पूरी फिल्म इंडस्ट्री को एक ब्रश से पेंट करना सही नहीं: अमोल पराशर

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यंगस्टर्स के चहेते ऐक्टर अमोल पराशर इन दिनों अपनी फिल्म ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में डिलिवरी बॉय उस्मान के रूप में उन्होंने अपनी ट्रिपलिंग के चितवन वाली पुरानी इमेज को पूरी तरह तोड़ दिया है। पेश है उनसे यह खास बातचीत:

टीवीएफ की हिट सीरीज ट्रिपलिंग के चितवन के रूप में चर्चित ऐक्टर अमोल पराशर इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ के उस्मान के रूप में तारीफें बटोर रहे हैं। हालांकि, अमोल के लिए इस फिल्म की शूटिंग आसान नहीं थी, क्योंकि उस दौरान वह ट्रिपलिंग के दूसरे सीजन की शूटिंग भी कर रहे थे। ऐसे में, उन्हें कभी हाई एनर्जी वाले चितवन के रोल के ढलना होता था, तो कभी शांत और सीधे-साधे उस्मान के रूप में।

एक दिन चितवन, तो दूसरे दिन उस्मान होता था
बकौल अमोल, ‘दो साल पहले ट्रिपलिंग 2 और इस फिल्म की शूटिंग लगभग एक साथ ही हुई थी। तब एक दिन मैं मस्ती-मजाक वाला चितवन होता था, तो दूसरे दिन सीधे स्वभाव वाले उस्मान की शूटिंग करता था, तो यह काफी चुनौतीपूर्ण था। मुझे डर भी था कि कहीं दोनों किरदारों में कोई घालमेल न हो जाए, क्योंकि ये दोनों बिल्कुल अलग करैक्टर हैं। चितवन मैं एक बार कर चुका था, तो उस पर थोड़ी पकड़ थी, पर उस्मान नया किरदार था। नया सेट अप था, नए लोग थे, तो थोड़ी घबराहट थी। इसलिए, मैंने पूरा फोकस रखा कि गलती से भी चितवन वाली बॉडी लैंग्वेज न आ जाए। काफी अलर्ट रहना पड़ा कि कहीं दोनों मिक्स न हो। यह एक बड़ा चैलेंज था, पर इसी में मजा भी था।’

कोंकणा संग काम को लेकर नर्वस था
फिल्म में अमोल का इंडस्ट्री की बेहतरीन अदाकारा कोंकणा सेन शर्मा के साथ रोमांटिक ट्रैक है। ऐसे में, उनके साथ काम करने के अनुभव पर अमोल बताते हैं, ‘शुरू में कोंकणा के साथ काम करने को लेकर एक्साइटमेंट भी थी, पर थोड़ा नर्वस भी था कि क्या होगा। कहीं मेरा काम कम न पड़ जाए या मेरी वजह से सीन कमजोर न हो या फिर कोई यह न बोल दे कि आप मैच नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी बातें थीं मन में, पर जब हमने वर्कशॉप की, तो हमारे बीच बिल्कुल नॉर्मल तालमेल रहा। ऐसा कभी नहीं लगा कि वह बीस साल से काम कर रही हैं और मैं 5 साल से कर रहा हूं। हम एकदम बराबरी पर बात करते थे, तो सारी नर्वसनेस खत्म हो गई। तब मुझे अहसास हुआ कि सीन करते वक्त आप सिर्फ किरदार होते हैं। सीनियर-जूनियर, कम फेमस-ज्यादा फेमस, वह सब मैटर नहीं करता।’

गुस्सा जायज, पर अंधाधुन गोलियां न चलाएं
सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद अमोल ने ट्विटर पर एक इमोशनल पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने बाहर से बड़े सपने लेकर आने वाले ऐक्टर्स और उनके पैरंट्स का डर के बारे में बात की थी। उस बारे में अमोल कहते हैं, ‘उस वक्त वह मेरी निजी फीलिंग थी। वह घटना पूरे देश के लिए शॉकिंग थी। एक इंसान, जो सामाजिक मायने में हर तरह से कामयाब था, उसके साथ ऐसा होना सबके लिए सदमा था, तो मेरे भी पैरंट्स ने फोन किया। कुछ और दोस्तों ने ऐसा बताया। हर कोई हिला हुआ था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इतना असर क्यों हो रहा है। मैं सुशांत का दोस्त नहीं था, फिर भी इतना दुख हो रहा है, तो मैंने वह कनेक्शन समझने की कोशिश की थी।’ वहीं, मौजूदा दौर में फिल्म इंडस्ट्री पर उठ रही उंगलियों के बाबत अमोल का कहना है, ‘मुझे लगता है कि जो सही या गलत है, वह जांच से पता चल जाएगा, लेकिन पूरी इंडस्ट्री को एक ब्रश से पेंट नहीं करना चाहिए। इस इंडस्ट्री में लाखों लोग काम करते हैं। ऐक्टर्स इसका एक छोटा सा हिस्सा है, बाकी डायरेक्टर्स, कैमरामैन, स्पॉट बॉय, लाइट बॉय, बहुत सारे लोग काम करते हैं, तो सबको एक ही रंग में नहीं रंगना चाहिए। लोगों का गुस्सा शायद जायज है। उनका दुख और इमोशन जायज है, लेकिन उस इमोशन को आप कैसे दिखाते हैं, वह भी जरूरी है। मेरे हिसाब से अंधाधुन गोलियां नहीं चलानी चाहिए।’



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