दुनिया में कोरोना फैलाकर चीन ने खोला स्कूल-कॉलेज, भारत समेत कई देशों में अब भी पाबंदी

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दुनियाभर में कोरोना वायरस फैलाकर चीन अब अपने देश में जनजीवन को पटरी पर ला रहा है। वहीं, भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में संक्रमण की विभीषिका को देखते हुए अब भी कई पाबंदियां लागू है। हालांकि, इस बीच ब्रिटेन ने यह जरूर ऐलान किया है कि वह अगले सप्ताह से स्कूलों को खोलने जा रहा है। लेकिन, कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ब्रिटिश सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। इस बीच चीन के स्कूल खोलने के फैसले ने ड्रैगन की नीयत पर फिर सवाल खड़े किए हैं।

चीन ने खोला स्कूल, मास्क किया अनिवार्य

चीन की राजधानी बीजिंग में शनिवार को कोरोना वायरस के कारण नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत बहुत फीकी रही। इस दौरान करीब एक तिहाई छात्र ही कक्षाओं में पहुंचे। बीजिंग में पांच लाख 90 हजार छात्रों के पहले ग्रुप में सभी तीन वर्षों के उच्च विद्यालय के छात्र, माध्यमिक स्कूलों के पहले और तृतीय वर्ष के छात्र और प्राथमिक स्कूलों के पहले दर्जे के छात्र शामिल थे। चार लाख अन्य छात्र मंगलवार को स्कूल जाएंगे ओर फिर पांच लाख 20 हजार छात्र 7 सितंबर से स्कूलों में जाएंगे। इस दौरान छात्रों और शिक्षकों सभी के लिए मास्क पहनना जरूरी है।

अगले हफ्ते से स्कूल खोलने की तैयारी कर रहा ब्रिटेन

ब्रिटेन अगले हफ्ते यानी सोमवार से स्कूलों को दोबारा खोलने जा रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा था कि बच्चों को कक्षाओं से दूर रखना खतरनाक वायरस के मुकाबले ज्यादा नुकसानदेह होगा। देश के अलग अलग हिस्सों में ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल का नया सत्र शुरू होने को लेकर तैयारी चल रही है। स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड इस दिशा में अग्रणी हैं और उसके बाद अगले हफ्ते इंग्लैंड और वेल्स में भी स्कूल खुल रहे हैं। ब्रिटेन में संक्रमण फैलने के बाद से पांच माह से स्कूल बंद हैं और अगले महीने से सभी स्कूल खोलने की योजना है।

अमेरिका में स्कूल खुलने से सैकड़ों बच्चे हुए संक्रमित

अमेरिका में अगस्त की शुरुआत में स्कूलों को खोलने से सैकड़ों की संख्या में बच्चे कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। ऐसी स्थिति में कई स्कूलों को दोबारा बंद करना पड़ा है। वहीं कई अमेरिकी राज्य अभी भी स्कूल-कॉलेजों को बंद करने के पक्ष में हैं। बता दें कि अमेरिका कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित देश है। ऐसी स्थिति में स्कूलों के खुलने से वहां जा रहे विद्यार्थियों के संक्रमित होने का खतरा भी बढ़ गया है।

फ्रांस ने स्कूलों के लिए लागू किया लंबा-चौड़ा दिशा-निर्देश

फ्रांस में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामलों के बीच स्कूल खोलने के लिए सबसे विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को स्कूल और खेल के मैदान में हर समय फेस कवर करना होगा। छोटे बच्चों को मास्क से छूट दी गई है। वहीं, स्कूलों में एक मीटर की दूरी को बनाए रखने को भी कहा गया है।

जर्मनी में फिर से बंद करने पड़े स्कूल

जर्मनी में 15 दिन पहले खुले स्कूलों को कोरोना संक्रमण के बढ़ने के कारण फिर से बंद करना पड़ा है। यहां कई स्कूलों में कोरोना संक्रमण के मामले पाए गए हैं। अधिकारियों ने दावा किया है कि बर्लिन में अधिकांश संक्रमण केवल एक शिक्षक या एक छात्र में ही हुआ है। उनका यह भी कहना है कि संक्रमण स्कूल में नहीं, बल्कि बाहर फैला है। कुछ जर्मन राज्यों ने स्कूलों में हर समय फेस कवरिंग को अनिवार्य कर दिया है।

साउथ कोरिया में भी स्थिति सामान्य नहीं

साउथ कोरिया को भी संक्रमण के बढ़ने के कारण अपने स्कूलों को फिर से बंद करना पड़ा है। यहां मास्क और फेसशील्ड के बाद भी संक्रमण में तेजी देखी गई थी। जिसके बाद सरकार ने सभी स्कूलों को बंद कर दिया। यहां जब स्कूल खुले थे तो बच्चों को वैकल्पिक दिनों पर बुलाया गया। वहीं, उनके तापमान पर भी नजर रखी गई, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ।

भारत में 30 सितंबर तक स्कूल बंद, कॉलेजों के लिए नियम

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शनिवार को जारी हुई अनलॉक -4 की गाइडलाइन में कहा गया है कि स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और अन्य शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। हालांकि, कंटेनमेंट जोन के बाहर के स्कूलों में स्वेच्छा से कक्षा 9 और 12 के छात्र स्कूल जा सकते हैं। इसका मतलब है कि स्टू़डेंट्स चाहें तभी वे स्कूल जाएं, स्कूल अटेंड करना बाध्यकारी नहीं होगा। कहा गया है कि 21 सितंबर से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्कूलों में 50 पर्सेंट टीचिंग स्टाफ को स्कूल आने के परमिशन दे सकते हैं। ये स्टाफ ऑनलाइन टीचिंग के लिए स्कूल आ सकते हैं। इस दौरान सभी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और अन्य शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।



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