पाकिस्‍तान की जंगी ताकत बढ़ाने में जुटा चीन, तस्वीरों में दिखा किलर पनडुब्बियों का अड्डा

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कराची
पाकिस्तान की नेवी का कराची में विस्तार साफ दिखने लगा है। यहां के शिपयार्ड में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं। एक नया कंस्ट्रक्शन हॉल और ज्यादा क्षमता वाला ड्राई डॉक देखा जा सकता है। इसे लेकर जानकारी अभी सीमित हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि यहां चीन की डिजाइन कीं AIP (एयर इंडिपेंडेंट पावर) पनडुब्बियों को को स्थानीय स्तर पर निर्माण किया जाएगा। पाकिस्तान की नेवी में आठ Type-039B ‘Hangor Class’ पनडुब्बियों के आने से इसकी ताकत बढ़ जाएगी।

चीन और पाकिस्तान मिलकर बना रहे हैं
नेवल न्यूज के लिए HI Sutton ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नई पनडुब्बियां चीनी नेवी की Type-039A Yuan Class जैसी होंगी। इनका निर्माण चीन के शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (CSIC) और कराची शिपयार्ड और इंजिनियरिंग वर्क्स (KSEW) मिलकर करेंगे। इससे पहले कराची में पाकिस्तान की फ्रांस की डिजाइन की हुई अगोस्ता क्लास की पनडुब्बियां बन चुकी हैं।

आगे चलकर जंगी जहाजों के काम आ सकता है
नया कंस्ट्रक्शन हॉल और ड्राई-डॉक KSEW के दक्षिणी हिस्से में हैं। दो लेन का हॉल 2015 से बन रहा है। बाहरी हिस्सा काफी हद तक पूरा हो चुका है। यहां एक साथ दो पनडुब्बियां बनने की जगह हो सकती है। वहीं, ड्राई डॉक का काम 2016 से चल रहा है। नॉर्वे के Syncrolift शिप-लिफ्ट डिजाइन का डॉक पानी के ऊपर है। ड्राई-डॉक 126 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है और इसकी लिफ्टिंग क्षमता 7,881 टन की है। नई पनडुब्बियों के लिए इसे पर्याप्त माना जा रहा है। फ्रीगेट के आकार के जंगी जहाजों और बड़ी पनडुब्बियों के काम भी आ सकता है।

चीन-पाकिस्तान साथ में करते हैं युद्धाभ्यास
अभी तक की जानकारी के मुताबिक पहली पनडुब्बी चीन में बनी है और वह 2022 तक डिलिवर की जा सकती है। स्थानीय निर्माण 2028 तक चल सकता है। चीन से अधिग्रहण ट्रेंड का हिस्सा है। कई पाकिस्तानी नौसैनिक जंगी जहाजों के प्रोग्राम चीन को गए हैं। पाकिस्तान और चीन की नौसेनाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करती हैं। दोनों के जंगी जहाज और पनडुब्बियां साथ में युद्धाभ्यास भी करती हैं।

पाक के पास ही रह गया है MESMA
पाकिस्तानी नौसेना की मुख्य पनडुब्बी बर्थ के पास ही ये निर्माण हॉल भी होंगे। यहां से PNS इकबाल भी करीब है जहां से पाकिस्तान नेवी का X-Craft मिजेट सबमरीन प्रोग्राम चल रहा है। टेक्नॉलजी ट्रांसफर से KSEW को फायदा होगा। स्टर्लिंग की AIP टेक्नॉलजी फ्रांस के MESMA सिस्टम से अलग है जो पाकिस्तान की Agosta-90B टाइप बोट में लगा है। पाकिस्तान अकेला ऐसा देश है जो MESMA पर काम करता है।



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