कोरोना इलाज के बिल में मास्क और सैनिटाइजर के नाम पर 20 हजार वसूले, दिए केवल 2

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एनबीटी न्यूज, गुड़गांव
निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों से लगातार ओवरचार्ज किया जा रहा है। ताजा मामले में एक पीड़ित ने मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड में शिकायत दी है कि उनसे मास्क, सैनिटाइजर, कैप और ग्लव्स के नाम पर 20 हजार रुपये वसूले गए, जबकि कई बार मांगने के बावजूद भी 7 दिन में उन्हें केवल 2 बार ही मास्क दिए गए। बाकी बिल की रकम तो उन्होंने इंश्योरेंस पॉलिसी से दे दी, लेकिन ये 20 हजार देने उन्हें भारी पड़ गए। अस्पताल के दबाव बनाने के बाद किसी से उधार लेकर उन्होंने ये रकम दी। उनका कहना है कि जो चीज यूज ही नहीं कि उसके पैसे वह क्यों दें। इस मामले में सिविल सर्जन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग केवल मेडिकल नेग्लिजेंसी के मामलों में ही संज्ञान लेता है। ये ओवरचार्ज से जुड़ा मामला है, इसकी शिकायत पुलिस को करनी होगी।

7 सितंबर को हुए थे भर्ती, 14 को डिस्चार्ज सतगुरु एंक्लेव निवासी शुभम पटेल ने बताया कि वे मारुति कंपनी में ट्रेनिंग के लिए आए हुए हैं। उनमें कोरोना के लक्षण थे। जांच करवाने के लिए 7 सितंबर को साउथ सिटी-1 स्थित एक निजी हॉस्पिटल में गए। वहां आरटीपीसीआर जांच करवाई तो कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। अस्पताल ने इलाज के लिए भर्ती कर लिया। 7 दिन इलाज देने के बाद 14 सितंबर को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। 7 दिन के इलाज के नाम पर उनसे 1,91202 रुपये का बिल थमा दिया गया। हेल्थ इंश्योरेंस लिया हुआ था। इंश्योरेंस कंपनी ने अस्पताल को 1,48,763 रुपये चुकाए। बाकी बचे 30,864 रुपये का भुगतान करने के लिए अस्पताल की ओर से दबाव दिया गया। अस्पताल से बिल के बारे में पूछा उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। कहा कि भुगतान करने के बाद ही बताया जाएगा कि किस दवा के लिए कितने पैसे लिए गए हैं।

‘बिल की कॉपी देखी तो सिर चकरा गया’शुभम ने बताया कि उन्होंने दोस्तों से उधार लेकर किसी तरह बिल का भुगतान किया। बिल की कॉपी देखने के बाद सिर चकरा गया। बिल में केवल मास्क, सैनिटाइजर, कैप और ग्लव्स के नाम पर करीब 20 हजार रुपये जोड़े गए थे, जबकि कई बार मांगने पर 7 दिनों में केवल 2 बार ही मास्क दिए गए थे, जो चीज मिली ही नहीं उसका बिल भी जोड़ा हुआ था। इस बारे में सिविल सर्जन ऑफिस में लिखित शिकायत दी है। सिविल सर्जन डॉक्टर वीरेंद्र यादव ने बताया कि इस बारे में शिकायत मिली है, लेकिन यह शिकायत ओवरचार्ज की है। इस बारे में पुलिस शिकायत दी जानी चाहिए। पुलिस ही मामले जांच करेगी।



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