क्‍वॉड की बैठक में चीन पर बरसे अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो, बताया दुनिया के लिए खतरा

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टोक्यो
जापान की राजधानी टोक्यों में आज हुई द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की दूसरी बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियों चीन पर जमकर बरसे। उन्होंने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और चीन को एशिया के लिए खतरा करार दिया। पोम्पियों ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान से सहमति जताते हुए कहा कि हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्‍त, खुले और समावेशी बनाए जाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।

चीन के खतरे से जूझ रही दुनिया
पोम्पियो ने आगे कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने जो धमकियां दी हैं, उनका हममे से उन लोगों ने विरोध किया है जो मानते हैं कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र इस क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों के लिए अच्छी चीजें हैं। उन्होंने कहा कि हमे विश्वास है कि हम चार देश यहां से महत्वपूर्ण व्यावहारिक परिणामों के साथ निकलेंगे जो एक अधिक समृद्ध दुनिया और एक अधिक समृद्ध क्षेत्र का नेतृत्व करेंगे। पूरी दुनिया इस समय चीन के खतरे से जूझ रही है और यही समय है कि जब हम उसके खिलाफ गंभीर होकर कोई हल निकालेंगे।

हॉन्ग कॉन्ग को लेकर चीन पर बरसे पोम्पियो
पोम्पियो ने हॉन्ग कॉन्ग को लेकर भी चीन पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने जिन प्रतिबद्धताओं को लेकर कसमें खाई थी उसको उन्होंने झटके से तोड़ दिया है। हॉन्ग कॉन्ग के अधिग्रहण के समय चीन ने कहा था कि वे एक देश दो सिस्टम से अगले 50 सालों तक के लिए अलग रखेंगे। लेकिन, उन्होंने अपनी प्रतिबद्धताओं को तोड़ते हुए लोगों की आजादी को छीन लिया है।

ताइवान पर अत्याचार कर रहा चीन
ताइवान को रोज-रोज दी जाने वाली धमकियों पर भी पोम्पियो ने गुस्से का इजहार किया। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि ताइवान में क्या हो रहा है। यह चीन बनाम संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में नहीं है। यह स्वतंत्रता बनाम अत्याचार के बारे में है। उन्होंने पूछा कि क्या दुनिया उन लोगों द्वारा शासित होगी जो जबरदस्ती शक्ति का उपयोग करते हैं, वे अपनी सेना को दूसरे देशों को धमकाने के लिए उपयोग करते हैं, या हम एक ऐसी प्रणाली में काम करेंगे जो नियम-आधारित हो और समझता हो कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए कोई जगह है? यही चुनौती है।

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क्या है क्‍वॉड जानिए
द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।

चीन कर रहा है विरोध
इस समूह के गठन के बाद से ही चीन चिढ़ा हुआ है और लगातार इसका विरोध कर रहा है। लद्दाख में चल रहे सैन्‍य तनाव के बीच चीन का सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स भारत को लगातार धमकी दे रहा है। साथ ही नसीहत दे रहा है कि भारत क्‍वॉड से दूर रहे और गुटन‍िरपेक्षता की अपनी नीति का पालन करे।



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