ट के उत्तर में लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पिछले रविवार को लड़ाई के शुरुआत में ही आर्मेनिया ने आरोप लगाया था कि अजरबैजान की सेना ने स्टेपानाकर्ट पर हमले करने और वहां की नागरिक आबादी को निशाना बनाया है। इसी के बाद नागोर्नो-करबाख के नेता आर्येक हरुटुटियन ने ऐलान किया था कि उनकी सेना भी अजरबैजान के शहरों को निशाना बनाएगी।

अजरबैजान के साथ तुर्की और इजरायल
उधर, अजरबैजान के साथ तुर्की और इजरायल खड़े हैं। तुर्की ने एक बयान जारी कहा है कि हम समझते हैं कि इस संकट का शांतिपूर्वक समाधान होगा लेकिन अ‍भी तक आर्मीनियाई पक्ष इसके लिए इच्‍छुक नजर नहीं आ रहा है। तुर्की ने कहा क‍ि हम आर्मेनिया या किसी और देश के आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ अजरबैजान की जनता के साथ आगे भी खड़े रहेंगे। माना जा रहा है कि तुर्की का इशारा रूस की ओर था। वहीं, इजरायल भी अजरबैजान को घातक हथियारों की सप्लाई कर रहा है।

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किस मुद्दे को लेकर दोनों देशों में छिड़ी जंग
दोनों देश 4400 वर्ग किलोमीटर में फैले नागोर्नो-काराबाख नाम के हिस्से पर कब्जा करना चाहते हैं। नागोर्नो-काराबाख इलाका अंतरराष्‍ट्रीय रूप से अजरबैजान का हिस्‍सा है लेकिन उस पर आर्मेनिया के जातीय गुटों का कब्‍जा है। 1991 में इस इलाके के लोगों ने खुद को अजरबैजान से स्वतंत्र घोषित करते हुए आर्मेनिया का हिस्सा घोषित कर दिया। उनके इस हरकत को अजरबैजान ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कुछ समय के अंतराल पर अक्सर संघर्ष होते रहते हैं।

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