ना’पाक’ मंसूबों पर सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो की तीसरी आंख, NTRO के बारे में जानें सबकुछ

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नई दिल्ली
सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) के हीरो कहे जाने वाले अनिल धस्माना (Anil Dhasmana) को नैशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। एनटीआरओ वह संगठन है जिसे सरकार की तीसरी आंख कहा जा सकता है। धस्माना लंबे समय तक रॉ में कार्यरत थे और उन्हें पाकिस्तान मामलों का एक्सपर्ट भी कहा जाता है। ऐसे में NTRO की कमान संभालना एक बड़ा संकेत है। दरअसल NTRO ही वह संगठन है जिसने बालाकोट स्ट्राइक के बाद यह जानकारी दी थी कि वहां कितने लोग मारे गए हैं। NTRO का भी काम खुफिया जानकारी जुटाना ही है लेकिन यह रॉ या इंटेलिजेंस ब्यूरो से अलग है। आइए जानते हैं कि क्या है इसकी खास बात-

क्या है NTRO?
हमारे देश में रॉ और आईबी (intelligence bureau) भी लंबे समय से खुफिया एजेंसी के तौर पर काम करती रही हैं। 1999 में जब करगिल युद्ध हुआ था तो इसे खुफिया एजेंसियों को नाकामयाबी माना गया क्योंकि पाकिस्तानी सैनिकों ने सीमा के अंदर तक अपने बंकर बना लिए थे। इसके बाद सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गई जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) केके हजारी, बीजी वर्गीज और सतीश चंद्रा जैसे लोग शामिल थे। कमिटी की रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया कि यह युद्ध खुफिया एजेंसियों की विफलता की वजह से लड़ना पड़ा।

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डॉ. कलाम ने तैयार किया था रोड मैप


पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम उस वक्त रक्षा सलाहकार थे। उन्होंने NTFO यानी नैशनल टेक्निकल फैसिलिटीज ऑर्गनाइजेशन का खाका तैयार किया। बाद में साल 2004 में इसी संगठन का नाम NTRO कर दिया गया। दरअसल केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक कमिटी बनाई थी जिसके अध्यक्ष उस वक्त के उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी थे। इसके बाद ही NTFO का गठन हुआ था।

क्या करता है NTRO
NTRO देश की सुरक्षा से संबंधित खुफिया जानकारियां जुटाता है और फिर सरकार, सेना के साथ शेयर करता है। दरअसल यह संगठन तकनीक का ज्यादा सहारा लेता है। सैटलाइट के माध्यम से यह निगरानी रखता है और पता लगाता है कि आखिर कहां पर क्या चल रहा है। इसके अलावा मोबाइल फोन की मॉनिटरिंग का भी काम करता है।

देश के अंदर जरूरी संगठनों और उनकी इमारतों पर भी NTRO कि नजर रहती है। यह ड्रोन से भी निगरानी का काम करता है और समुद्री इलाकों में भी सुरक्षा के लिए हमेशा नजर गड़ाए रहता है। NTRO ने अंतरिक्ष में टेक्नॉलजी एक्सपेरिमेंट सैटलाइट भेजा है जिसके जरिए यह नगरानी करता है। इसके अलावा NTRO के दो रडार सैटलाइट भी हैं जिनके जरिए यह खुफिया जानकारी जुटाता है। रडार सैटलाइट से यह तस्वीरें जुटाता है।

युद्ध से संबंधित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की सुरक्षा भी इसी के जिम्मे है। यह निगरानी करने के बाद डेटा इकट्ठा करता है और फिर इसके अनैलिसिस किया जाता है। एनटीआरओ प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अंडर काम करता है। बालाकोट स्ट्राइक के समय एनटीआरओ ने खुफिया जानकारियों और सैटलाइट से ली गई तस्वीरों के जरिए 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने का दावा किया था।

रॉ और इंटेलिजेंस ब्यूरो से कैसे अलग है NTRO?
दरअसल ये तीनों ही एजेंसियों देश की सुरक्षा के लिए काम करती हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो सबसे पुरानी खुफिया एजेंसी है जिसका गठन अंग्रेजों के समय में ही हुआ था। 1968 तक देश में यही एक खुफिया एजेंसी थी। 1962-65 के युद्ध में इस एजेंसी को नाकाम माना गया था। इसलिए बाद में रॉ का गठन हुआ। इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ दोनों ही गृह मंत्रालय के तहत एजेंसियां हैं। रॉ का काम पड़ोसी देशों पर निगरानी रखना है और सेना और सरकार को जानकारी देना है। बांग्लादेश के बंटवारे में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई।



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