चीन पर नजर, जापान के नए प्रधानमंत्री ने शिंजो आबे की हिंद-प्रशांत नीतियों का किया समर्थन

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इंद्राणी बागची, तोक्‍यो/नई दिल्‍ली
जापान के नए प्रधानमंत्री योशिदे सुगा ने अपने पूर्ववर्ती पीएम शिंजो की राह पर चलने का संकेत देते हुए कहा है कि हिंद-प्रशांत नीति को उनका पूरा समर्थन है। जापान से बाहर अपने पहले भाषण में सुगा ने वियतनाम में यूनिवर्सिटी के छात्रों से कहा कि जापान दक्षिण चीन सागर में किसी भी तनाव को भड़काने वाली कार्रवाई का समर्थन नहीं करता है।

सुगा ने कहा, ‘जापान समुद्र में कानून के संरक्षण का लगातार समर्थन करता रहा है।’ चीन ने पिछले कुछ महीने में वियतनाम पर दक्षिण चीन सागर में लगातार बहुत ज्‍यादा दबाव डाला है लेकिन सुगा की इस टिप्‍पणी में इशारों-इशारों में चीन के आक्रामक व्‍यवहार की कड़ी आलोचना छिपी हुई है। सुगा की टिप्‍पणी से संकेत मिलता है कि वह आबे की नीतियों में थोड़ा बदलाव भले करें लेकिन विदेश नीति के प्रमुख बिंदुओं पर दोनों के विचार एक जैसे ही रहेंगे।

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जापानी पीएम के इस बयान को भारत में भी बहुत ध्‍यान से देखा जा रहा है जिसका शिंजो आबे और उनकी सरकार के साथ बहुत गहरा संबंध था। सुगा ने ‘आसियान की केंद्रीय भूमिका’ का उल्‍लेख किया जो क्‍वॉड देशों के हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति की प्रमुख विशेषता है। सुगा 6 अक्‍टूबर को क्‍वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की अध्‍यक्षता भी करेंगे। सप्‍लाइ चेन को कई देशों में बनाए जाने पर जोर दिया गया है। इस पर भारत समेत कई देशों की नजर रहेगी कि सुगा क्‍या फैसला लेते हैं।


सप्‍लाइ चेन पर भारत, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया में समझौता
भारत, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया ने हाल ही में एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किया है ताकि इस तरह के एक सप्‍लाइ चेन को बनाया जा सके। सुगा ने कहा, ‘इस तरह के सहयोग में ईस्‍ट-वेस्‍ट इकनॉमिक कॉरिडोर और वियतनाम, लाओस, कंबोडिया, थाइलैंड और म्‍यांमार के रास्‍ते शामिल हैं।’ बता दें कि पूर्वी लद्दाख में चीन (China) के साथ चल रहे सैन्य टकराव के बीच भारत (India) ने सोमवार को औपचारिक रूप से अमेरिका और जापान के साथ त्रिपक्षीय मालाबार नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया को आमंत्रित किया है।

पिछले चार दशकों में बीजिंग और नई दिल्ली के बीच सीमा पर सबसे तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ऐसे में पहली बार क्षेत्रीय समूह के सभी सदस्य जिन्हें क्वाड के रूप में जाना जाता है, उनके साथ नौसैनिक अभ्यास के लिए ऑस्ट्रेलिया को इसमें शामिल करने का निर्णय लिया गया है। यह मालाबार नौसैनिक अभ्यास वर्ष के अंत में बंगाल की खाड़ी में भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की नौसेनाओं के साथ किया जाएगा। इसमें शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित किया गया है।



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