पिनाक रॉकेट सिस्‍टम: 44 सेकंड में 12 रॉकेट करेगा फायर, जमीनी जंग में दुश्मनों का सफाया तय

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भारत ने पिनाक रॉकेट्स, लॉन्‍चर्स और जरूरी उपकरणों के बड़े पैमाने पर उत्‍पादन की तैयारी शुरू कर दी है। डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाजेशन (DRDO) ने इस बारे में सारी जानकारी डायरेक्‍टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्‍योरेंस (DGQA) को सौंप दी है। देश के सारे डिफेंस उपकरणों की क्‍वालिटी और स्‍टैंडर्ड मेंटेन रहे, यह तय करना DGQA का काम है। पिनाक असल में एक फ्री फ्लाइट आर्टिलरी रॉकेट सिस्‍टम है जिसकी रेंज 37.5 किलोमीटर है। पिनाक रॉकेट्स को मल्‍टी-बैरल रॉकेट लॉन्‍चर से छोड़ा जाता है। लॉन्‍चर सिर्फ 44 सेकेंड्स में 12 रॉकेट्स दाग सकता है। भगवान शिव के धनुष ‘पिनाक’ के नाम पर डेवलप किए गए इस मिसाइल सिस्‍टम को भारत और पाकिस्‍तान से लगी सीमाओं पर तैनात करने के मकसद से बनाया गया है।

कैसे हुई पिनाक रॉकेट सिस्‍टम की शुरुआत?

पिनाक लंबी दूरी का आर्टिलरी सिस्‍टम है। इसे नजदीक से युद्ध होने से पहले दुश्‍मन को टारगेट करने के लिए यूज किया जाता है। इससे छोटी रेंज की आर्टिलरी, इन्‍फैंट्री और हथियारबंद वाहनों को निशाना बनाया जाता है। भारत के पास रॉकेट्स दागने के लिए ‘Grad’ नाम का रूसी सिस्‍टम हुआ करता था। यह अब भी इस्‍तेमाल होता है। इसके विकल्‍प के रूप में 1980 के दशक में DRDO ने पिनाक रॉकेट सिस्‍टम को डेवलप करना शुरू किया। 1990 के आखिरी दौर में पिनाक मार्क-1 के सफल टेस्‍ट हुए। भारत ने करगिल युद्ध में भी सफलतापूर्वक पिनाक सिस्‍टम का यूज किया था। बाद में पिनाक की कई रेजिमेंट्स बन गईं।

एक बैटरी में होते हैं छह लॉन्‍च वेहिकल

पिनाक मूल रूप से मल्‍टी-बैरल रॉकेट सिस्‍टम है। इससे सिर्फ 44 सेकेंड्स में 12 रॉकेट दागे जा सकते हैं। पिनाक सिस्‍टम की एक बैटरी में छह लॉन्‍च वेहिकल होते हैं, साथ ही लोडर सिस्टम, रडार और लिंक विद नेटवर्क सिस्‍टम और एक कमांड पोस्‍ट होती है। एक बैटरी के जरिए 1×1 किलोमीटर एरिया को पूरी तरह ध्‍वस्‍त किया जा सकता है। मार्क-I की रेंज करीब 40 किलोमीटर है जबकि मार्क-II से 75 किलोमीटर दूर तक निशाना साधा जा सकता है।

मार्क-II में क्‍या है खास?

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पिनाक रॉकेट का मार्क-II वर्जन एक गाइडेड मिसाइल की तरह बनाया गया है। इसमें नेविगेशन, कंट्रोल और गाइडेंस सिस्‍टम जोड़ा गया है ताकि रेंज बढ़ जाए और सटीकता भी। मिसाइल का नेविगेशन सिस्‍टम सीधे इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्‍टम से जोड़ा गया है। ताजा अपग्रेड्स के साथ, मार्क-II ‘नेटवर्क केंद्र‍ित युद्ध’ में अहम भूमिका निभा सकता है।

पिनाक क्‍यों है बेहतरीन?

आर्टिलरी गन्‍स के मुकाबले में रॉकेट्स की एक्‍युरेसी कम होती है। हालांकि मार्क-II में गाइडेंस और नेविगेशन सिस्‍टम लगने से वह कमी पूरी हो गई है। इसके साथ ही युद्ध के समय रॉकेट लॉन्‍चर्स को ‘शूट ऐंड स्‍कूट’ की रणनीति अपनानी पड़ती है। यानी एक बार टारगेट पर फायर करने के बाद वहां से हट जाना होता है ताकि वे खुद निशाना न बन जाएं। लॉन्‍चर वेहिकल की मैनुव‍रेबिलिटी बहुत अच्‍छी होनी चाहिए। पिनाक इस पैमाने पर खरा उतरता है।



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