कॉलेज एडमिशन और नौकरियों में मराठा समुदाय के लिए रिजर्वेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

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हाइलाइट्स:

  • सुप्रीम कोर्ट ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने के 2018 के महाराष्ट्र के कानून के अमल पर लगाई रोक
  • जिन लोगों को इसका लाभ मिल गया है, उन्हें किसी भी तरह परेशान नहीं किया जाएगा
  • साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कानून बनाया था
  • बंबई हाई कोर्ट ने पिछले साल जून में इस कानून को वैध ठहराया था, कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी महाराष्ट्र सरकार के 2018 के कानून के अमल पर बुधवार को रोक (stay on maratha reservation in maharashtra) लगा दी। कोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया कि जिन लोगों को इसका लाभ मिल गया है, उन्हें किसी भी तरह परेशान नहीं किया जाएगा। साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए इस आरक्षण कानून को बनाया था।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट्ट की पीठ ने इस मामले को वृहद पीठ का सौंप दिया जिसका गठन प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे करेंगे। इन याचिकाओं में शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी कानून की वैधता को चुनौती दी गई है।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि 2018 के कानून का जो लोग लाभ उठा चुके हैं, उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण कानून, 2018 में बनाया था।

बंबई हाई कोर्ट ने पिछले साल जून में इस कानून को वैध ठहराते हुये कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है और इसकी जगह रोजगार में 12 और प्रवेश के मामलों में 13 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए।



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