कश्मीर में ऑपरेशन ऑलआउट का असर, इस साल 30 कमांडरों समेत 177 आतंकी ढेर

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गोविंद चौहान, श्रीनगर
कश्मीर में आतंकियों के खात्मे का काम जारी है। गुरुवार को सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। जिससे कश्मीर में अब तक इस साल मारे जाने वाले आतंकियों की गिनती 177 हो गई है। इन्हें 72 ऑपरेशनों में मारा गया है। इनमें 30 के करीब अलग अलग आतंकी संगठनों के कमांडर शामिल हैं।

हिजबुल के रियाय नायकू को मई महीने में मारा गया था। वह हिजबुल का सबसे बड़ा आतंकी था जो कश्मीर में सक्रिय था। इसके अलावा पुलिस को इस साल दूसरी तरफ भी बड़ी सफलता मिली है। अब तक 20 स्थानीय युवकों को आतंकी बनने से बचाया गया है। मारे गए आतंकियों में 22 विदेशी हैं। पाकिस्तान कश्मीर में हालात को खराब करने के लिए हर प्रकार के प्रयास कर रहा है। जिससे कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ाया जा सके।

इस साल के शुरुआत से ही पुलिस, सेनाा और सीआरपीएफ मिलकर ऑपरेशन ऑलआउट में काम कर रहे हैं। आतंकियों के खिलाफ मिलने वाली सूचनाओं पर तुंरत काम किया जाता है। जिससे आतंकियों को काफी नुकसान हो रहा है। कश्मीर में ऑपरेशन ऑलआउट में सभी सुरक्षा एजेंसियां एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। इस साल साउथ कश्मीर में सक्रिय कई आतंकियों को मार गिराया गया। जोकि लंबे समय से सक्रिय रहकर आतंकवाद को बढ़ाने का काम कर रहे थे। युवाओं को आतंकवाद के रास्ते पर लाते थे।

अगस्त महीने में ढेर हुए कई बड़े आतंकी

सुरक्षाबलों को अगस्त महीने में बड़ी कामयाबी मिली है। 20 अगस्त को लश्कर के पाकिस्तानी कमांडर को दो साथियों के साथ साउथ कश्मीर में मार गिराया गया था। 12 अगस्त को पुलवामा में हिजबुल के कमांडर को मारा गया। 29 अगस्त को लश्कर के सज्जाद हैदर को बारामूला में मार गिराया गया। इसी दिन अलबदर के कमांडर को शोपिया में मारा गया। 17 अगस्त को लश्कर के सज्जाद हैदर को बारामूला में मारा गया। हंदवाडा में नसीर दीन से लेकर बाकी जगहों पर जुनेद सहराई, बुरहान कोका, बशीर कोका और जैश के आईईडी एक्सपर्ट अब्दुल रहमान उर्फ फौजी भाई को मारा गया है।

युवाओं को सही रास्ते पर लाने के लिए चल रहा अलग ऑपरेशन

दूसरी तरफ सुरक्षाबलों की तरफ से कश्मीर में एक और ऑपरेशन शुरू किया गया है। जिसमें कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों के परिजनों से संपर्क रखा जा रहा है। इसके अलावा उनके दोस्तों से संपर्क बनाया गया है। जिससे सक्रिय आतंकियों को फिर से वापस लाया जा सके। पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि परिजनों के माध्यम से आतंकियों को संपर्क किया जा रहा है कि वह आतंकवाद का रास्ता छोड़कर आम जिंदगी में लौट आए। इससे काफी फायदा मिल रहा है।



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