कोर्ट ने कहा- रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक पर साबित नहीं होते ड्रग्स ट्रेड को फंडिंग करने के आरोप

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सुशांत सिंह राजपूत के केस में ड्रग्स के ऐंगल से जांच करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत के स्टाफ सैमुअल और दीपेश को गिरफ्तार किया था। लगभग एक महीने बाद रिया, सैमुअल और दीपेश को तो जमानत मिल गई थी लेकिन शौविक चक्रवर्ती की जमानत याचिका लगातार खारिज होती रही। फाइनली पिछले हफ्ते लगभग 3 महीने से ज्यादा समय तक जेल में रहने के बाद स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने शौविक को जमानत पर रिया कर दिया।

अपने आदेश में कोर्ट ने कहा है कि शौविक चक्रवर्ती के केस में गैरकानूनी ड्रग्स की ट्रैफिकिंग के कठोर आरोप लागू नहीं होते हैं। एनसीबी ने एनडीपीएस ऐक्ट की धारा 27ए के तहत शौविक पर आरोप लगाए हैं जिसमें अधिकतम 20 साल तक की कैद की सजा मिल सकती है। इसी धारा के आधार पर पहले शौविक की जमानत याचिका खारिज की गई थी। शौविक को 4 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। शौविक पर आरोप था कि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत के लिए गांजा खरीदा था।

स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट के जज जीबी गुराओ ने कहा, ‘अदालत को लगता है कि ऐसे कई आधार हैं जिनपर कहा जा सकता है कि आरोपी निर्दोष है। इस मामले में सेक्शन 27ए के तहत आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं।’ जज ने शौविक को बेल देने में 7 अक्टूबर को बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा रिया चक्रवर्ती को जमानत को भी आधार बनाया। इस आदेश में कहा गया था कि सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स खरीदने के लिए पैसा खर्च करने से रिया पर ड्रग्स ट्रैफिकिंग के आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि शौविक चक्रवर्ती के पास से किसी तरह की कोई ड्रग्स बरामद नहीं की गई है। शौविक को केवल एक अन्य आरोपी अनुज केशवानी के बयानों के आधार पर गिफ्तार किया गया था। कोर्ट ने शौविक को जमानत देते हुए 29 अक्टूबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी आधार बनाया जिसमें कहा गया था कि एनसीबी अधिकारियों के सामने दिए गए बयानों को गुनाह का कुबूलनामा नहीं माना जा सकता है।



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