चीन से टक्‍कर, अमेरिका ने भारत के पास भेजे परमाणु मिसाइलों से लैस दो सबसे घातक हथियार

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हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दुस्‍साहस पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका ने कमर कस ली है। अमेरिका ने चीन नौसेना की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए हिंद महासागर में अपने दो सबसे घातक हथियार भेजे हैं। ये अ‍मेरिकी हथियार इतने विनाशक हैं कि किसी भी देश को पलक झपकते ही त‍बाह कर सकते हैं। इन अमेरिकी हथियारों का नाम है-ओहियो क्‍लास की क्रूज मिसाइल सबमरीन यूएसएस जॉर्जिया और एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्ड रीगन। ये दोनों ही इन दिनों हिंद महासागर में मौजूद हैं। आइए जानते हैं कि यूएसएस जॉर्जिया और यूएसएस रोनाल्ड रीगन क्‍यों पूरी दुनिया में तबाही का हथियार माने जाते हैं…

डियागो गार्सिया से गुजरी यूएसएस जॉर्जिया सबमरीन

अमेरिका की फोर्ब्‍स पत्रिका में रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एचआई सटन ने सैटलाइट तस्‍वीरों के आधार पर खुलासा किया कि अमेरिकी नौसेना की सबसे घातक पनडुब्बियों में से एक यूएसएस जार्जिया हिंद महासागर में स्थित यूएस नेवल बेस डियागो गार्सिया में 4 दिनों तक रही। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली यह सबमरीन 25 सितंबर को डियागोगार्सिया पहुंची थी। माना जा रहा है कि यहां पर सबमरीन के चालक दल को बदला गया। ओहियो श्रेणी की यह सबमरीन अमेरिका की सबसे विशाल पनडुब्‍बी मानी जाती है जिसके विस्‍थापन की क्षमता 17 हजार टन है। इस सबमरीन को वर्ष 1982 में लॉन्‍च किया गया था।

परमाणु मिसाइलों से लैस यह अमेरिकी पनडुब्‍बी

करीब 560 फुट लंबी यह परमाणु पनडुब्‍बी एटम बम को ले जाने में सक्षम कई मिसाइलों से लैस है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह किलर सबमरीन जमीन पर हमला करने में सक्षम 154 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस है। इस पनडुब्‍बी का ठिकाना अमेरिका के जॉर्जिया में स्थित सबमरीन बेस पर तैनात रहती हैं। यहीं से उन्‍हें दुनियाभर में भेजा जाता है। अमेरिका के डियागो गार्सिया नेवल बेस भारतीय उप-महाद्वीप के दक्षिण से लगभग 1,000 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है। रणनीतिक रूप से बेहद इस नेवल बेस में अमेरिका ने अपने सबसे घातक बमवर्षक B-2 स्प्रिट को भी तैनात कर रखा है।

हिंद महासागर में तेजी से बढ़ रहा चीन नेवी का खतरा

अमेरिका ने भारत से मात्र कुछ ही दूरी पर स्थित ड‍ियागोगार्सिया में अपनी सबसे घातक पनडुब्‍बी को भेजकर चीन को बड़ा संदेश दिया है। दरअसल, चीन ने लगातार अपने जिबूती स्थित नेवल पोर्ट और पाकिस्‍तान के ग्‍वादर पोर्ट से हिंद महासागर में अपनी स्थिति को मजबूत करना शुरू कर दिया है। ऐसे में अमेरिका ने अपनी परमाणु पनडुब्‍बी को डियागोगार्सिया भेजकर बड़ा संदेश दिया है। इसके अलावा भारत और चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव को भी इस पनडुब्‍बी की यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका डियागो गार्सिया नेवल बेस से पश्चिम एशिया से लेकर अफ्रीका, हिंद महासागर और यहां तक कि साउथ चाइना सी में कभी भी हमला कर सकता है।

अंडमान के पास पहुंचा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर

अमेरिकी ताकत का प्रतीक कहे जाने वाले उसके 20 एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर कैरियर्स में से तीन लगातार एशिया के अलग अलग इलाकों में गश्त लगा रहे हैं। इसी कड़ी में हिंद महासागर में चीन की घुसपैठ को रोकने के लिए अमेरिका का निमित्ज क्लास का एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्ड रीगन अंडमान के पास पहुंचा है। परमाणु शक्ति से चलने वाले इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर अमेरिका ने 90 घातक लड़ाकू विमान और 3000 से ज्यादा मरीन तैनात हैं। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस @detresfa_ ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि मलक्का जलडमरूमध्य के पास इस एयरक्राफ्ट कैरियर को कुछ समय पहले देखा गया है। माना जा रहा है कि यह हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी नेवल बेस डिएगो गार्सिया भी जाएगाा।

जानें, कितना शक्तिशाली है यूएसएस रोनाल्ड रीगन

अमेरिका के सुपरकैरियर्स में यूएसएस रोनाल्ड रीगन को बहुत ताकतवर माना जाता है। परमाणु शक्ति से चलने वाले इस एयरक्राफ्ट कैरियर को अमेरिकी नौसेना में 12 जुलाई 2003 को कमीशन किया गया था। जापान का योकोसुका नेवल बेस इस एयरक्राफ्ट कैरियर का होमबेस है। यह कैरियर स्टाइक ग्रुप 11 का अंग जो अकेले अपने दम पर कई देशों को बर्बाद करने की ताकत रखता है। 332 मीटर लंबे इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर 90 लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर्स के अलावा 3000 के आसपास नौसैनिक तैनात होते हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर यूएएस निमित्स अमेरिका के सातवें बेड़े में शामिल है। यह बेड़ा 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध (बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) के दौरान बंगाल की खाड़ी के नजदीक पहुंच गया था। इसका मकसद बांग्लादेश में (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) मात खा रहे पाकिस्तानी सेना का सहायता करना था। लेकिन उस समय भारत के साथ रूस मजबूती के साथ खड़ा हो गया। इससे अमेरिका का सातवां बेड़ा वापस लौट गया।

हिंद महासागर में चीन को घेरने से ये फायदा

भारत के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया हिंद महासागर में चीन को घेरने के लिए तैयार बैठे हैं। अगर अब ड्रैगन ने कोई भी हिमाकत की तो उसका अंजाम उसे भुगतना पड़ेगा। चीन के व्यापार का बड़ा हिस्सा हिंद महासागर के जरिए ही खाड़ी और अफ्रीकी देशों में जाता है। जबकि, चीन अपने ऊर्जा जरुरतों का बड़ा आयात इसी रास्ते करता है। अगर भारतीय नौसेना ने इस रूट को ब्लाक कर दिया तो चीन को तेल समेत कई चीजों के लिए किल्लत झेलनी होगी। अभी चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर भी पूरा नहीं हुआ है ऐसे में चीन इस रास्ते भी कोई आयात-निर्यात नहीं कर सकता।

डियागो गार्सिया से कई लड़ाई लड़ चुका है अमेरिका

डियागो गार्सिया द्वीप सुदूर, सुरक्षित और हिन्द महासागर के केंद्र में स्थित होने के कारण अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से यह द्वीप काफी महत्वपूर्ण है। इस द्वीप से भारत के दक्षिणी तट की लम्बाई 970 समुद्री मील, श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिम भाग से 925 समुद्री मील, हॉरमुज जलडमरूमध्य से 2,200 समुद्री मील दूर और मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने से 1600 समुद्री मील दूर है। इस द्वीप पर अमेरिका के 1700 सैन्यकर्मी और 1500 नागरिक कॉन्ट्रैक्टर्स है, इसमें 50 ब्रिटिश सैनिक शामिल है। इस द्वीप का उपयोग अमेरिकी नौसेना और वायु सेना दोनों ही संयुक्त रूप से करते हैं। 1991 के खाड़ी युद्ध में, 1998 के इराक युद्ध में और 2001 के दौरान अफगानिस्तान में कई हवाई अभियानों को डिएगो गार्सिया अड्डे से ही संचालित किया गया था। अब अमेरिका इस नेवल बेस की मदद से चीन की हिंद महासागर में बढ़ती गतिविधियों पर नजर रख रहा है।



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