कंटीले तार के पीछे कैदियों वाली ड्रेस पहने इन बच्चों की कहानी जानते हैं आप?

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वारसा
यह तस्वीर द्वितीय विश्वयुद्ध के खत्म होने के समय की है। जब पोलैंड के ऑश्वित्ज में हिटलर की हैवानियत का सबसे बड़ा सेंटर नाजी होलोकॉस्ट पर तत्कालीन सोवियत सेना ने कब्जा कर लिया था। उस दौरान इस तस्वीर को सोवियत सेना के किसी जवान ने अपने कैमरे में कैद किया था। जिसमें उस कंस्ट्रेशन कैंप के कांटेदार तार के पीछे कैदियों के कपड़े पहने बच्चे दिखाई दे रहे हैं। बताया जाता है कि अकेले इसी कैंप में हिटलर के आदेश पर 11 लाख से अधिक यहूदियों को गैस चेंबर में बंद करके मार दिया गया था।

होलोकॉस्ट पीड़ितों को आर्थिक मदद देगा जर्मनी
अब द्वितीय विश्वयुद्ध के खत्म होने के 75 साल बाद फिर से इस तस्वीर की चर्चा हो रही है। हाल में ही जर्मन सरकार ने कोरोना महामारी की बोझ से जूझ रहे होलोकॉस्ट पीड़ितों की सहायता के लिए आधे बिलियन यूरो से ज्यादा की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। इसके पीड़ितों की सबसे ज्यादा संख्या इजरायल में रहती है। वहां हर साल 27 जनवरी को होलोकॉस्ट मेमोरियल डे भी मनाया जाता है।

यहूदियों की पहचान की जाती थी खत्म
1939 में जर्मनी द्वारा विश्व युद्ध भड़काने के बाद हिटलर ने यहूदियों को जड़ से मिटाने के लिए अपने अंतिम हल (फाइनल सोल्यूशन) को अमल में लाना शुरू किया। बताया जाता है कि ऑश्वित्ज के नाजी होलोकॉस्ट सेंटर पर हिटलर की खुफिया एजेंसी एसएस यूरोप के अधिकतर देशों से यहूदियों को पकड़कर यहां लाती थी। जहां काम करने वाले लोगों को जिंदा रखा जाता था, जबकि जो बुढ़े या अपंग लोग होते थे उन्हें गैस चेंबर में डालकर मार दिया जाता था। इन लोगों के सभी पहचान के सभी दस्तावेजों को नष्ट कर हाथ में एक खास निशान बना दिया जाता था।

रूह कंपाने वाली दी जाती थी यातनाएं
इस कैंप में नाजी सैनिक यहूदियों को तरह तरह के यातनाएं देते थे। वे यहूदियों के सिर से बाल उतार देते थे। उन्हें बस जिंदा रहने भर का ही खाना दिया जाता था। भीषण ठंड में भी इनकों केवल कुछ चिथड़े ही पहनने को दिए जाते थे। जब इनमें से कोई बीमार या काम करने में अक्षम हो जाता था तो उसे गैस चेंबर में डालकर या पीटकर मार दिया जाता था। इस कैंप में किसी भी कैदी को सजा सार्वजनिक रूप से दी जाती थी, जिससे दूसरे लोगों के अंदर डर बना रहे।

यहूदियों को क्यों मारना चाहते थे नाजी
नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (NSDAP) को नाज़ी कहा जाता था। नाजी पार्टी जर्मनी में एक राजनीतिक पार्टी थी जो 1919 में प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुई थी। नाजी नेतृत्व का कहना था कि दुनिया से यहूदियों को मिटाना जर्मन लोगों और पूरी इंसानियत के लिए फायदेमंद होगा। हालांकि असल में यहूदियों की ओर से उन्हें कोई खतरा नहीं था। इसके लिए उन्होंने उम्र, लिंग, आस्था या काम की परवाह नहीं की।

Hitlar

कैसे खत्म हुआ नाजियों का यह कैंप
1945 में दूसरे विश्व युद्ध के खात्मे के समय जब सोवियत संघ की सेनाओं ने ऑश्वित्ज पर कब्जा किया, तब जाकर यह कैंप बंद किया गया। उस समय भी इस कैंप में सात हजार कैदी थे। हालांकि सोवियत सेना के हमले के पहले ही हार का अंदेशा देख नरसंहार से जुड़े कई सबूतों को नाजियों ने मिटा दिया था। फिर भी जो सबूत सोवियत सेनाओं के हाथ लगे वो हिटलर के जुल्म की दास्तां बताने के लिए काफी थे।



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