टूरिस्‍टों को छूट लेकिन अपने घर नहीं लौट पा रहे हिमाचल के रहने वाले, बढ़ रही नाराजगी

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नई दिल्ली
दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले हिमाचली पिछले कई महीने से परेशानी में हैं। लॉकडाउन के बाद से ही हिमाचल प्रदेश के बॉर्डर सील हैं और लोगों को अपने घर जाने की इजाजत भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लाखों लोग पिछले कई महीनों से अपने घर नहीं जा पा रहे हैं, जहां उनके बुजुर्ग पैरंट्स रहते हैं।

मौजूदा नियमों के हिसाब से लोगों को हिमाचल जाने पर इंस्टिट्यूशनल क्वारंटीन किया जाता है और उसके बाद कोरोना टेस्ट निगेटिव आने पर ही घर जाने की इजाजत मिलती है। वहां भी उन्हें अगले कई दिन तक होम क्वारंटीन में रहना पड़ता है। इसे लेकर विरोध के स्वर भी उठना शुरू हो गए हैं।

दिल्‍ली-एनसीआर में करीब 10 लाख हिमाचली हैं
हिमाचली लोगों के संगठनों ने सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के हिसाब से इन कड़ी शर्तों को खत्म किया जाए और सोशल दूरी के बाकी नियमों के हिसाब से लोगों को आवाजाही की इजाजत दी जाए। ‘हिमाचल मित्र मंडल’ के किशोरी लाल शर्मा ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में तकरीबन 10 लाख हिमाचली रहते हैं और सरकारी और प्राइवेट नौकरी करते हैं। ज्यादातर लोगों के बुजुर्ग पैरंट्स और रिश्तेदार हिमाचल में ही रहते हैं। ऐसे में लोग कुछ दिनों की छुट्टी लेकर उनकी देखभाल और बाकी कामों के लिए अपने घर आते-जाते रहते हैं।

कई बार दे चुके ज्ञापन, अब विरोध प्रदर्शन का रास्‍ता बचा
लेकिन गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के बावजूद हिमाचल सरकार ने रास्ते नहीं खोले हैं। इससे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि इस बारे में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसदों को ज्ञापन दिया जा चुका है। लोगों की परेशानी बढ़ रही है और कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। उनका कहना है कि अगर उन्हें आवाजाही की इजाजत नहीं दी जाती है तो वे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

पर्यटकों को घूमने की आजादी, अपनों को नहीं
हिमाचल के लोगों के लिए ही प्रदेश के बॉर्डर सील होने को लेकर नाराजगी इसलिए भी है, क्योंकि सरकार ने कुछ शर्तों के साथ पर्यटकों के लिए रास्ते खोल दिए हैं। ऐसे में इन शर्तों के हिसाब से अगर कोई पर्यटक हिमाचल पहुंचता है तो उसे घूमने की आजादी है। हालांकि हिमाचल के ही लोगों को क्वारंटीन में रहना जरूरी है।

हिमाचल फेडरेशन ऑफ सोशल बॉडीज के अध्यक्ष आर. के. शर्मा कहते हैं कि यह बड़ी दुविधा की स्थिति है। कई लोग तो ऐसे हैं जो अपनी रिश्तेदारी में किसी की मृत्यु होने पर भी घर नहीं जा सके। रास्ते बंद होने की वजह से लोगों के कई जरूरी काम भी छूट गए। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के हिसाब से बाकी राज्य सरकारों की तरह हिमाचल के लोगों को भी हिमाचल आने-जाने के लिए छूट दी जानी चाहिए।

सरकार को दिए सुझाव, नियम पालन का भरोसा
दिल्ली में रहने वाले हिमाचली लोगों का कहना है कि वे अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, लेकिन हिमाचल की अर्थव्यवस्था में अपना गहरा योगदान दे रहे हैं। सरकार चाहे तो रजिस्ट्रेशन की व्‍यवस्‍था लागू कर सकती है ताकि लोगों को ट्रैक करना आसान हो। मास्क, सैनिटाइजर और सोशल दूरी को जरूरी बनाकर आवाजाही शुरू की जा सकती है।

इनका तर्क है कि, राजधानी दिल्ली में भी इन्हीं सभी नियमों के तहत अनलॉक किया गया है और यहां पर कोरोना की स्थिति में पहले के मुकाबले सुधार भी हुआ है। इसी तरह हिमाचल में भी हिमाचल के लोगों को आने दिया जाना चाहिए ताकि उनकी परेशानियां दूर हों। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द से जल्द उनकी बात सुनेगी और जरूरी कदम उठाएगी।



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