‘चीनी सैनिकों को कैप्‍टन अमेरिका बनाने में जुटा ड्रैगन, बना रहा सुपर सोल्‍जर’

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लद्दाख से लेकर ताइवान तक पड़ोसियों की जमीन पर कब्‍जे की फिराक में लगा चीन अब कथित रूप से इस मिशन को पूरा करने के लिए अपने सैनिकों को ‘कैप्‍टन अमेरिका’ जैसा ताकतवर बनाने में जुट गया है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएलए सैनिकों को सुपर सोल्‍जर बनाने के लिए चीन ने इंसानी परीक्षण शुरू कर दिया है। चीन को उम्‍मीद है कि इन परीक्षणों के जरिए जैविक रूप से ज्‍यादा ताकतवर सैनिकों को बनाया जा सकता है जो जंग के मैदान में आम सैनिकों पर भारी पड़ेंगे। डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन में मई तक राष्‍ट्रीय खुफिया निदेशक रहे जॉन रैटक्लिफ ने यह चेतावनी दी है। आइए जानते हैं, क्‍या है पूरा मामला….

​’अमेरिका के लिए आज सबसे बड़ा खतरा बना चीन’

वॉल स्‍ट्रीट जनरल में लिखे अपने लेख में रैटक्लिफ ने चेताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका और शेष मुक्त विश्व के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है। रेटक्लिफ ने लिखा, ‘खुफिया विभाग स्पष्ट है कि पेइचिंग का इरादा अमेरिका और बाकी दुनिया पर आर्थिक, सैन्य और तकनीक के लिहाज से दबदबा बनाने का है।’ उन्होंने कहा कि चीन के कई बड़े पहल और कई बड़ी कंपनियां सिर्फ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियों का छद्म रूप है और वह इस तरह के बर्ताव को जासूसी और डकैती करार देते हैं। रेटक्लिफ ने कहा कि चीन ने अमेरिका की कंपनियों की बौद्धिक संपदाएं चुराई हैं, उनके तकनीक की प्रतिकृतियां तैयार कीं और फिर वैश्विक बाजार में अमेरिकी कंपनियों की जगह ले ली।

​’चीन बना रहा सुपर सोल्‍जर, कर रहा परीक्षण’

रैटक्लिफ ने कहा, ‘चीन ने इस आस में पीपल्‍स ल‍िबरेशन आर्मी के सैनिकों पर कई इंसानी परीक्षण किए हैं कि उन्‍हें जैविक रूप से ज्‍यादा ताकतवर सैनिक बनाया जा सकेगा। शक्ति की भूख को पूरा करने के ल‍िए चीन की कोई नैतिक सीमा नहीं है।’ रैटक्लिफ के इस दावे पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने कोई प्रतिक्र‍िया नहीं दी है। अमेरिका के एनबीसी न्‍यूज के मुताबिक चीन के ये ‘सुपर सोल्‍जर’ हॉलीवुड फिल्‍म ‘कैप्‍टन अमेरिका’ और ‘यूनिवर्सल सोल्‍जर’ की तरह से होंगे। पिछले साल ही अमेरिका के दो विद्वानों ने एक शोधपत्र लिखा था जिसमें उन्‍होंने बॉयोटेक्‍नॉलजी के युद्धक्षेत्र में इस्‍तेमाल करने की चीनी मंशा का परीक्षण किया था। इसमें उन्‍होंने कहा था कि चीन जीन एडिटिंग तकनीक का इस्‍तेमाल करके इंसान (संभवत: सैनिक) की क्षमता को काफी बढ़ाने में काफी रुचि रखता है।

​जीन एडिंटिंग तकनीक पर चीन ने लगाया दांव

अमेरिकी विद्वानों ने कहा कि चीनी शोध में जीन एडिटिंग तकनीक CRISPR का इस्‍तेमाल कर रहा है। इस तकनीक का इस्‍तेमाल जेनेटिक बीमारियों के इलाज और पेड़ों में बदलाव के लिए किया जाता है। वहीं पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक का इस्‍तेमाल अनैतिक है जो स्‍वस्‍थ लोगों की क्षमता को बढ़ाने के लिए जीन्‍स में बदलाव करने का प्रयास करता है। अमेरिकी विद्वान और चीनी रक्षा मामलों की विशेषज्ञ एल्‍सा कानिया ने लिखा, ‘ CRISPR तकनीक का इस्‍तेमाल करके भविष्‍य के युद्ध में सैनिकों की क्षमता को बढ़ाने की संभावना वर्तमान समय में केवल कल्‍पना बनी रहेगी लेकिन ऐसे संकेत हैं कि चीनी सेना के शोधकर्ता इस संभावना को तलाशने में जुट गए हैं।’

​’इंसानों के जीन्‍स में बदलाव के विनाशकारी प्रभाव’

एल्‍सा ने कहा कि चीनी सेना के वैज्ञानिक और रणनीतिकार लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बॉयो तकनीक भविष्‍य में सैन्‍य मामलों में नई रणनीतिक क्रांति लाएगी। उन्‍होंने चीन के एक प्रमुख जनरल के वर्ष 2017 में दिए बयान के हवाले से कहा कि आधुनिक बॉयो तकनीक और उसका सूचना, नैनो तकनीक आदि से एकीकरण करने का हथियारों, उपकरणों, लड़ाई के क्षेत्र और तरीकों तथा सैन्‍य सिद्धांतों पर क्रांतिकारी प्रभाव आएगा। वहीं कुछ अन्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि उन्‍हें युद्ध क्षेत्र में इसके इस्‍तेमाल से कहीं ज्‍यादा चिंता इंसान के जीन्‍स में बदलाव के दुष्‍प्रभाव को लेकर है। इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। उधर, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने रैटक्लिफ के इस आलेख को खारिज कर दिया है। चीनी प्रवक्‍ता ने कहा कि यह चीन की छवि और चीन-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचाने की उम्मीद में ‘गलत सूचना, राजनीतिक विषाणु और झूठ’ फैलाने के लिए एक और कदम है।



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