इमरान सरकार को उखाड़ फेंकने के लिये दो बेटियों ने मिलाया हाथ, आज मुल्तान में भरेंगी हुंकार

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इस्लामाबाद
पाकिस्तान में सरकार के खिलाफ संयुक्त विपक्ष आज मुल्तान शहर में जलसा करने जा रहा है। इस जलसे की सबसे खास बात इसमें शामिल होने वाली विपक्षी नेताओं की दो बेटियां हैं। जो इमरान सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए अलग-अलग पार्टियों में होने के बावजूद एक साथ मंच साझा करेंगी। विपक्ष की रैलियों में उमड़ रही भीड़ ने इमरान सरकार की नींद उड़ा दी है। यही कारण है कि सरकार अब विपक्ष की रैलियों को अनुमति देने में आनाकानी कर रही है।

मरियम नवाज और असीफा जरदारी होंगी शामिल
आज मुल्तान शहर में होने वाली रैली में पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (पीएमएल-एन) की नेता और नवाज शरीफ की बेटी भी शामिल होंगी। उनके साथ इस बार पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी की बेटी भी मंच पर दिखाई देंगी। पाकिस्तानी राजनीति में विपक्षी नेताओं की बेटियों के आने से माहौल गरमाने की आशंका है।

16 अक्टूबर से हो रही हैं सरकार विरोधी रैलियां
अक्टूबर से ही पाकिस्तान के 11 विपक्षी दलों का गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) देश के अलग-अलग हिस्सों में रैली कर रहा है। इस गठबंधन की पहली रैली 16 अक्टूबर को गुजरांवाला में, जबकि दूसरी रैली 18 अक्टूबर को कराची में हुई थी। तीसरी रैली 25 अक्टूबर को क्वेटा में और चौथी रैली 22 नवंबर को पेशावर में हुई थी। यह पांचवी रैली है जो मुल्तान शहर में होने जा रही है। इसके बाद अंतिम रैली 13 दिसंबर को लाहौर में होगी।

कराची रैली में मरियम नवाज के पति की गिरफ्तारी पर गरमाई थी सियासत
कराची में पाकिस्तान के संयुक्त विपक्ष की 18 अक्टूबर वाली रैली की रात को पुलिस ने इमरान खान की बेटी मरियम नवाज के पति कैप्टन (सेवानिवृत्त) मुहम्मद सफदर को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, पुलिस को कुछ घंटे में उन्हें रिहा भी करना पड़ा। क्योंकि, गिरफ्तारी का कोई ठोस आधार नहीं था। सफदर की गिरफ्तारी के बाद से ही पाकिस्तान में राजनीतिक बवाल शुरू हो गया। बाद में आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तानी सरकार के कहने पर उनकी गिरफ्तारी की गई थी।

सेना ने छोड़ा इमरान खान का साथ
पाकिस्तानी सेना ने भी अपने ऊपर बढ़ते दबावों को देखते हुए इमरान खान की मदद करने से इनकार कर दिया है। इसी कारण पाकिस्तान आर्मी चीफ के निर्देश पर हाल में ही चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के चेयरमैन और पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपना इस्तीफा दे दिया था। अब जल्द ही पाकिस्तानी सेना अपने अधिकतर जनरलों को सरकार की सेवा से हटाने जा रही है।

पाकिस्तान में कट्टर धार्मिक पार्टियों की ताकत बढ़ी
पाकिस्तान में इस्लामी पार्टियों का अस्तित्व हमेशा ही दोयम दर्जे का रहा है। ये पार्टियां किसी न किसी बड़ी पार्टी के पीछे लगकर उसके लिए धार्मिक वोटों को बटोरने का काम करती हैं। लेकिन पिछले साल इस्लामाबाद को घेरने के लिए मौलाना डीजल ने जो मोर्चेबंदी की थी, इससे उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई है। वहीं, इस समय पाकिस्तान की मुख्यधारा की विपक्षी पार्टियां पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) नेतृत्व विहीन हैं।

प्रमुख विपक्षी पार्टियां नेतृत्व विहीन
पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष नवाज शरीफ इस समय सजा के डर से लंदन में छिपे हुए हैं। पाकिस्तानी कोर्ट तो लंदन तक उनके गिरफ्तारी का वारंट भेज चुकी है। जबकि उनके भाई और प्रमुख विपक्षी नेता शहबाज शरीफ मनी लॉन्ड्रिंग के केस में जेल में हैं। रही बात पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की तो बेनजीर भुट्टो की मौत के बाद इस पार्टी में कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो वोट खींच सके। बिलावल भुट्टो को लोग हल्के में लेते हैं, जबकि आसिफ अली जरदारी पर भ्रष्टाचार का केस चल रहा है।



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