कृषि बिलः संसद से पास लेकिन सड़क पर हो सकती है तकरार

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नई दिल्ली
भले मोदी सरकार ने संसद से ‘विवादित’ किसान बिल को पास कराने में सफलता हासिल कर ली लेकिन असली चुनौती अब शुरू होती है। किसानों के बीच नए बिल को लेकर थोड़ी आशंका आई तो विपक्ष आक्रामक रूप से सामने आ गया। अब विपक्ष संसद के बजाय सड़क पर भी घेरने की कोशिश कर सकता है। अगले कुछ दिनों में सियासत में किसानों का मुद्दा एक बार फिर गर्म दिख सकता है। दरअसल विपक्ष के लिए हमेशा किसानों से जुड़ा मुद्दा नैरेटिव के हिसाब से अनुकूल लगता है और हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बैकफुट पर रहने वाली विपक्ष इससे काउंटर कर सकती है।

साथ ही किसानों की परेशानी के रूप मे विपक्षी दलों को एक ऐसा मुद्दा मिल गया है जिससे वे साझा अजेंडा तय कर सकते हैं। इसकी झलक रविवार को को मिली जब किसानों के आंदोलन में तमाम विपक्षी दल एक मंच पर आए। विपक्ष के लिए सरकार को घेरने के लिए यह सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है और अगले कुछ दिनों में यह मौका हाथ से जाने नहीं देगी। साथ ही कई राज्यों में विपक्ष की सरकार है और वह केंद्र सरकार के इस बिल के विरोध में बोल कर और मुश्किल खड़ी कर सकता है।

सरकार को इस मामले की गंभीरता का अंदाजा है। इसी वजह से जब किसान आंदोलन में केंद्र सरकार घिरी तो राजनाथ सिंह सरकार के ‘संकटमोचक’ के रूप में सामने आए। 2018 में जब किसान आक्रोशित हुए तो राजनाथ सिंह ही किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थ के रूप में सामने आए थे। सरकार के लिए इसलिए भी चिंता की बात है कि पिछले कुछ सालों में किसानों के मुद्दे पर उनका सियासी नुकसान होता रहा है।
यह बात मोदी सरकार को अधिक चिंता में डाल रही है।

2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव में गावों में बीजेपी के खराब प्रदर्शन के पीछे मूल रूप से किसानों का आक्रोश ही बड़ा कारण माना गया। इसके बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी किसानों के लगातार आंदोलन के बाद हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को विधानसभा चुनाव मं हार झेलनी पड़ी।

इसके बाद 2019 आम चुनाव से पहले मोदी सरकार बड़े डैमेज कंट्रोल के रूप में सामने आई और सभी किसानों के हर साल 6 हजार रुपये देने की योजना की शुरूआत की। इसका सियासी लाभ मिला और आम चुनाव में दाबारा विश्वास मिला।
लेकिन एक बार फिर किसानों का आंदोलन सामने आने के बाद इस बार सरकार उन्हें किस तरह मनाएगी या भरोसा देगी यह आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।

सूत्रों की मानें तो सरकार के शीर्ष स्तर पर सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि पिछले एक साल से पीएम मोदी की अगुवाई में सरकार की इमेज किसान और गरीबों के पक्ष वाली बनाई गई है। किसानों और गरीबों के बीच मोदी सरकार ने तब पैठ बनाई जब विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर सूट-बूट सरकार का ठप्पा लगाने की कोशिश की थी। वहीं सरकार ने संकेत दिया कि इस बार इन तीनों बिल से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। कुल मिलाकर किसान सियासत की नई जमीन बने हैं जहां अगले कुछ दिन राजनीति खूब लहलहाएगी।



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