पूर्व IPS सुनील कुमार को जेडीयू ने दिया टिकट, जानें कैसे सियासी रेस में पांडेय जी से निकले आगे

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हाइलाइट्स:

  • पूर्व आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार भोरे सीट से लड़ेंगे चुनाव
  • सुनील कुमार को जेडीयू ने टिकट दिया, वह बिहार में कई महत्वपूर्व पदों पर रहे हैं
  • भोरे से सुनील कुमार के बड़े भाई अनिल कुमार हैं विधायक
  • 31 जुलाई को रकारी सेवा से रिटायर हुए थे सुनील कुमार

पटना
बिहार चुनाव के पहले फेज के लिए सभी दलों ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। जेडीयू उम्मीदवारों की लिस्ट का लोगों को सबसे ज्यादा इंतजार था। बुधवार शाम को लिस्ट जारी हो गया है। लेकिन हाल ही में जेडीयू में शामिल हुए गुप्तेश्वर पांडेय का नाम उसमें नहीं था। पांडेय जी से कुछ दिन पहले जेडीयू में शामिल हुए पूर्व आईपीएस सुनील कुमार को जेडीयू ने टिकट दे दिया है। टिकट की रेस में सुनील कुमार गुप्तेश्वर पांडेय से आगे निकल गए हैं।

सुनील कुमार 1987 बैच के आईपीएस अफसर हैं। वह पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के पद से 31 जुलाई को रिटायर हुए थे। सुनील कुमार की गिनती नीतीश कुमार के करीबी अफसरों में होती थी। रिटायरमेंट के बाद 29 अगस्त को उन्होंने जेडीयू की सदस्यता ग्रहण कर ली है। सुनील कुमार पांडेय जी के जूनियर अधिकारी रहे हैं। लेकिन सियासी रेस में वह पांडेय जी से आगे निकल गए हैं।

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जेडीयू ने पूर्व आईपीएस सुनील कुमार को गोपालगंज जिले की भोरे सीट से टिकट दिया है। इस सीट से सुनील कुमार के बड़े भाई अनिल कुमार विधायक रह चुके हैं। पहली बार अनिल कुमार आरजेडी से विधायक बने थे। 2015 में वह कांग्रेस से चुनाव लड़े थे। अभी भोरे सीट से वह सीटिंग विधायक हैं। लेकिन महागठबंधन में सीट बंटवारे के बाद यह सीट भाकपा माले के खाते में चला गया है। ऐसे में अनिल कुमार इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। सुनील कुमार जेडीयू के टिकट पर इस सीट से चुनाव लड़ेंगे। टिकट मिलने के बाद सुनील कुमार ने तैयारी शुरू कर दी है।

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कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं सुनील कुमार

सुनील कुमार की छवि साफ सुथरी रही है। साथ ही वह बेहद शांत प्रवृत्ति के रहे हैं। सरकारी सेवा के दौरान सुनील कुमार के पास कई महत्वपूर्ण विभाग रहे हैं। वह पुलिस मुख्यालय में एडीजी, डीजी होमगार्ड और डीजी फायर भी रहे हैं। अपने काम से सुनील कुमार हमेशा से लोगों को प्रभावित करते रहे हैं। सुनील कुमार ने करीब डेढ़ महीने पहले ही सियासी करियर की शुरुआत की है।

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क्या है भोरे सीट का इतिहास
दरअसल, गोपालगंज जिले का यह सीट सुरक्षित है। साल 2000 से इस सीट का इतिहास देखें, तो 2000 में यहां बीजेपी के आचार्य विश्वनाथ बैठा चुनाव जीते थे। 2005 में सुनील कुमार के बड़े भाई अनिल कुमार आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत गए। 2005 अक्टूबर में हुए चुनाव में भी अनिल कुमार ने ही जीत हासिल की थी। 2010 में अनिल कुमार बीजेपी के इंद्रदेव मांझी से चुनाव हार गए। 2015 के विधानसभा चुनाव में अनिल कुमार फिर कांग्रेस से चुनाव लड़े और जीत हासिल की है। इस बार यह सीट माले के खाते में चला गया है। ऐसे में अनिल कुमार को महागठबंधन से टिकट मिलना मुश्किल था।

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पांडेय जी से आगे निकल गए सुनील कुमार
वहीं, एक समय में पूर्व आईपीएस सुनील कुमार भी डीजीपी की रेस में थे। लेकिन उस वक्त गुप्तेश्वर पांडेय ने बाजी मार ली थी। अब चुनावी मैदान में गुप्तेश्वर पांडेय से सुनील कुमार आगे निकल गए हैं। क्योंकि पांडेय जी के विधानसभा चुनाव लड़ने के मंसूबों पर पानी फिर गया है।



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