चीन को बड़ा झटका, फिलीपीन्‍स और अमेरिका के बीच जारी रहेगा अहम सैन्‍य समझौता

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हाइलाइट्स

  • दक्षिण चीन सागर में दादागिरी दिखा रहे चीनी ड्रैगन को फ‍िलीपीन्‍स ने बड़ा झटका दिया है
  • फिलीपीन्‍स के राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैनिकों के साथ अभ्‍यास के समझौते को बहाल कर दिया है
  • राष्‍ट्रपति दुतेर्ते ने इस समझौते को रद कर दिया था जिससे दोनों देशों में चिंता बढ़ गई थी

मनीला
दक्षिण चीन सागर में दादागिरी दिखा रहे चीनी ड्रैगन को फ‍िलीपीन्‍स ने बड़ा झटका दिया है। फिलीपीन्‍स के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने अमेरिकी सैनिकों के साथ व्‍यापक सैन्‍य अभ्‍यास के समझौते को फिर से बहाल कर दिया है। दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने शुक्रवार को इस फैसले का ऐलान किया। इससे पहले राष्‍ट्रपति दुतेर्ते ने इस समझौते को रद कर दिया था जिससे दोनों देशों में चिंता बढ़ गई थी। यही नहीं चीन ने कोरोना वैक्‍सीन समेत कई तरह के लालच फिलीपीन्‍स को दिए थे ताकि वह अमेरिकी सेना के साथ समझौते को रद कर दे।

इस समझौते के तहत अमेरिकी और फिलीपीन्‍स के सुरक्षा बलों के बीच बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किए जाते हैं। रक्षा मंत्री डेल्फिन लोरेनजाना ने अपने अमेरिकी समकक्ष लॉयड ऑस्टिन के साथ मनीला में राष्‍ट्रपति दुतेर्ते के इस फैसले की घोषणा की। फिलीपीन्‍स के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि विदेश मंत्री टियोडोरो लोसिन जूनियर ‘विज़िटिंग फोर्स एग्रीमेंट’ (वीएफए) से जुड़े दुतेर्ते के फैसले के दस्तावेज शुक्रवार को एक अन्य बैठक में ऑस्टिन को देंगे।

दुतेर्ते लगातार टाल रहे थे समझौता
लोरेनजाना ने कहा, ‘राष्ट्रपति ने वीएफए को समाप्त करने के पूर्व के फैसले को रद्द करने का निर्णय किया है। ’ ऑस्टिन ने दुतेर्ते के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पुराने सहयोगियों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। दुतेर्ते ने फरवरी 2020 में अमेरिकी सरकार को सूचित किया था कि वह 1998 के समझौते को निरस्त करना चाहते हैं, जो फिलीपीन सैनिकों के साथ संयुक्त युद्ध अभ्यास के लिए बड़ी संख्या में अमेरिकी बलों को देश में प्रवेश की अनुमति देता है और उनके अस्थायी प्रवास के लिए कानूनी शर्तें निर्धारित करता है।

इस फैसले को घोषणा के 180 दिन बाद अमल में आना था, लेकिन दुतेर्ते लगातार इसे टाल रहे थे। इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को चीन के संदर्भ में संतुलन स्थापित करने के रूप में देखा जाता है, जो दक्षिण चीन सागर के विशाल क्षेत्रों पर अपना दावा करता है। माना जा रहा है कि चीन की साउथ चाइना सी में दादागिरी के बाद अब उन्‍हें मजबूरन फिर से अमेरिका की शरण में जाना पड़ा है।



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