दुनिया के सबसे खतरनाक स्‍थान पर दिखी विशाल तितली, पक्षी के जैसे हैं पंख

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हाइलाइट्स:

  • यूक्रेन के चेर्नोबिल परमाणु पावर प्‍लांट के दुर्घटनास्‍थल के पास एक विशाल तितली देखी गई है
  • इस त‍ितली के पंख इतने बड़े हैं कि यह देखने में किसी पक्षी की तरह से नजर आ रही है
  • उसे चेर्नोबिल प्‍लांट के विशेष जोन के अंदर देखा गया है, वैज्ञानिकों ने इसकी पहचान की है

चेर्नोबिल
दुनिया के सबसे खतरनाक स्‍थानों में शुमार यूक्रेन के चेर्नोबिल परमाणु पावर प्‍लांट के दुर्घटनास्‍थल के पास एक विशाल तितली देखी गई है। इस त‍ितली के पंख इतने बड़े हैं कि यह देखने में किसी पक्षी की तरह से नजर आ रही है। उसे चेर्नोबिल प्‍लांट के विशेष जोन के अंदर देखा गया है। रेडिएशन एंड इकोलॉजिकल बॉयोस्‍फेयर रिजर्व के वैज्ञानिकों ने इसकी पहचान की है।

इन वैज्ञानिकों ने इस तितली की तस्‍वीर को रिजर्व के फेसबुक पेज पर शेयर किया है। रेडिएशन एंड इकोलॉजिकल बॉयोस्‍फेयर रिजर्व के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह तितली म्‍युटेशन का परिणाम नहीं है बल्कि यहां पाई जाने वाली एक खास और दुर्लभ प्रजाति की तितली है। इसे Catocala fraxini के नाम से जाना जाता है। इस खूबसूरत तितली के पंख नीले होते हैं।

तितली को यूक्रेन में संकटग्रस्‍त प्रजाति के अंदर रखा गया
रिजर्व ने अपने बयान में कहा, ‘इस तितली को यूक्रेन में संकटग्रस्‍त प्रजाति के अंदर रखा गया है। कटोकला फ्राक्सिनी यूक्रेन और यूरोप में पाई जाने वाली सबसे बड़ी तितलियां में से एक है। इस त‍ितली के आगे के पंख 45 मिलीमीटर और उड़ान के दौरान पंखों का फैलाव 110 एमएम तक हो सकता है। यह तितली उड़ान के दौरान सुखद लगती है। इसके अंदर के पंखे रात को सक्रिय होते हैं जो नीले रंगे के होते हैं। रात में प्रकाश में ये पंख बहुत सुंदर लगते हैं। जब बारिश बंद होगी तो हम इस त‍ितली को उसके सबसे पसंदीदा चिनार के पेड़ पर ले जाएंगे।’


बता दें कि चेर्नोबिल प्‍लांट के विशेष जोन का निर्माण पावर प्‍लांट में भीषण दुर्घटना के बाद वर्ष 1986 में किया गया था। यह दुनिया के इतिहास में अब तक की सबसे भीषण दुर्घटना मानी जाती है। इसमें तत्‍काल करीब 100 लोग मारे गए और बाद के वर्षो में हजारों लोग रेडिएशन की चपेट में आकर मारे गए थे। वर्ष 2016 में रेडिएशन एंड इकोलॉजिकल बॉयोस्‍फेयर रिजर्व की स्‍थापना की गई ताकि इस इलाके की विशेष वन‍स्‍पति और पेड़-पौधे को बचाया जा सके। साथ ही यहां पर रेडियोधर्मी विकिरण के प्रभाव का आकलन किया जा सके।



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