कोरोना, लक्षण, सावधानियां

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हाइलाइट्स:

  • एक्सपर्ट पैनलः डॉ. (प्र.) संजय राय कम्यूनिटी मेडिसिन, एम्स
  • डॉ. जतिन आहूजा, डीएम, वायरॉलजी, संत परमानंद अस्पताल
  • डॉ. पूनम साहनी, डायरेक्टर-लैब, सरल डायग्नोस्टिक्स
  • डॉ. अव्यक्त अग्रवाल सीनियर, पीडीअट्रिशन
  • डॉ. विवेक दीक्षित, सीनियर साइंटिस्ट, एम्स
  • परमीत कौर, चीफ डाइटिशन, एम्स
  • डॉ. एस. एन. डोरनाला, वैद्य, साइंटिस्ट फेलो

आजकल ऐसे भी बहुत से लोग सामने आ रहे हैं जो कोरोना से संक्रमित तो हैं लेकिन उनमें लक्षण नहीं दिखते। क्या ऐसे लोगों को भी खास ख्याल रखने की जरूरत होती है? क्या ये लोग अपने आसपास वालों के लिए खतरा बन सकते हैं? एक्सपर्ट्स से बात करके जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती

जब परिवार में कोई कोरोना पॉजिटिव हो या फिर किसी ऐसे शख्स की रिपोर्ट पॉजिटिव आई हो, जिसके संपर्क में हम भी रहे हों तो कोरोना की जांच करवाई जा सकती है। अगर उस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल न रखा गया हो और मास्क भी न लगा हो तब जांच जरूर करवाएं। चाहे उस वक्त कोरोना के लक्षण दिख रहे हों या नहीं। यह क्विक ऐंटिजेन टेस्ट हो सकता है या फिर RT-PCR। रिजल्ट पॉजिटिव आए या नेगेटिव, मास्क लगाकर और 6 फुट की दूरी का पालन करते हुए ही घर से बाहर जाना है। वहीं परिवार में जिसका टेस्ट पॉजिटिव निकला हो, उसे सेल्फ आइसोलेशन में रहने दें। परिवार के दूसरे सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी अगर लक्षण न उभरें यानी बिना लक्षण वाले (कोरोना कैरियर) हों तब भी जरूरी बातों का ध्यान रखें।

जब लक्षण न हो, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव तो 3 काम…
1. होम आइसोलेशन का बंदोबस्त
बिना लक्षण वाले मरीज (कोरोना करियर) की सेहत खुद के लिए चिंता का बड़ा विषय नहीं होती, लेकिन वह दूसरे लोगों तक इन्फेक्शन फैला सकता है। इसलिए आइसोलेशन की खास बातों का ध्यान रखें:
-मरीज को होम या सेल्फ आइसोलेशन के दौरान हर समय तीन लेयर वाला मास्क पहने रहना चाहिए। हर 12 घंटे में इस मास्क को बदल दें। अगर लगता है कि पसीने की वजह से मास्क गीला हो गया है या धूप-मिट्टी से गंदा हो गया है तो उसे तुरंत बदल लें।
– मास्क को 1 प्रतिशत सोडियम हाइपोक्लोराइडड के साथ डिसइंफेक्ट करने के बाद ही कूड़ेदान में फेंका जाना चाहिए।
– आइसोलेशन के दौरान मरीज को सिर्फ एक तय कमरे में ही रहना चाहिए। साथ ही परिवार के सभी लोगों से दूर रहना चाहिए। खासतौर पर बुजुर्गों, हाइपरटेंशन के मरीजों, जिन्हें हार्ट की समस्या हो या जिन्हें गुर्दे की बीमारी हो, उनसे दूरी जरूरी है।
– सफाई का ध्यान रखें। कहीं भी छूने के बाद सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हुए हाथों को
साफ रखें।
-दूसरों की पर्सनल चीजों का इस्तेमाल न करें और न ही अपने सामान दूसरे लोगों को इस्तेमाल के लिए दें।
-जो दिशा-निर्देश डॉक्टर समझाएं, उनका पालन करें। ऐसा पेशंट को पूरी तरह ठीक होने के बाद भी करना है। साथ ही नियमित रूप से अपने शरीर का तापमान चेक करते रहें।
-चूंकि बिना लक्षण या कम लक्षण वाले मरीजों को छींकने या खांसने जैसी परेशानी नहीं होती, इसलिए परिवार के सदस्य मास्क लगाकर उसके कमरे में जाकर उसे खाना दे सकते हैं।
-अगर मुमकिन हो तो ऐसे लोगों के लिए वॉशरूम अलग हों। अगर न हों तो इस्तेमाल करने के बाद उसे डिसइंफेक्ट कर दें।

2. शरीर के इशारों पर नजर
अगर कोरोना किसी वजह से हमारे घर तक पहुंच जाए तो परिवार के वे सदस्य जिनकी सेहत और इम्यून सिस्टम कुछ कमजोर होता है (जैसे बुजुर्ग, बीपी और शुगर पेशंट, 10 साल से कम उम्र के बच्चे या वे जिन्हें दिल की या कोई दूसरी बड़ी बीमारी हो) की सेहत पर नजर रखें। भले ही कोरोना बिना लक्षण वाला ही क्यों न हों।
ऑक्सिजन लेवल जरूर देखें
-ऐसे लोगों में सामान्य से कोई भी अलग लक्षण दिखें तो फौरन सजग हो जाएं।
– लक्षणों को नजरअंदाज बिलकुल न करें।
-घर में ऑक्सिमीटर जरूर रखें। 600 रुपये की कीमत से ही ऑक्सिमीटर मिलने शुरू हो जाते हैं। Amazon & Flipkart आदि पर भी इनके ऑप्शन मिल जाएंगे। खरीदने से पहले फीडबैक जरूर देख लें। इसकी मदद से यह देखते रहें कि उस शख्स को ऑक्सिजन सही मात्रा में मिल रही है या नहीं। अगर ऑक्सिजन का लेवल 94 से ज्यादा है तो परेशानी की बात नहीं।

ये हैं कुछ ऑक्सिमीटर…
BPL Medical
कीमत: 1650 रुपये

Dr Trust
कीमत: 2000 रुपये

Sigma Instruments
कीमत: 600 रुपये
नोट: कीमत कम-ज्यादा हो सकती है। इनके अलवा और भी अच्छे ब्रैंड हैं।

– कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने और लक्षण दिखने के 7 दिनों तक ऑक्सिजन स्तर पर नजर जरूर रखें। वैसे यह पूरी तरह पेशंट की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों में कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी लक्षण बने रह सकते हैं। उनमें सांस फूलने की समस्या भी दिख सकती है। ऐसे में पूरी तरह ठीक होने तक दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और रात में) ऑक्सिजन का स्तर जांचना जरूरी है। अगर बीच में कभी सांस की परेशानी हो तब भी ऑक्सिजन का लेवल जरूर देख लें।

ऑक्सिमीटर का इस्तेमाल
– वैसे तो ऑक्सिमीटर ऑक्सिजन का सही स्तर बताने के लिए इस्तेमाल होता है लेकिन कुछ ऑक्सिमीटर गलत रीडिंग दे सकते हैं। अच्छा होगा कि एक जैसी उम्र के दो लोगों के हाथ की पहली उंगली जिसे तर्जनी (Index finger) कहते हैं, में लगाकर देख लिया जाए। वयस्क के मामले में ऑक्सिमीटर 97 से 100 के बीच रीडिंग देता है।
-यह रीडिंग कुछ सेकंड्स के लिए नीचे जाए और फिर बढ़ जाए तो चिंता न करें। यह रीडिंग बदलती रहती है। ऐसा उंगली के हिल जाने से भी हो सकता है।
-उंगली गीली हो (पसीना, पानी लगा हो), ठंडी हो, तब भी रीडिंग गलत आ सकती है।
– उंगली का प्लेसमेंट सही न हो, पतली उंगलियों या बच्चों की उंगलियों में भी गलत रीडिंग हो सकती है। n हाथ स्थिर न हो तब भी गलत रीडिंग आ सकती है। हाथ को किसी भी सतह जैसे पलंग या टेबल पर स्थिर करके रख लें।
– रीडिंग कम आने पर (94 से नीचे) कुछ देर ऑक्सिमीटर लगा रहने दें। यदि रीडिंग खुद ही न बढ़े तो दूसरे हाथ की पहली उंगली में लगा कर देखें। फिर भी कम दिखे तो इसे सही मानें।
– कई बार शुरुआत के कुछ सेकंड्स पल्स ऑक्सिमीटर गलत रीडिंग दे सकता है। इसलिए धैर्य रखें। कुछ देर में रीडिंग सेटल होती है।
-अगर 94 से कम जब 90 तक आ जाए तो डॉक्टर से बात करें और उनकी सलाह मानें।
-यहां इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि ऐसे में पैनिक नहीं होना है। कई बार शुरुआत में रीडिंग कम आती है। अगर रीडिंग 15 से 30 मिनट तक 90 या इससे कम आए, तब डॉक्टर से मिलें।

घर पर रख सकते हैं पोर्टबल ऑक्सिजन सिलिंडर
अगर घर में कोई कोरोना मरीज हो, भले ही वह बिना लक्षण या कम लक्षण वाला ही क्यों न हो, उसके लिए आपात स्थिति के लिए उपाय कर सकते हैं। डॉक्टर से संपर्क रखने के अलावा नजदीकी अस्पताल का भी इमरजेंसी नंबर जरूर रखें। इनके अलावा डॉक्टर की सलाह से घर पर पोर्टबल ऑक्सिजन सिलिंडर भी रख सकते हैं। इसका वजन भी कम है। इसकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। अस्पताल पहुंचने या ऐंबुलेंस आने तक यह काम आ सकता है।

Oxy99 Portable Oxygen Can
कीमत: 500 रुपये

Oxycharge
कीमत: 400 रुपये

नोट: कीमत कम ज्यादा हो सकती है। ब्रैंड और भी हैं।

नोट: पोर्टबल ऑक्सिजन सिलिंडर खरीदने से पहले इसकी उपयोगिता के बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

शरीर के तापमान पर निगरानी
जब भी इन्फेक्शन होता है तो शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में परिवारवाले बार-बार तापमान देखने लगते हैं। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
-कोरोना के 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में मरीजों में बुखार एक कॉमन लक्षण है।
– अगर शरीर का तापमान 99 फारेनहाइट से ज्यादा हो तो Paracetamol कंपोजिशन की 1 गोली ले सकते हैं। सही डोज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
– आमतौर पर डॉक्टर सलाह दे देते हैं कि कितने समय के अंतराल पर तापमान चेक करना है।
-अगर बुखार बढ़ रहा हो तो एक घंटे में एक बार तापमान लें। इससे बुखार का ग्राफ समझने में आसानी होती है। एक डायरी बनाकर उसमें रीडिंग दर्ज करते रहें।
– पारे वाला थर्मामीटर या डिजिटल दोनों मार्केट में आसानी से मिल जाते हैं।
– पारे वाले थर्मामीटर को कई बार हाथ से झटका देकर उसे नॉर्मल पोजिशन पर लाना पड़ता है। हालांकि कई बार ऐसे में थर्मामीटर हाथ से छूटकर टूटने का खतरा रहता है।
– डिजिटल थर्मामीटर में बुखार की रीडिंग काफी आसान होती है।
– थर्मामीटर को कभी भी मुंह में न लगाएं, उसे बगल में बाजू के नीचे दबाएं।
– कई बार थर्मामीटर सही तरीके से फिट नहीं होता है या बगल में पसीना होता है। ऐसे में रीडिंग सही नहीं आती। इसलिए यह भी ध्यान रखें कि वह जगह नहाने की वजह से भीगी या गीली (पसीने की वजह से) न हो। इससे असल रीिडंग में परेशानी आ सकती है। ऐसा होने पर दोबारा रीडिंग लें।
-अगर रीडिंग पर यकीन न हो तो किसी दूसरे शख्स को भी लगाकर देख सकते हैं।
-कोरोना मरीज के लिए अलग थर्मामीटर हो।

3. पहले से बीमारों का ध्यान
जब लक्षण नहीं होते तो परेशानी नहीं होती। लेकिन बुजुर्गों, शुगर, बीपी, किडनी के मरीजों को लक्षण कभी भी उभर सकते हैं। इसलिए जब भी कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आए, ऐसे लोग जरूर डॉक्टर की संपर्क में रहें। घर में ऑक्सिजन लेवल और फीवर को जांचते रहें। अगर ऑक्सिजन लेवल 94 से कम यानी 90 तक आ जाए और यह 15 मिनट से 30 मिनट तक रहे तो डॉक्टर को इसकी सूचना जरूर दें। अगर शुगर या बीपी पेशंट हैं तो शुगर, बीपी मॉनिटर करते रहें। इनमें परिवर्तन होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

इम्यूनिटी बढ़ाना सभी के लिए बहुत जरूरी…
सही रुटीन फॉलो करें
पूरी हो नींद: अगर कोई बीमारी न हो, 7 से 8 घंटे की नींद लें। अगर कोरोना या कोई दूसरी परेशानी हो तो 8 से 9 घंटे की नींद लें।
सुबह जल्दी उठ जाएं: जब नींद पूरी हो जाए, तब सुबह 5 से 6 के बीच
उठ जाएं।
उठने के बाद: शरीर को डिटॉक्स करने के लिए एक गिलास नीबू पानी (सामान्य या गुनगुना) पी लें।
-योगासन (सूर्य नमस्कार) और प्राणायाम (अनुलोम-विलोम और भ्रामरी) 10 से 15 मिनट तक करें।
-ध्यान 5 से 10 मिनट तक करने से भी फायदा होगा।
-नशे से दूर रहें।
– खुश रहें। संगीत अच्छा जरिया हो सकता है।

डाइट हो राइट
-जब हम बीमार होते हैं, तब ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना या जंक फूड खाएं तो शरीर की काफी ऊर्जा उसे पचाने में ही खर्च हो जाती है।
– जितना भी आमतौर पर खाते हैं, उससे कम खाएं। अगर कोई शख्स 3 चपाती खाता हो तो 1 या 2 ही खाए।
-हरी सब्जियां हर दिन कम से कम 2 बार खाएं।
-दाल की मात्रा ज्यादा हो। प्रोटीन के लिए जरूरी है।
-आयुर्वेद का सुझाव है कि जब तक बुखार हो (आमतौर पर 7 दिनों तक), दूध और दूध से बनी चीजें न खाएं।

डाइट में शामिल हो विटामिन-सी, बी और जिंक वाली चीजें
कौन-सा फल लें: 1 बड़ा अमरूद (200 ग्राम) या 2-3 संतरे या मौसमी (300 ग्राम) या 4 टमाटर (250 ग्राम)। इन्हें हर दिन खा सकते हैं। दिनभर में कभी भी खा सकते हैं। इनसे हमें कुदरती तौर पर पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी मिल जाएगा। इनके अलावा हमारे भोजन में साग-सब्जी या फल 4 अलग-अलग रंगों के हों तो शरीर की जरूरी मिनरल या विटामिन की जरूरत पूरी हो जाती है। जरूरी नहीं कि ये चारों रंग हर दिन लें। जैसे- लाल: टमाटर, हरा: अमरूद, मौसमी पालक, लौकी आदि, पीला: पपीता, संतरा आदि और सफेद: केला। इनसे विटामिन-बी की जरूरत भी पूरी हो जाती है।
जिंक के लिए: नट्स (3 से 4 बादाम या 1 मुट्ठी रोस्टेड मूंगफली या 1 अखरोट) का सेवन हर दिन कर सकते हैं।

काढ़ा लेेने का सही तरीका
पानी: 60 से 70 एमएल (1 कप), दूध: 60 से 70 एमएल (1 कप)
तुलसी के पत्ते: 3, लौंग: 1, काली मिर्च: 1 दालचीनी: एक चुटकी पाउडर
चीनी या शक्कर: स्वाद के अनुसार, अगर डायबीटीज है तो न लें या वैद्य की सलाह से लें।
-अगर लौंग, दालचीनी और काली मिर्च ले रहे हैं तो मुलेठी न लें या बहुत कम कर दें। इन तीनों की जगह मुलेठी लेना चाहते हैं तो एक बार किसी वैद्य से जरूर बात कर लें। काढ़ा दिन में 2 बार से ज्यादा न लें।
-काढ़ा हर शख्स की परेशानी और उसकी जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।
नोट: जिन्हें काढ़ा पचाने में परेशानी है, वे दूध और पानी में सिर्फ तुलसी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऐसे लें धूप
-सर्दियों में सुबह 9 से 12 बजे तक और गर्मियों में सुबह 8 से 10 तक धूप में बैठें।
– सामान्य आदमी को हर दिन 30 से 35 मिनट धूप में जरूर बैठना चाहिए।
– अगर रोज संभव न हो तो सप्ताह में 3 दिन या एक-एक दिन छोड़कर भी धूप में बैठकर विटामिन-डी ले सकते हैं या एक सप्ताह में 2 से 3 घंटे भी धूप में बैठ जाएं तो शरीर की एक सप्ताह की जरूरत लगभग पूरी हो जाएगी।
– चेहरा, गर्दन, पीठ, हाथ आदि पर धूप लगाएं। अगर किसी को धूप से एलर्जी है तो वह लगातार धूप में न बैठे। बीच-बीच में 15 मिनट बाद 5 या 10 मिनट का ब्रेक ले लें।
-धूप से चेहरा काला पड़ने की टेंशन है तो वह घुटने से नीचे के भाग को ही धूप में रखे।
-गोरी त्वचा वालों की तुलना में सांवली त्वचा वालों को 10 से 15 मिनट धूप में ज्यादा बैठना चाहिए।
– अगर बुजुर्ग हैं तो 35 से 40 मिनट रोज बैठें।
– जब तक शरीर को धूप गुनगुनी लगे, बैठे रहें। तीखी लगे, चुभन लगे तो न लें।

जीन्स पर सकारात्मक असर
अमेरिका के वैज्ञानिक डॉ. माइकल हॉलिक ने विटामिन-डी और सेहत पर काफी रिसर्च की है। उनकी स्टडी से पता चला है कि विटामिन-डी के सप्लिमेंट्स लेने से प्रतिरक्षा कोशिकाओं में 291 जीन्स ज्यादा ऐक्टिव रहते हैं।

कुछ खास बातें
लक्षण नहीं तो इलाज नहीं

किसी के परिवार में अगर कोई कोराना पॉजिटिव है या कोई शख्स किसी ऐसे शख्स के साथ कुछ पल बिताए हों जिसे बाद में कोरोना की पुष्टि हुई है, ऐसे लोगों को अपना कोरोना टेस्ट जरूर कराना चाहिए। यह टेस्ट क्विक ऐंटिजेन टेस्ट हो सकता है या फिर RT-PCR। इस टेस्ट के बाद अगर किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, लेकिन उनमें कोरोना का कोई भी लक्षण नहीं है तो उन्हें इलाज की जरूरत नहीं। दरअसल, अभी तक कोरोना के लिए न ही कोई वैक्सीन है और न ही दवा। हां, अभी लक्षणों का ही इलाज होता है। इसलिए लक्षण नहीं हैं तो इलाज की जरूरत नहीं।
वहीं यह भी सच है कि ऐसे लोग कोरोना करियर तो हैं ही। ये दूसरों तक कोरोना वायरस पहुंचा सकते हैं। इसलिए इन्हें मास्क लगाकर जरूर रहना है। घर में भी हैं तो भी 17 दिनों के लिए सेल्फ आइसोलेशन में रहना होगा। साथ ही 6 फुट की दूरी का पालन करें। 17 दिनों के बाद वह अपने घर के लोगों से आम दिनों की तरह मिल सकते हैं फिर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। दरअसल, कोरोना का इलाज अभी आया नहीं है, अभी तो सिर्फ उसके लक्षणों का ही इलाज किया जाता है।

एक्स-रे और CT स्कैन की जरूरत कब
शरीर के भीतर झांकने के लिए ऐसी मशीनों से की गई जांच काम आती है जहां रिपोर्ट से तस्वीर साफ नहीं होती। यहां इस बात को समझना जरूरी है कि कई बार ऐसा होता है कि कोरोना मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव आती है, लेकिन लक्षण उनमें कोरोना (खासकर निमोनिया) वाले होते हैं यानी लंग्स में परेशानी हो जाती है। ऐसे मामलों में अमूमन CT स्कैन काम करता है। इसकी मदद से फेफड़ों की असल स्थिति का पता चल जाता है।
-कोरोना इन्फेक्शन जांचने में भी इस्तेमाल होता है।
– कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब लक्षण कोरोना के हैं लेकिन टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आए। शख्स को सांस लेने में परेशानी हो।
– एक्स-रे से ज्यादा CT स्कैन कारगर है। एक्स-रे से फेफड़ों की स्थिति का तो पता चलता है लेकिन अंदर क्लॉटिंग का नहीं।
-फेफड़ों के अंदर की क्लॉटिंग देखने के लिए CT स्कैन की जरूरत होती है।
– CT स्कैन कराकर इलाज किया जा सकता है।

CT वैल्यू की बात
अगर RT-PCR टेस्ट कराया जाए तो कोरोना रिपोर्ट के साथ ही बहुत-सी जानकारियां दी जाती हैं। उसी में से एक जानकारी है CT (Threshold Cycle) वैल्यू की। आमतौर पर CT वैल्यू के आधार पर ही यह नतीजा निकाला जाता है कि शरीर में मौजूद कोरोना का इन्फेक्शन कितनी जल्दी फैल रहा है और वह कितना खतरनाक है।
– यह माना जाता है कि कम CT वैल्यू का मतलब है वायरस का लोड कम है और ज्यादा CT वैल्यू का मतलब ज्यादा। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ऐसे भी मामले आए हैं जब पेशंट की CT वैल्यू कम थी, लेकिन कोरोना के लक्षण बहुत ज्यादा थे और CT वैल्यू ज्यादा थी पर कोरोना में लक्षण बहुत कम थे।
– कई बार स्वैब के सेंपल में भी वायरस की मौजूदगी कम हो जाती है जबकि शरीर के अंदर वायरस का इन्फेक्शन ज्यादा भी हो सकता है। CT रिपोर्ट को सही मानकर इलाज नहीं किया जा सकता।
– डॉक्टर भी CT वैल्यू देखकर इलाज कम ही करते हैं। वे पेशंट की स्थिति और मौजूदा लक्षणों को देखकर ही इलाज बताते हैं। यही कारण है कि ICMR (Indian Council of Medical Research) ने CT वैल्यू लिखने के लिए लैब्स को कोई गाइडलाइंस नहीं दी हैं।

दोबारा जांच कब
कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के 17 दिनों तक आइसोलेशन में रहना होता है। इसके बाद लक्षण न हों तो जांच कराना बहुत जरूरी नहीं है, बशर्ते किसी को ऐसी जगह जाना हो जहां कोरोना रिपोर्ट की डिमांड हो। आमतौर पर हम दोबारा जांच तब करवाते हैं जब कोरोना के लक्षण खत्म हो जाते हैं या कम से कम 17 दिन गुजर चुके होते हैं। ऐसे मामले भी होते हें जब मरीज में कोई भी लक्षण न हो, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाए। दरअसल, इसकी वजह होती है आइसोलेशन पूरा करने के बाद भी शरीर में डेड वायरस या निष्क्रिय वायरस की मौजूदगी हो। भले ही ऐसे वायरस शरीर के लिए नुकसानदायक न हों। फिर भी आरोग्य सेतु ऐप में अपडेट होने के लिए रिपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।
परिवार के सदस्यों तक न फैले कोरोना इसके लिए जरूरी है कि…
– सभी सदस्यों की इम्यूनिटी मजबूत हो, इसके लिए जरूर काम करें।
– कोरोना से लड़ाई लंबी लड़नी है इसलिए तैयारी जारी रखनी होगी। इसके लिए यह भी जरूरी है कि हम अपनी रुटीन और डाइट सही रखें।
– ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक आदि खाने-पीने से बचें।
– मौसम बदल रहा है, इसलिए शरीर पर ध्यान देना जरूरी है। डेंगू से बचने के लिए मच्छर को दूर रखें।
– अगर किसी को डेंगू के साथ कोरोना हो गया तो बहुत ही खतरनाक हो सकता है।
– जो भी घर का सदस्य बाहर जाता है और दूसरे लोगों से मिलता है, वह मास्क और 6 फुट की दूरी का पालन जरूर करे।
– कोशिश करें कि बाहर जाकर बाजार की बनी चीजें न खाएं।
– बाहर से आने पर अपने चप्पल या जूते घर के बाहर ही रखें।
– अगर घर में कोई बाहरी शख्स आता है तो फासले से मिलें। मास्क चेहरे से न उतारें।
– अगर मुमकिन हो तो गुनगने पानी से नहा लें या कपड़े बदल लें और हाथ, पैर व चेहरे को अच्छी तरह साबुन से साफ कर लें।
– अगर एक मास्क को दोबारा इस्तेमाल करना है तो उसे साबुन या डिटर्जेंट से साफ करने के बाद धूप में सुखाएं और चौथे दिन इस्तेमाल करें। ऐसे में 4 मास्क का ऑप्शन रखें।
– गर्म पानी या गुनगुने पानी में हल्दी डालकर 1 बार गरारे करें।
– बाहर से आने के बाद 1 गिलास गुनगुना पानी पिएं।
– बाहर से आकर घर के बुजुर्ग और बच्चों से बिना नहाए या हाथ साफ किए न मिलें।
-रोज बाहर जाने वाले शख्स को अगर तबीयत जरा-सी भी बिगड़ी महसूस हो तो वह फौरन ही परिवार के सदस्यों से दूरी बना ले। चाहें तो मास्क भी लगा सकते हैं।

कोरोना वैक्सीन अपडेट
अमेरिका में: अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉडर्न (Moderna) के टीके के पहले फेज के ट्रायल में यह बात सामने आई कि इससे बुजुर्गों में मजबूत इम्यून सिस्टम पैदा हुआ। ‘न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक प्रायोगिक वैक्सीन mRNA-1273 को परीक्षण में शामिल व्यक्तियों ने अच्छी तरह से सहन किया। वैक्सीन का ट्रायल 30 हजार वॉलेंटियर्स पर किया जा रहा है।

रूस में: रूस में एक दूसरी वैक्सीन के मानव ट्रायल का चरण पूरा हो गया है। रूस ने साइबेरिया वेक्टर इंस्टिट्यूट द्वारा विकसित दूसरी कोरोना वैक्सीन का मानव ट्रायल पूरा कर लिया है। इंस्टिट्यूट ने इसी महीने के शुरू अपनी वैक्सीन के शुरुआती चरण के ट्रायल पूरी होने की जानकारी दी थी। बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ‘स्पूतनिक V’ के शुरू होने की घोषणा की थी और कहा था कि यह वैक्सीन उनकी बेटियों को लगाई गई है।

भारत में: भारत में भी कोरोना वैक्सीन पर युद्ध स्तर पर रिसर्च चल रही है और अगले साल के शुरू में इसके उपलब्ध होने की उम्मीद है। देश में 3 कंपनियां वैक्सीन दौड़ में शामिल है और इसके 2021 के पहली तिमाही में बाजार में आने की उम्मीद है। भारत ने कोरोना वैक्सीन के लिए एक वेबसाइट भी शुरू की है।
vaccine.icmr.org.in पर देश में वैक्सीन के विकास से जुड़ी सारी जानकारी मिल सकती है।
1. कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड और भारत बायोटेक का फेस 2 का ह्यूमन चल रहा है।
2. ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन को भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ब्रिटेन की एस्ट्रेजेनिका के साथ मिलकर तैयार कर रहा है।

ऐसे में कोरोना पास नहीं फटकेगा…
– इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए सही रुटीन, सही डाइट रखें। सिंथेटिक सप्लिमेंट से बेहतर विकल्प हैं मौसमी फल-सब्जियां, काढ़ा और धूप।
– आयुर्वेद का सुझाव है कि जब तक बुखार हो (आमतौर पर 7 दिनों तक), दूध और दूध से बनी चीजें न खाएं। इसके बाद ले सकते हैं।
– अगर ऑक्सिमीटर में ऑक्सिजन लेवल 90 या इससे कम हो जाए और यह 15 मिनट से आधे घंटे तक रहे तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
– 30 मिनट से ज्यादा वक्त के लिए बाहर जाएं, जहां भीड़ और अनजान लोग ज्यादा हों तो वापस आने पर गुनगुने पानी से नहा लें या हाथ, पैर व चेहरे को अच्छी तरह साबुन से धो लें और कपड़े बदल लें। इसके बाद गुनगुने पानी से गरारे कर लें।
– अगर घर में कोई बाहरी शख्स आए तो फासले से मिलें। मास्क पहन लें और 6 फुट की दूरी बनाए रखें।



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