डोनाल्ड ट्रंप के स्वास्थ्य को लेकर क्यों परेशान है तालिबान? राष्ट्रपति चुनाव में कर रहा जीत की दुआ

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वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वास्थ्य को लेकर तालिबान ने चिंता जताई है। इस वैश्विक आतंकवादी संगठन ने यह भी आशा जताई है कि अमेरिका में होने वाले आगामी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप अपने प्रतिद्वंदी जो बाइडेन को आसानी से हरा देंगे। ट्रंप इस समय कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहे हैं। हालांकि, अस्पताल से उनको छुट्टी मिल गई है और वे अभी वाइट हाउस में क्वारंटीन हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर तालिबान क्यों डोनाल्ड ट्रंप के स्वास्थ्य और उनकी जीत की दुआ कर रहा है?

तालिबान ने जताई ट्रंप के जल्द ठीक होने की उम्मीद
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वह चुनाव जीतेंगे और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदगी को खत्म कर देंगे। एक दूसरे तालिबान नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ट्रंप के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की खबर सुनकर तालिबान के बड़े नेता चिंतित हो उठे थे। हालांकि, अब वे बेहतर हो रहे हैं।

अफगानिस्तान-तालिबान शांति वार्ता में अहम कड़ी हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के कारण ही अफगानिस्तान सरकार तालिबान के साथ शांति वार्ता को तैयार हुई थी। यह बातचीत इस समय कतर की राजधानी दोहा में जारी है। ट्रंप शुरुआत से ही इस समझौते के पक्षधर रहे हैं। इसी कारण उनके प्रशासन के कई बड़े नेता भी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि अफगानिस्तान में उसका प्रभाव तालिबान और सरकार दोनों के ऊपर बराबरी का रहे क्योंकि पिछले 19 सालों के युद्ध में भी अमेरिका को कुछ हासिल नहीं हुआ है।

अफगानिस्तान से फौज की वापसी का ऐलान कर चुके हैं ट्रंप
9/11 हमलों के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने तालिबान को निशाना बनाते हुए अफगानिस्तान में हमले की इजाजत दी थी। तब से आज तक अमेरिकी फौज अफगानिस्तान में मौजूद है और तालिबान के खिलाफ वहां की सरकार को सहायता प्रदान कर रही है। कुछ दिनों पहले ही ट्रंप ने ऐलान किया था कि क्रिसमस तक वे अफगानिस्तान ने अमेरिकी फौज की पूर्ण वापसी करा लेंगे। ऐसे में तालिबान को उम्मीद है कि अमेरिकी सेना के जाते ही देश पर उनकी स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

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क्या कहा था ट्रंप ने
ट्रंप ने फाक्स न्यूज के साथ बातचीत में कहा था कि अफगानिस्तान में 19 साल पर्याप्त हैं। हम चाहते हैं कि अफगानिस्तान में अब भी मौजूद गिने चुने साहसी महिलाएं एवं पुरूष सैनिक क्रिसमस तक घर लौट आएं। अमेरिकी सेना वहां पुलिसकर्मियों के रूप में काम कर ही है। वे सेना की तरह काम नहीं कर रहे हैं। हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। मैंने आईएसआईएस के खिलाफत का 100 प्रतिशत सफाया कर दिया। मैंने कुर्द्स फोर्स कमांडर कासिम सोलेमानी को मार डाला। मैंने आईएसआईएस नेता अबू बक्र अल-बगदादी को मार डाला।

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अफगानिस्तान में इतने अमेरिकी सैनिक मौजूद
29 फरवरी को तालिबान के साथ हुए एक समझौते के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या घटा दी है और अब वहां उसके महज 8,600 सैनिक तैनात हैं। उसने पांच सैन्य ठिकाने अपने अफगान साझेदारों को सौंप दिए हैं। अमेरिकी चुनाव में अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी भी एक बड़ा मुद्दा है।

कैसे हुआ तालिबान का जन्म
तालिबान का जन्म 90 के दशक में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ। इस समय अफगानिस्तान से तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) की सेना हारकर अपने देश वापस जा रही थी। पश्तूनों के नेतृत्व में उभरा तालिबान अफगानिस्तान में 1994 में पहली बार सामने आया। माना जाता है कि तालिबान सबसे पहले धार्मिक आयोजनों या मदरसों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जिसमें इस्तेमाल होने वाला ज़्यादातर पैसा सऊदी अरब से आता था। 80 के दशक के अंत में सोवियत संघ के अफगानिस्तान से जाने के बाद वहां कई गुटों में आपसी संघर्ष शुरु हो गया था जिसके बाद तालिबान का जन्म हुआ।

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