तो भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रच रहा चीन? लाइव फॉयर ड्रिल भी उसी का हिस्सा

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पेइचिंग
लद्दाख सीमा पर भारत के हाथों करारी मात खाने के बाद चीन अब साउथ चाइना सी में लाइव फायर ड्रिल कर रहा है। इस ड्रिल में उसकी ईस्टर्न थिएटर कमांड हिस्सा ले रही है। चीन की सरकारी मीडिया इसे ताइवान पर कब्जे की तैयारी के रूप में प्रस्तुत कर रही है। जबकि सामरिक विशेषज्ञ इसे भारत के खिलाफ चीन के जंग की तैयारी बता रहे हैं। 29-30 अगस्त से लेकर 7-8 सितंबर तक भारतीय फौज ने लद्दाख के कई हिस्सों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को पीछे खदेड़ा है।

लद्दाख की घटना पर चीन ने जताई थी नाराजगी
ऐसी भी रिपोर्ट आई थी कि पैंगोंग में चीनी सेना के पीछे हटने पर जिनपिंग ने नाराजगी जताई थी। जबकि, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने भी संबंधित कमांडर पर गुस्सा दिखाया था। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि चीनी सेना पलटवार करने की कोशिश जरूर करेगी। हालांकि, पैंगोंग के दक्षिणी किनारे पर भारतीय सेना सामरिक रूप से महत्वपूर्ण कई चोटियों पर काबिज है। ऐसे में चीन किसी दूसरे क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर सकता है।

चीनी जनता में इस बात को लेकर है गुस्सा
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, चीन में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि 1962 की लड़ाई में जिस हिस्से को 82 चीनी सैनिकों की जान देकर जीता गया था, उसी इलाके को भारत ने बिना एक भी गोली चलाए फिर से कब्जा कर लिया है। भारत ने पैंगोंग इलाके में महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा कर चीन की दुखती नस पर हमला किया है। यह भी कहा जा रहा है कि इस इलाके में भारत से युद्ध कर चीन इस क्षेत्र को दोबारा हासिल नहीं कर सकता है। बातचीत के जरिए भी भारत इस इलाके को चीन को नहीं सौंपने वाला है।

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अमेरिकी चुनाव के वक्त चीन कर सकता है कार्रवाई
चीन के सैन्य हलकों में भारत के खिलाफ जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। चीनी सोशल मीडिया पर यह बात तेजी से वायरल हो रहा है कि जिनपिंग प्रशासन अमेरिकी चुनाव के समय ही भारत या ताइवान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे दुनिया का सारा ध्यान अमेरिका पर केंद्रित होगा। अमेरिका अपने राजनीतिक हालात के कारण भारत का खुलकर मदद नहीं करेगा, जबकि भारतीय सेना भी भारी बर्फबारी के कारण अपने ऑपरेशन्स को आसानी से अंजाम नहीं दे पाएगी।

China Drill 01

चीन ने बनाई सैन्य रणनीति
चीन इस इलाके में छोटे स्तर का युद्ध कर सकता है। जिसमें भारतीय सैनिकों पर घात लगाकर हमला करना भी शामिल है। चीन के नानजिंग सैन्य क्षेत्र के पूर्व डिप्टी कमांडर वांग होंगगैंग जैसे चीनी जनरलों ने भारत के साथ निपटने के लिए चार सुझाव दिए हैं। पहला, लद्दाख में भारत के हवाई वर्चस्व पर कब्जा करना जरूरी है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम्स, भारत के कमांड नेटवर्क, एयर डिफेंस नेटवर्क (रडार नेटवर्क), और एयर कमांड नेटवर्क को नष्ट करना शामिल है। दूसरा, भारत के प्रमुख ऑर्टिलरी पोजिशन को निशाना बनाना है। जिससे भारत के ऑर्मर्ड क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स स्टोरेज वेयरहाउस, ऑयल डिपो आदि को नष्ट करना है। तीसरा प्रमुख रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा करना है जिससे सियाचीन ग्लेशियर और डेपसांग इलाके से भारत के संपर्क को काटना है। जबकि चौथा श्रीनगर से लेह तक राष्ट्रीय राजमार्ग 1 पर कब्जा करना है।

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जंग का ढोल पीट रही चीनी मीडिया
चीन की सरकारी मीडिया पिछले कई महीनों से भारत के खिलाफ जंग का ढोल पीट रही है। अधिकतर लेखों में भारत की सामरिक शक्ति को चीन के अपेक्षा कमजोर बताया जाता है। उनके लेखों में कहा जाता है कि भारतीय सेना चीन की पीएलए की योग्य प्रतिद्वंदी नहीं है। चीन का विदेश मंत्रालय भी बार-बार भारत को चेतावनी दे रहा है। चीन के राजनीतिक हलको में चर्चा है कि जिनपिंग भारत के खिलाफ कोई सख्त एक्शन क्यों नहीं ले रहे हैं।

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राजनयिक स्तर पर भारत के साथ शांति का राग अलाप रहा चीन
राजनयिक स्तर पर चीनी सरकार भारत के साथ अब भी शांति स्थापित करने की बात कर रही है। चीन का यह स्टैंड उसके पूर्व के व्यवहार के एकदम विपरीत है। ऐसे में विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि चीनी सरकार या तो संघर्ष से बच रही है या वह गुप्त रूप से और गहनता के साथ भारत के खिलाफ पलटवार की योजना बना रही है। भारत पर नजर रखने वाले चीन के कई मिलिट्री थिंक टैंक्स का भी मानना है कि युद्ध से कोई हल नहीं निकलने वाला।

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चीनी थिंक टैंक की भारत को लेकर यह राय
फुडन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के विशेषज्ञ झांग जिआदोंग, लिन मिनवांग तियान्हुआ विश्वविद्यालय से कियान फेंग, चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल एकेडमी के झांग गुवांगकिंग का मानना है कि चीन को भारत की शत्रुता को नजरअंदाज करने की आवश्यकता नहीं है। चीन युद्ध की जगह भारत के साथ बातचीत कर ज्यादा लाभ पा सकता है।


चीन की सैन्य तैयारियों पर चिंता
2017 के डोकलाम की घटना के बाद से कई चीनी रणनीतिकारों ने चिंता जताई है कि चीन अपने दक्षिण पश्चिम में एक सैन्य संघर्ष के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। छोटी मोटी झड़पों को भी चीन जीत नहीं सकता है। इसलिए मामले को बदतर बनने से पहले चीन को अपनी सेना की तैनाती बढ़ानी चाहिए।

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