थाइलैंड: लोकतंत्र के समर्थन में युवाओं का हथियार क्यों बना ‘Three Finger Salute’?

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थाइलैंड में लोकतंत्र की मांग लेकर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी छात्रों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया है जो सारी दुनिया में चर्चा का विषय बना है। यहां हजारों की संख्या में पहुंचे छात्र ‘थ्री फिंगर सल्यूट’ कर रहे हैं। जैसा नाम से जाहिर है, तीन उंगलियों से किया जाने वाला यह सल्यूट जब इस हफ्ते शाही काफिले के सामने दिखाया गया तो पिछले कुछ साल में अब तक का सबसे बड़ा विरोध का प्रतीक बन गया है। क्या है इस सल्यूट के पीछे की कहानी, जानते हैं…

कहां से आया ‘थ्री फिंगर सल्यूट’?

दरअसल, यह सल्यूट निकला है एक किताब पर आधारित हॉलिवुड फिल्म ‘हंगर गेम्स’ से। हालांकि, इसमें सल्यूट का तब किया जाता है जब किसी के प्रति सम्मान या प्रेम प्रकट करना हो या अलविदा कहना हो। समय के साथ आम लोग इसके जरिए अमीरों और भव्य राजधानी में रहने वाले तानाशाहों के खिलाफ विरोध और गुस्सा जाहिर करते हैं। यहां के काल्पनिक शहर में सेना इस ऊंचे तबके की रक्षा करती है।

2014 से चल निकला सल्यूट

2014-

पिछले कुछ साल में, खासकर 2014 के बाद से इसका इस्तेमाल थाइलैंड में लोकतंत्र का समर्थन करने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही इस सल्यूट के जरिए देश की सैन्य सत्ता के खिलाफ विरोध भी ऐसे ही किया जाता है। 2014 में जब तख्तापलट के बाद थाइलैंड की सेना ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी खत्म कर दी थी, तब पहली बार इसका इस्तेमाल किया गया था। इस तख्तापलट के मुख्य नेता और पूर्व आर्मी चीफ प्रयुत चान-ओ-चा अब देश के प्रधानमंत्री हैं। उनके खिलाफ प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सबसे ज्यादा है।

अमीरी-गरीबी में खाई का विरोध

थाइलैंड में भी आरोप लगाया जाता है कि देश की ज्यादातर संपत्ति बैंगकॉक के अमीरों की मुट्ठी में है। यहां सेना के जनरल कई बार तख्तापलट कर सत्ता हासिल करने की कोशिश करते आए हैं। लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश में अमीर-गरीब के बीच खाई गहराती जा रही है। एक कार्यकर्ता बताती हैं कि पहले शाही काफिले के सामने से आम लोग निकल भी नहीं सकते थे। लोगों को सबकुछ रोककर जमीन पर घुटने टेकने होते थे। अब शाही काफिले को यह सल्यूट दिखाया जाना बड़ी बात है।

कई रोचक तरीके किए गए इस्तेमाल

साल 2014 के बाद लोकतंत्र समर्थकों ने कई रोचक तरीकों से विरोध प्रदर्शन किए। कभी पिकनिक पर अनजान लोगों को सैंडविच बांटे गए तो कभी जॉर्ज ऑरवेल की डिस्टोपियन नोवेल 1984 पढ़ी गई। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चित थ्री फिंगर सल्यूट हुआ है। विरोध प्रदर्शनों से लेकर कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी होने पर कोर्ट या पुलिस वैन में ले जाते समय, यह सल्यूट कई बार देखा गया।



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