गुजरात के कोविड अस्पताल में लगी आग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट मांगी

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फायर सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट तीन दिनों में पेश किया जाए। साथ ही कहा है कि गुजरात सरकार 11 दिसंबर तक राजकोट में लगी आग के बारे में चल रही जांच की रिपोर्ट पेश करे। गुजरात के राजकोट के कोविड अस्पताल में आग लगने से हुई पांच मरीजों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों संज्ञान लिया था । अदालत ने कहा था कि हम संज्ञान लेते हैं और राज्य सरकार से कहा जाता है कि वह एक दिसंबर तक मामले में रिपोर्ट पेश करे।

अदालत ने कहा था कि ये गंभीर मसला है और पहली घटना नहीं है। अदालत ने ये भी कहा था कि आपके कितने ऑफिसर हैं जो स्थिति को देख रहे हैं। आपके पास फायर सेफ्टी उपाय नहीं है। इस तरह की आग की घटनाएं राज्य दर राज्य हो रही है और अस्पताल दर अस्पताल घट रही है। राज्यों द्वारा उचित कदम नहीं उठाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए और कहा कि राज्यों का फायर सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट तैयार हो रहा है। 4 दिसंबर तक उन्हें रिपोर्ट देना था लेकिन कई राज्यों की रिपोर्ट नहीं आई है जिस कारण हम उसे अभी समग्र तौर पर तैयार नहीं कर पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा कि जिन राज्यों की रिपोर्ट आ गई है उन रिपोर्ट्स को पेश किया जाए और उसके लिए हम आपको समय देंगे। गुजरात में आग लगने से कोविड मरीज की मौत के मामले में एक मृतक की पत्नी की ओर से वकील अपर्णा भट्ट पेश हुईं। अदालत में जब वह पेश हुईं तो कोर्ट ने कहा कि हमने तमाम कोविड अस्पतालों में आग की घटना पर संज्ञान लिया है सिर्फ राजकोट वाले मामले में नहीं।

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोविड अस्पतालों में आग लगने की घटना की ज़ांच के लिए जांच कमिटी बनाई गई है। इसमें जितना कुछ किया जा सकता है किया जा रहा है। हम कुछ भी छुपा नहीं रहे हैं। तब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि कमिटी ने 3-4 महीने में क्या जांच की है।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राजकोट की घटना की जांच के लिए जस्टिस बीएम मेहता की कमिटी बनाई गई है जो सेफ्टी मामले को देख रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि तीन दिनों के भीतर राज्यों के फायर सेफ्टी ऑडिट का डाटा पेश किया जाए। साथ ही अहमदाबाद की आग लगने की घटना की जांच भी राजकोट अग्निकांड की जांच कर रही कमिटी को दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 3 दिसंबर के आदेश के मामले में हम शुक्रवार को सुनवाई करेंगे। 3 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक कोविड 19 का वेक्सीन नहीं आ जाता है तब तक तमाम गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग सहित अन्य तमाम गाइडलाइंस का पालन तब तक जरूरी है जब तक वैक्सीन नहीं आ जाता।



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