किसानों को कृषि बिल के बारे में बताने बीजेपी किसान मोर्च भी जुटा

Spread the love


नई दिल्ली
कृषि बिल को लेकर संसद से सड़क तक विरोध के सुर देखते हुए अब बीजेपी किसान मोर्चा भी किसानों को बिल के बारे में समझाने में जुट गया है। किसान मोर्चा के साथ ही बीजेपी के सभी कार्यकर्ता भी 25 सितंबर को अपने अपने बूथ के लोगों से संपर्क करेंगे। तब से बीजेपी आत्मनिर्भर भारत सप्ताह की शुरूआत कर रही है, जो गांधी जयंती तक चलेगा। इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ता अन्य मुद्दों के अलावा कृषि बिल को लेकर भी लोगों के सवालों का जवाब देंगे और बताएंगे कि यह बिल किसान विरोधी नहीं है बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ही एक कदम है।

ब्लॉक स्तर पर किसानों से संपर्क किया जाएगा
बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बलिया से सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि किसान मोर्चा के लोग ब्लॉक स्तर पर किसानों से लगातार संपर्क कर रहे हैं और उन्हें कृषि बिल के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति सबका हक है लेकिन हम फैलाए जा रहे भ्रम को दूर कर रहे हैं जिसकी वजह से ज्यादा किसान इसके समर्थन में हैं। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि बीजेपी के घोषणा पत्र में ही यह शामिल किया गया था कि किसानों की समृद्धि के लिए कानून बनाएंगे। घोषणापत्र पर भरोसे का संकट होता है और हमने इसे भरोसेमंद बनाने की पहल की है। पीएम के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की दिशा में किसानों की समृद्धि के लिए बनाया जा रहा कानून अहम कदम है।

मंत्रियों और सांसदों के वेतन, भत्ते में कटौती संबंधी विधेयकों को राज्य सभा की मंजूरी

किसानों के साथ संवाद करेंगे बीजेपी नेता
बीजेपी नेता ने कहा कि अगर किसी को कोई भ्रम है तो हम संवाद के लिए तैयार हैं। लेकिन विरोध करने वाले वे लोग हैं जो आढ़तियों के खर्चे पर विरोध कर रहे हैं। मंडियों में आढ़तियों का आधिपत्य था और वह अपनी शर्तों पर किसानों से उनका उत्पाद लेते थे। अब सरकार किसानों को यह अधिकार दे रही है कि वह कहीं भी अपना उत्पाद बेच सकते हैं। मंडी कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य हटाया जा रहा है। आढ़तियों को भी व्यवसाय करना चाहिए लेकिन किसानों को उनके उत्पाद की लाभकारी कीमत देकर।

MSP के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा
उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री संसद में कह चुके हैं कि एमएसपी नहीं हटा रहे हैं तो शंका की गुंजाइश ही कहां बचती है। तो बीजेपी का इतना पुराना सहयोगी अकाली दल क्यों विरोध कर रहा है? इस सवाल पर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि हमने उन्हें समझाया, वह नहीं समझ पाए तो उसकी वजह वह ही बेहतर जानें।



Source link

Previous Article
Next Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *