धमका रहा है चीन, ताइवान कभी नहीं रहा उसका हिस्सा: विदेश मंत्री जोसफ वू

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ताइपे
चीन ने भारत ही नहीं, ईस्ट चाइना सी में जापान, साउथ चाइना सी में इंडोनेशिया, वियतनाम, फिलिपींस से लेकर अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया तक की नाक में दम करके रखा है। यही नहीं, उसने ताइवान पर सीधे-सीधे दावा ठोंक रखा है। वहीं, ताइवान के विदेश मंत्री ने कहा है कि ताइवान कभी चीन का हिस्सा था ही नहीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि ताइवान के अस्तित्व को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा है कि इससे न सिर्फ देश को फायदा होगा बल्कि दूसरे देशों को भी मदद मिलेगी।

कई देशों को है परेशानी
इंडिया टुडे से इंटरव्यू में ताइवान के विदेश मंत्री जोसफ वू ने कहा कि दुनिया के इस हिस्से में सिर्फ ताइवान को चीन से परेशानी नहीं है, जापान को ईस्ट चाइना सी में दिक्कत हो रही है जहां समुद्र में चीन घुसपैठ कर रहा है, वहीं दक्षिण चीन सागर के पास देशों को भी परेशानी हो रही है। भारत-चीन सीमा के पास भी विवाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब एक ही मुद्दे के सामाना कर रहे हैं और वह है चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी का विस्तारवाद।

एक जैसे विचारों वाले देश आएं साथ
जोसफ ने कहा कि ताइवान लोकतांत्रिक और एक जैसा सोचने वाले देशों, जैसे अमेरिका, जापान और भारत के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि हमें सोचना शुरू करना चाहिए कि विचारों और इंटेलिजेंस को एक्सचेंज किया जाए। आपस में सहयोग के क्षेत्रों को ढूंढना चाहिए। अभी भारत से मिनिस्टीरियल अलायंस नहीं है लेकिन साथ आना दोनों देशों के लिए अहम है।


अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
संयुक्त राष्ट्र के अब तक ताइवान को मान्यता नहीं दिए जाने पर जोसफ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संस्थानों को गंभीरता से ताइवान के अस्तित्व के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में 2.3 करोड़ लोग हैं, यह एक लोकतंत्र है, यहां लोकतांत्रिक सरकार को लोग चुनते हैं और प्रेस की फ्रीडम ऑफ स्पीच का पालन किया जाता है।

चीन का नहीं था ताइवान
जोसफ ने साफ कहा कि ताइवान चीन से बाहर है। उन्होंने कहा कि कई देशों को लगता है कि चीन के पास वन चाइना पॉलिसी है और चीन ताइवान का नेतृत्व करता है लेकिन ऐतिहासिक तर पर 1949 से ताइवान चीन का हिस्सा नहीं जब से चीनी रिपब्लिक की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि चीन ताइवान का नेतृत्व नहीं कर सकता, सिर्फ ताइवान की सरकार कर सकती है। यहां के लोगों के पास दुनिया में अपना प्रतिनिधित्व करने का अधिकार हैं।

दूसरे देशों का होगा सहयोग
जोसफ ने कहा कि ताइवान UN, WHO ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में सहयोग की भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने कहा कि पब्लिक हेल्थ में हमारे पास अनुभव है और महामारी के दौरान हमने दूसरे देशों को सहयोग दिया है। उन्होंने बताया कि भारत के अस्पतालों के साथ भी काम किया गया। जोसफ ने कहा कि चीन ताइवान को धमका रहा है।

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