ताइवान के तट पर बम बरसा रहा चीन, लाइव-फायर एक्सरसाइज में दिखाई ताकत

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पेइचिंग
चीन ने ताइवान से बढ़ते तनाव के बीच लाइव फायर एक्सरसाइज को शुरू किया है। बड़ी संख्या में चीनी सैनिक, बमवर्षक जहाज, रॉकेट लॉन्चर्स और आधुनिक युद्धपोत इस युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इस युद्धाभ्यास का आयोजन पीएलएक ईस्टर्न थिएटर कमांड ने किया है। चीन और ताइवान के संबंध हाल के दिनों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी उप विदेश मंत्री कीथ क्रैच की गुरुवार को ताइवान पहुंचने से चीन और भड़का हुआ है।

अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा ताइवान
उधर ताइवान ने भी चीन की धमकियों की परवाह न करते हुए अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने का फैसला किया है। इसी कारण ताइवान जान बूझकर अपने आप को अमेरिका का करीबी देश बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका भी अब ताइवान को अभेद्य ‘किला’ बनाने में जुट गया है। अ‍मेरिका ताइवान को 7 बेहद घातक हथियार दे रहा है जिसमें क्रूज मिसाइल और ड्रोन विमान शामिल हैं।

ताइवान को क्‍या-क्‍या हथियार दे रहा है अमेरिका
अमेरिका ताइवान को हथियारों से लैस ड्रोन दे रहा है जो निगरानी करने में भी माहिर हैं। इसके अलावा चीन समुद्र के रास्‍ते ताइवान पर हमला न कर सके इसके लिए अमेरिका ताइवान को बारुदी सुरंगें और अत्‍याधुनिक मिसाइल डिफेंस स‍िस्‍टम दे रहा है। अमेरिकी सुरंगे चीनी पनडुब्बियों को बर्बाद करने में सक्षम हैं। इसके अलावा अमेरिका ट्रक पर आधारित रॉकेट लॉन्‍चर, अत्‍याधुनिक एंटी टैंक मिसाइल भी ताइवान को दे सकता है। तटीय इलाके की सुरक्षा के लिए अमेरिका ताइवान को हार्पून एंटी शिप मिसाइल दे सकता है। इसके अलावा अमेरिका ताइवान को अत्‍याधुनिक एफ-16 फाइटर जेट दे रहा

ताइवान में चीनी लड़ाकू विमानों का घुसपैठ बढ़ा
चीन के लड़ाकू और टोही विमानों की बढ़ती घुसपैठ से ताइवान अलर्ट मोड पर है। कुछ दिन पहले ही ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने देश के एयर डिफेंस मिसाइल बेस का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने ताइवानी सैनिकों से द्वीप की संप्रभुता और लोकतंत्र की रक्षा करने का आह्वान किया। उनके मिसाइल बेस का दौरा करने को चीन ने आक्रामक कार्रवाई माना था।

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क्यों है चीन और ताइवान में तनातनी
1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद चियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्यूनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है।


ताइवान को सता रहा ट्रंप के हारने का डर
ताइवान को डर सता रहा है कि अगर ट्रंप हार गए तो बाइडन इतने घातक हथियार शायद ही ताइपे को दें। इसीलिए ताइवान जल्‍द से जल्‍द इन हथियारों की आपूर्ति चाहता है। चीन लगातार ताइवान स्‍ट्रेट के पास युद्धाभ्‍यास कर रहा है जिससे ताइवान का डर और बढ़ता जा रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ताइवान रक्षा पर काफी खर्च कर रहा है लेकिन उसे आत्‍मनिर्भर बनने की जरूरत है।

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