नवाज शरीफ पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, लंदन पहुंचा पाकिस्तानी कोर्ट का अरेस्ट वारंट

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इस्लामाबाद
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर गिरफ्तारी की तलवार फिर लटकने लगी है। पाकिस्तानी सरकार ने लंदन स्थित अपने उच्चायोग के माध्यम से अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को गिरफ्तारी का वारंट भेजा है। नवाज शरीफ लाहौर हाईकोर्ट से इलाज के नाम पर 4 सप्ताह तक विदेश में रहने की अनुमति मिलने के बाद नवंबर 2019 से ही लंदन में हैं।

सात साल की सजा काट रहे थे शरीफ
शरीफ को अल-अजीजिया स्टील मिल्स मामले में दिसंबर 2018 में दोषी पाए जाने पर सात साल की जेल की सजा हुई थी। उन्हें दोनों मामलों में जमानत मिल गई थी और लंदन जाने की अनुमति भी दे दी गई थी। शरीफ के वकील के मुताबिक उन्हें पाकिस्तान लौटने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण वह नहीं आ पाए। उनकी बेटी मरियम और दामाद मुहम्मद सफदर को एवेनफील्ड संपत्ति के मामले में छह जुलाई 2018 को दोषी पाया गया था।

पाकिस्तानी हाईकमीशन को मिला गिरफ्तारी वारंट
लंदन स्थित पाकिस्तानी हाईकमीशन को नवाज शरीफ की गिरफ्तारी का वारंट प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज गुरुवार को मिल गए थे लेकिन उच्चायोग ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी थी। हाईकमीशन के अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में सभी कानूनी औपचारिकताओं और प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। ब्रिटेन जाने की अनुमति मिलने से पहले शरीफ लाहौर की कोट लखपत जेल में सात साल की जेल की सजा काट रहे थे।

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ब्रिटिश सरकार से प्रत्यर्पण की अपील
पाक सरकार ने ब्रिटिश सरकार को भी इस घटनाक्रम से दो मार्च को अवगत करा दिया था। इसके साथ ही उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध भी किया गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार शहजाद अकबर ने नवाज शरीफ की लंदन में घूमते हुए दिखाए जाने वाली तस्वीरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अपने बेटों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में बिल्कुल स्वस्थ्य नजर आ रहे हैं। हालांकि, उनकी बेटी मरयम नवाज ने कहा था कि उनके पिता अत्यधिक जोखिम ग्रस्त रोगी हैं इसलिए उनके हृदय का ऑपरेशन कोविड-19 के मद्देनजर टाल दिया गया था।

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लंदन में इलाज करवा रहे हैं नवाज शरीफ
पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके शरीफ इलाज के लिये लंदन में हैं। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में समस्या का पता चलने के बाद वह वहां गये थे। वह पिछले साल नवंबर में ब्रिटेन गये थे। लाहौर उच्च न्यायालय ने इलाज के लिये उन्हें चार हफ्ते के लिये विदेश जाने की इजाजत दी थी। अकबर ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री ने प्रयोगशाला की फर्जी जांच रिपोर्ट सौंपी थी। उन्होंने बताया कि कानून मंत्रालय और ब्यूरो तथा जेल विभाग को उनकी जमानत की अवधि खत्म होने तथा इसमें विस्तार का अनुरोध खारिज होने से अवगत करा दिया गया है।



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