चीन के खिलाफ ‘Quad’ की दूसरी बैठक कल, एशिया में ड्रैगन की दादागिरी पर लगेगी रोक

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टोक्यो
चीन से बढ़ते खतरों से निपटने के लिए द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की दूसरी बैठक कल यानी मंगलवार को जापान की राजधानी टोक्यो में शुरू होगी। इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे। इस संगठन की पहली बैठक साल 2019 में न्यूयॉर्क में हुई थी। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा पर औपचारिक रूप से इस संगठन को मजबूत बनाने को लेकर सभी देशों में सहमति बन सकती है।

ऑस्ट्रेलिया के कारण क्‍वॉड के गठन में हुई थी देरी
इस संगठन को पहली बार साल 2007 में स्थापित करने का ऐलान किया गया था, लेकिन 2008 में आई भीषण आर्थिक मंदी के कारण ऐसा हो न सका। उस समय ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रूड थे जो चीन के करीबी माने जाते थे। उनके कार्यकाल के दौरान ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच संबंध बेहद मजबूत हुए थे। रूड खुद चीनी भाषा मंडारिन भी बहुत अच्छी तरह बोलते थे। ऐसे में उन्होंने इस गुट में शामिल होने से खुद को अलग कर लिया था।

ऑस्ट्रेलिया और चीन बने जानी दुश्मन
इस समय ऑस्ट्रेलिया में स्कॉट मॉरिसन सत्ता में हैं। उनके कार्यकाल के दौरान कोरोना वायरस को लेकर चीन के साथ संबंध लगातार बिगड़ते चले गए। पहली बार जब अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में चीन से कोरोना वायरस को लेकर जवाब तलब किया था। उस समय ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका का खुलकर साथ दिया था। इसी बात को लेकर दोनों देशों के बीच आपसी संबंध लगातार बिगड़ते गए। आज हालात यह है कि चीन के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है। वहीं, चीन ने अपने नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया की यात्रा न करने की सलाह जारी की है।

क्‍वॉड के गठन के लिए इसलिए सबसे अच्छा वक्त
इस समय चीन का दुनियाभर के देशों से विवाद चल रहा है। कोरोना वायरस महामारी को चीन की आक्रामक विस्तारवादी नीतियों से एशिया में भारत और जापान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ये दोनों देश इस महाद्वीप की सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्ति हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका का भी चीन से कई मुद्दों को लेकर तनाव चल रहा है। ताइवान, हॉन्ग कॉन्ग, दूतावास, तिब्बत समेत कई ऐसे मुद्दे हैं जिसे लेकर अमेरिका और चीन आमने सामने हैं। इसीलिए चीन के खिलाफ ये शक्तियां एकजुट होती दिखाई दे रही हैं।

कभी क्‍वॉड की सबसे कमजोर कड़ी था भारत
क्‍वॉड की दूसरी सबसे कमजोर कड़ी भारत को माना जाता था। इसकी वजह दोनों देशों के बीच होने वाला आर्थिक व्यापार था। 2014 में जब भारत में सत्ता परिवर्तन हुआ उसके बाद से राष्ट्रवाद की भावना भी तेजी से बढ़ी। 1962 के बाद से ही भारत में चीन को शक की निगाह से देखा जाता रहा है। हाल में जब चीन ने लद्दाख के क्षेत्र में घुसपैठ की और गलवान की घटना को अंजाम दिया तब भारत का ड्रैगन से पूरा मोहभंग हो गया। इसी कारण भारत और अमेरिका भी तेजी से करीब आए।

द्वीपों को लेकर जापान से भिड़ा चीन
चीन और जापान में पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर आपस में विवाद है। दोनों देश इन निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हैं। जिन्हें जापान में सेनकाकु और चीन में डियाओस के नाम से जाना जाता है। इन द्वीपों का प्रशासन 1972 से जापान के हाथों में है। वहीं, चीन का दावा है कि ये द्वीप उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं और जापान को अपना दावा छोड़ देना चाहिए। इतना ही नहीं चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तो इसपर कब्जे के लिए सैन्य कार्रवाई तक की धमकी दे चुकी है।

क्या है क्‍वॉड जानिए
द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।

चीन कर रहा है विरोध
इस समूह के गठन के बाद से ही चीन चिढ़ा हुआ है और लगातार इसका विरोध कर रहा है। लद्दाख में चल रहे सैन्‍य तनाव के बीच चीन का सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स भारत को लगातार धमकी दे रहा है। साथ ही नसीहत दे रहा है कि भारत क्‍वॉड से दूर रहे और गुटन‍िरपेक्षता की अपनी नीति का पालन करे।



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