कृषि कानून पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, शीर्ष अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब

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हाइलाइट्स:

  • कृषि कानून पर सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई
  • शीर्ष अदालत ने इस मामले पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
  • मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी
  • बता दें कि कांग्रेस शासित राज्यों समेत कई विपक्षी पार्टी शासन वाले राज्य केंद्र के कृषि कानून का कर रहे हैं विरोध

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में लागू किए गए कृषि कानूनों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा है। इन विधेयकों का पंजाब में कांग्रेस के नेतृत्व में लगातार विरोध हो रहा है। चीफ जस्टिस एस.ए.बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने पहले इस जनहित याचिका पर यह कहकर सुनवाई करने से मना कर दिया था कि चूंकि कानून जारी कर दिए गए हैं, ऐसे में सुनवाई करने का कोई मतलब ही नहीं है। इसके बाद पीठ ने छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के नेता राकेश वैष्णव द्वारा दायर की गई एक अन्य जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा।

मुख्य न्यायाधीश ने अटॉर्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल से कहा, ‘विभिन्न हाई कोर्ट में इनका जवाब देने के बजाय आप इसी अदालत में इसका जवाब दाखिल करें।’ एजी ने इस सुझाव पर सहमति जताई और अब मामले की आगे की सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पहले याचिकाकर्ताओं के वकील एम.एल.शर्मा से कहा था, ‘कानून पारित हो गया है, इसलिए कार्रवाई करने का कोई कारण नहीं है।’ अधिवक्ता फौजिया शकील के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, ‘ये विधेयक देश में कृषि के कॉरपोरेटराइजेशन को प्रोत्साहित करने वाला है। जबकि खेती गरीब किसानों की जीवनरेखा है। यह अधिनियम मुख्य रूप से किसानों के हित से समझौता करने वाला है और उनके विवादों को सुलझाने की बजाय उन्हें प्रायोजकों की दया पर छोड़ने वाला है।’



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