चीन ने गुआम हमले वाले प्रोपेगेंडा वीडियो में भी किया फर्जीवाड़ा, इन हॉलीवुड फिल्मों से चुराया सीन

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पेइचिंग
चीन ने प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिकी नेवल बेस गुआम पर हमले का एक प्रोपेगेंडा वीडियो जारी किया है। 2 मिनट 15 सेकेंड के इस वीडियो में भी चीन फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आया। चीनी सेना की प्रचार विंग हॉलीवुड की फिल्मों से प्रभावित जान पड़ती है। पहले की तरह इस बार भी चीनी सेना की फर्जीवाड़ा करने वाली टीम ने 2008 में आई हॉलीवुड की ऑस्कर विजेता फिल्म द हर्ट लॉकर, ट्रांसफॉर्मर्स: रिवेंज ऑफ द फॉलेन और 1996 की एक्शन-थ्रिलर द रॉक से कई सीन्स को चुराए हैं।

अमेरिकी बेस पर हमले का जारी किया नकली वीडियो
प्रशांत महासागर में स्थिति अमेरिकी नौसैनिक बेस गुआम पर हमले का नकली वीडियो को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स के वीबो अकाउंट पर शनिवार को अपलोड किया गया था। यह वीडियो किसी हॉलीवुड फिल्म की ट्रेलर की तरह दिखाई दे रहा है। जिसमें चीन का एच-6 बॉम्बर रेगिस्तान में स्थित किसी एयरफोर्स बेस से उड़ान भरता दिखाई दे रहा है।

पहले भी ऐसे फर्जीवाड़े कर चुका है चीन
युद्धाभ्यास के प्रोपेगेंडा वीडियो में चीन पहले भी कई बार ऐसे फर्जीवाड़े कर चुका है। कुछ दिनों पहले चीनी मीडिया ने हॉलीवुड फिल्म टॉपगन के एक सीक्वेंस को अपनी एयरफोर्स के बढ़ती ताकत के रूप में दिखाया था। बाद में बेइज्जती होने के बाद चीन की सरकारी मीडिया ने इस क्लिप को ही हटा दिया था। बड़ी बात यह है कि हॉलीवुड के क्लिप का उपयोग करने के लिए चीन कोई भी रॉयल्टी नहीं देता है।

हॉलीवुड फिल्मों के शौकीन हैं चीनी सेना के प्रोपेगेंडा एक्सपर्ट
साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेना का प्रचार विभाग अक्सर अपने फर्जी वीडियो के प्रॉडक्शन को शानदार बनाने के लिए हॉलीवुड के फिल्मों से चोरी करता है। चीनी सेना के लिए ऐसा करना आम बात है। इस विभाग में काम करने वाले चीनी सेना के लगभग सभी अधिकारी हॉलीवुड की फिल्में देखते हुए बड़े हुए हैं। उनके दिमाग में अमेरिकी युद्ध की फिल्मों की छवि सबसे अच्छी है।

चीन ने US नेवल बेस गुआम पर हमले का जारी किया नकली वीडियो, H-6 बॉम्बर से किया अटैक

चोरी पकड़े जाने पर चीन की सीनाजोरी
चोरी पकड़े जाने पर चीनी सेना से जुड़े सूत्र कहते हैं कि ऐसे काम करने से बौद्धिक संपदा की चोरी का दावा नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, वीडियो में हॉलीवुड की फिल्मों से केवल कुछ सेकंड के फुटेज का उपयोग किया जाता है। पीएलए की ये वीडियोज व्यावसायिक रिलीज के लिए भी नहीं होती हैं।

रॉयल्टी का भुगतान नहीं करता चीन
बता दें कि चीनी सेना के प्रचार विभाग पर पहले भी सेना के विडियो को लेकर ऐसे आरोप लगते रहे हैं। वीडियो के दौरान यह प्रोपेगेंडा डिवीजन कभी नहीं बताता है कि यह फुटेज वास्तविक है या किसी फिल्म से लिया गया है। वह किसी भी क्लिप का प्रयोग करने के लिए कभी भी संबंधित कंपनी को रॉयल्टी का भुगतान भी नहीं करता।

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