कोरोना ही नहीं, ये भी हैं बड़ी समस्याएं… इस साल JEE-NEET है बड़ा चैलेंज

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हाइलाइट्स:

  • 13 सितंबर को 155 शहरों में 3,846 केंद्रों पर होगा NEET
  • 1 से 6 सितंबर तक 12 सत्रों में 234 शहरों के 615 केंद्रों पर होगा JEE
  • लोग लगातार उठा रहे हैं परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग
  • क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग और बॉलिवुड ऐक्टर सोनू सूद ने भी उठाई मांग

नई दिल्ली
बीते कई महीनों के अनिश्चितता भरे माहौल के बाद छात्रों के मन में एक बार फिर अपने करियर को नई दिशा देनी की उम्मीद जगी है। हालांकि जेईई और नीट के प्रतिभागी अभी भी दो चीजों के बारे में अनिश्चित हैं कि वे अपने परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंचेंगे और यह कितना सुरक्षित होगा। इन दोनों परीक्षाओं में नीट 13 सितंबर को 155 शहरों में 3,846 केंद्रों पर और जेईई 1 से 6 सितंबर तक 12 सत्रों में 234 शहरों के 615 केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा। परीक्षा को स्थगित करने की मांग लगातार लोग उठा रहे हैं। इसबीच क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग और बॉलिवुड ऐक्टर सोनू सूद ने भी यही मांग उठाई है।

इस बीच परीक्षार्थियों में चिंता का माहौल है। उत्तर प्रदेश के एक NEET-UG प्रतिभागी श्रीयांश जायसवाल ने कहा, ‘मैं इदरतगंज में रहता हूं और मेरा एग्जाम सेंटर वाराणसी में है, जो लगभग 130 किमी दूर है। जहां मैं रहता हूं वह कन्टेन्मेंट जोन है। मुझे वहां कैसे जाना चाहिए? क्या यह सुरक्षित होगा?’ ओडिशा की रहने वाली अनीशा ने कहा कि होटल और गेस्ट हाउस बंद होने की वजह से अकामडेशन एक बड़ी चिंता है। उन्होंने कहा, ‘मैं बालासोर से हूं और मेरा NEET सेंटर भुवनेश्वर में है। मुझे अपनी परीक्षा देने के लिए पांच घंटे की यात्रा करनी होगी। होटल और गेस्ट हाउस बंद हैं, ऐेसे में हम कहां रहेंगे?’

पब्लिक ट्रांसपोर्ट और होटल के बिना दिक्कत
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी भी एक बड़ी चिंता है। चेन्नै के बाहर रहने वाले बच्चों के माता-पिता ने तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया है कि परीक्षा के लिए ट्रैवल करने वालों के लिए होटल खोल दिए जाए। साथ ही वे ट्रांसपोर्ट प्लान भी चाहते हैं। चेन्नै के सियोन मैट्रिकुलेशन हायर सेकंडरी स्कूल के प्रिंसिपल एन विजयन ने कहा, ‘नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और राज्य परिवहन विभाग परीक्षा वाले दिन के लिए एक प्लान को लेकर बातचीत कर सकते हैं।’ मुंबई की रहने वाली एक अभिभावक सुधा शेनॉय ने सुझाव दिया कि राज्य सरकारों को एडमिट कार्ड वाले छात्रों को परीक्षा के दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने की इजाजत देनी चाहिए।

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कोरोना ही नहीं, बाढ़ भी है समस्या

इस परीक्षा के दौरान कोरोना वायरस ही एकमात्र चिंता नहीं है। भारी बारिश के बाद आई बाढ़ भी कुछ इलाकों में बड़ी परेशानी लेकर आई है। तेलंगाना में पिछले दो हफ्तों से लगातार बारिश से कई जिलों में रोड कनेक्टिविटी खराब हो गई है। यही हालत असम और बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया को बताया, ‘बंगाल में परीक्षा देने वाले कई छात्र बिहार और झारखंड से आते हैं।’

NTA का दावा- तैयारी पूरी
सुरक्षा के लिहाज से परीक्षा आयोजित करने वाली एनटीए की ओर से व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों के मुताबिक, इंट्रेंस पर फ्रेस मास्क, थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड-19 लक्षणों वाले लोगों के लिए अलग कमरे की व्यवस्था करनी होगी। टेस्टिंग एजेंसी ने कहा कि महामारी के मद्देनजर परीक्षा को ‘सेफ ऐंड सिक्योर’ तरीके से संचालित करने के लिए पूरी तैयारी है।


कैसे होगा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन
वहीं दूसरी ओर परीक्षा में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी इस बात को लेकर अभी भी चिंतित हैं कि इन गाइडलाइंस का पालन कितनी गंभीरता से किया जाएगा। जगह की कमी भी एक चिंता का विषय है। ओडिशा में सिर्फ सात शहरों में परीक्षा केंद्र हैं, जहां बड़ी गैदरिंग होती हैं। असम को भी अधिक परीक्षा केंद्रों को खोजने में काफी परेशानी हो रही है, ताकि यह सामाजिक दूरी बनाए रख सके।

राज्यों की खास तैयारी
नागपुर के एक स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा कि हम छात्रों के एग्जाम के बाद बाहर निकलने की भी रणनीति बना रहे हैं। इसके साथ ही उनके सामान को रखने के लिए भी खास तैयारी की जा रही है। केरल की भी एक विस्तृत योजना है। सभी आवेदकों को समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र से संपर्क करना होगा और सूचित करना होगा कि क्या वे कन्टेन्मेंट जोन, हॉटस्पॉट से आ रहे हैं या उन्होंने हाल ही में क्वारंटीन पीरियड खत्म किया है। माइल्ड सिम्टम्स वाले प्रतिभागियों को एक सिक रूम में बैठाया जाएगा। जिन लोगों ने क्वारंटीन पीरियड पूरा नहीं किया है, उन्हें दूसरे में बैठाया जाएगा। और बाकियों को एक अलग कमरे में। सीसीटीवी कैमरों से इनकी निगरानी करने के लिए भी कहा गया है।’ इसके अलावा हर परीक्षा केंद्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि केंद्र के बाहर कोई भीड़ न हो।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था परीक्षा कराने का आदेश
गौरतलब है कि 11 राज्यों के 11 छात्रों ने ये परीक्षाएं स्थगित करने के अनुरोध के साथ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court on NEET Exam) में याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत ने सभी का पक्ष सुनने के बाद 17 अगस्त को परीक्षा न कराने को लेकर दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी थी। जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा था कि कोरोना वायरस के कारण देश में सब-कुछ नहीं रोका जा सकता है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या देश में सब-कुछ रोक दिया जाए? और बच्चों के एक कीमती साल को यूं ही बर्बाद हो जाने दिया जाए?



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