चीन से तनाव के बीच आर्मी वाइस चीफ ने बताया, अभी कहां है आत्मनिर्भर बनने की जरूरत

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नई दिल्ली
ईस्टर्न लद्दाख (Ladakh) में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत-चीन तनाव (India China Border Tension) के बीच इंडियन आर्मी के वाइस चीफ ने हाई एल्टीट्यूट में जरूरी सामान के स्वदेशीकरण पर जोर दिया। उन्होंने हाई एल्टीट्यूट में जरूरी क्लोदिंग (कपड़े) और इक्विपमेंट में स्वदेशी विकल्प ना होने का भी जिक्र किया। आर्मी वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा कि स्पेशल क्लोदिंग और माउंटेनियरिंग इक्विपमेंट में आत्मनिर्भर होने की जरूरत है।

थल सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने शनिवार को कहा कि ड्रोन या मानव रहित विमान (UAV) अपनी विनाशक क्षमता के कारण अन्य चुनौतियों से कहीं अधिक गंभीर हैं। सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज के एक वेबिनार में लेफ्टिनेंट जनरल सैनी ने कहा, ‘उनकी (ड्रोन की) कम लागत, बहुउपयोगिता और उपलब्धता के मद्देनजर कोई शक नहीं है कि आने वाले सालों में खतरा कई गुना बढ़ेगा।’ उन्होंने कहा कि ड्रोन जैसे खतरों का तीसरा आयाम निकट भविष्य में अभूतपूर्व हो सकता है और सेना को इस बारे में अभी से योजना बनाने की जरूरत है। सैनी ने कहा, ‘ड्रोन रोधी समाधान के तहत ‘स्वॉर्म’ प्रौद्योगिकी समेत ‘हार्ड किल और सॉफ्ट किल’ दोनों तरह के उपाय वक्त की मांग हैं।’

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में हमारे सैनिक सुपर हाई एल्टीट्यूट एरिया में तैनात हैं जहां तापमान माइनस 50 तक भी पहुंच जाता है। हालांकि हम अभी भी कोल्ड वेदर क्लोदिंग वेदर इक्विपमेंट आयात कर रहे हैं क्योंकि सही स्वदेशी विकल्पों की कमी है। साथ मिलकर इसके लिए कोशिश करनी होगी ताकि हम आत्मनिर्भर बन सकें। गौरतलब है कि 20 हजार फीट की ऊंचाई पर सियाचिन ग्लेशियर में दशकों से आर्मी के जवान तैनात हैं। ईस्टर्न लद्दाख में भी तनाव के बीच आर्मी अब कई उन जगहों पर तैनात हैं जहां पहले तैनाती नहीं होती थी। यहां हाई एल्टीट्यूट में पहली बार पूरी सर्दियों भर तैनाती की तैयारी है क्योंकि फिलहाल भारत-चीन की बातचीत से गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। सर्दियों भर की तैनाती के लिए आर्मी ने बड़ी संख्या में स्पेशल क्लोदिंग की खरीद की है और सैनिकों के रहने का इंतजाम किया है।

.आर्मी वाइस चीफ ने कहा कि रक्षा संस्थानों, अहम संस्थानों की सिक्यॉरिटी, आईडी और ड्रोन के लिए भी स्वदेशी विकल्प तैयार करना प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि रक्षा संस्थानों की सिक्योरिटी के लिए स्वदेशी विकल्पों पर पिछले कुछ सालों से काम किया जा रहा है क्योंकि यह हाई प्रोफाइल टारगेट हो सकते हैं। आर्मी वाइस चीफ ने कहा कि स्वदेशी विकल्प तैयार करने की दिशा में इंडस्ट्री काम कर रही है लेकिन इनोवेशन और इंटीग्रेशन की कमी है।

उप सेनाप्रमुख ने कहा कि ‘आईईडी’ का खतरा अभी बरकरार रहने वाला है क्योंकि यह आतंकवादियों और राष्ट्र विरोधी तत्वों की पसंद बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आईईडी के खतरे से निपटने के लिए टेक्नॉलजी इनोवेशन अहम है। सैनी ने कहा, ‘रोबोटिक्स, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और बड़े आंकड़ों के विश्लेषण से संभावित जवाब मिल सकता है।’ देश में रक्षा ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा एक और प्रमुख क्षेत्र है जहां सेना पिछले कुछ सालों में ध्यान दे रही है क्योंकि ये आसान टारगेट हो सकते हैं। (भाषा के इनपुट्स के साथ)



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