तस्वीरों में देखें ब्रिटेन में कैसे लग रही Pfizer की Coronavirus Vaccine, भारत में भी ऐसे ही चलेगा टीकाकरण

Spread the love


ब्रिटेन में Pfizer की कोरोना वायरस वैक्सीन लगाने के लिए कैंपेन शुरू हो चुका है। देश में अब तक के सबसे बड़े वैक्सिनेशन कैंपेन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। Pfizer को ब्रिटेन में इमर्जेंसी के इस्तेमाल के लिए इजाजत मिल गई थी जबकि भारत में भी कंपनी ने इजाजत मांगी है। Pfizer की वैक्सीन जितनी असरदार है, इसके स्टोरेज को लेकर उतनी ही आशंकाएं रही हैं। हालांकि, घातक वायरस से लोगों को बचाने के लिए वैक्सीन लगाए जाने की तस्वीरें दुनियाभर में उम्मीद भी जगा रही है। 98 साल की उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जा रही है और वे बाकी आबादी से इस पर भरोसा रखने की अपील भी कर रहे हैं।

90 साल की मैगी के नाम इतिहास

जब 90 वर्षीय कीनन वैक्सीन लगवाकर लौटीं, तो अस्पताल के स्टाफ ने तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया। वह वैक्सीन पाने वाली देश की पहली शख्स बन गईं। नीले रंग की ‘मेरी क्रिसमस’ टीशर्ट पहनकर पहुंचीं मैगी मास्क के नीचे से मुस्करा रही थीं। उन्होंने लोगों से कहा कि अगर वह 90 साल की उम्र में वैक्सीन ले सकती हैं, तो कोई भी ले सकता है। उन्होंने सबसे पहले वैक्सीन पाने पर खुद को भाग्यशाली बताया है।

21 दिन बाद दूसरी खुराक

21-

वैक्सीन की खुराक इंजेक्शन के जरिए बांह के ऊपरी हिस्से में दी जाएगी। इसके 21 दिन बाद दूसरा शॉट दिया जाएगा। थोड़ी इम्यूनिटी पहली खुराक के 12 दिन बाद और पूरी तरह से दूसरी खुराक के 7 दिन बाद मिल सकेगी। ब्रिटेन में लोग वैक्सीन के लिए ‘Call’ और ‘Recall’ का अपॉइंटमेंट ले रहे हैं। Call के जरिए पहली खुराक और फिर Recall से दूसरी खुराक लेने वे पहुंचेंगे।

विलियम शेक्सपियर को भी लगा टीका

वैक्सीन पाने वाले दूसरे शख्स का नाम था विलियम शेक्सपियर है। सोशल मीडिया पर जब लोगों को यह पता लगा तो वे साहित्य के इतिहास की सबसे महान और चर्चित हस्तियों में से एक नाटककार विलियम शेक्सपियर को याद करने लगे। यहां तक कि ‘हैमलेट’ में लिखे उनके डायलॉग ‘To be or not to be’ को लोग वैक्सीन के लिए ‘To V or not to V’ लिखने लगे।

बुजुर्गों पर भी असरदार

अभी तक के अनैलेसिस में पता चला है कि वैक्सीन से 95% लोगों को कोविड-19 से बचाया जा सका है। वहीं बुजुर्गों में इसका असर 94% लोगों पर रहा है। इससे मिलने वाली इम्यूनिटी कम से कम 6 महीने या उससे ज्यादा भी रह सकती है। ब्रिटेन में सबसे पहले बुजुर्गों को वैक्सीन दी जा रही है और अब तक इसे लेने वाले लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा रखने की अपील की है।

वैक्सीन से है कोई खतरा?

वैक्सीन के ट्रायल में इसका कोई गंभीर साइड-इफेक्ट नहीं पाया गया है। कुछ लोगों में बाहों में दर्द, बुखार या मांसपेशियों में दर्द देखा गया लेकिन यह ज्यादा चिंताजनक नहीं रहा। ब्रिटेन में मेडिसिन्स ऐंड हेल्थकेयर प्रॉडक्ट्स रेग्युलेटरी एजेंसी किसी भी तरह के गंभीर असर को मॉनिटर कर रही है। वहीं, वैक्सीन देने के 15 मिनट बाद लोगों को रुकना होगा ताकि किसी रिएक्शन को रजिस्टर किया जा सके।

क्या है चुनौती?

अभी तक इस्तेमाल की जा रही किसी भी वैक्सीन को mRNA से नहीं बनाया गया है। यह वैक्सीन इंसानी शरीर को प्रोटीन पैदा करने के लिए तैयार करती है जिससे प्रोटेक्टिव ऐंटीबॉडी तैयार होती हैं। इसकी वजह से डीप-फ्रीज उत्पादन, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क की जरूरत होती है ताकि वैक्सीन लंबे वक्त तक चल सके।

पहले किसे दी जा रही

पहले चरण में ब्रिटेन में केयर होम में रहने वाले बुजुर्गों और कर्मियों, 80 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों, फ्रंटलाइन हेल्थ और सोशल केयर कार्यकर्ताओं, 75 साल या उससे ज्यादा, 65 साल या उससे ज्यादा, 16-64 साल की उम्र के लोगों जिन्हें इन्फेक्शन का ज्यादा खतरा हो, 60 साल या उससे ज्यादा, 55 साल या उससे ज्यादा की उम्र के लोगों और आखिर में जनवरी तक 50 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी।

भारत को भी मिलेगी?

Pfizer ने भारत में भी इस्तेमाल के लिए इजाजत मांगी है लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिवराजेश भूषण का कहना है कि भारत फिलहाल मौजूदा कोल्ड-चेन क्षमता बढ़ने की स्थिति में नहीं है। यही नहीं, तापमान के अलावा कम समय में वैक्सीन डिलिवर करना भी एक चुनौती होगा। इसे देने के लिए पैरामेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग भी देनी होगी। ऐसी जगहों पर वैक्सीन डिलिवर करना मुश्किल होगा जहां वैक्सिनेशन सेंटर दूर हों या जहां लोग ही वैक्सिनेशन के लिए तैयार न हों।



Source link

Previous Article
Next Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *