प्रीति जिंटा ने शेयर किया बायो बबल में रहने का अनुभव, बताया- क्यों बन गईं ‘कोरोना क्वीन’

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अपनी क्रिकेट टीम किंग्स इलेवन के सपोर्ट में यूएई में हैं। इस दौरान उनको 20 बार COVID-19 का टेस्ट करवाना पड़ा है। उन्होंने अब खुद को कोविड क्वीन बताया है। साथ ही बताया है कि बायो बबल में रहना उनके लिए कैसा अनुभव है।

प्रीति में बताया- क्या होता है बायो बबल में रहना
प्रीति जिंटा इस वक्त IPL णए अपनी टीम KIXP का हौसला बढ़ा रही हैं। उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में उनका कोविड टेस्ट हो रहा है। प्रीति ने बताया कि ये उनका 20वां कोरोना टेस्ट होगा। साथ ही कैप्शन में लिखा है कि बायो बबल में रहने का अनुभव कैसा है। प्रीति लिखती हैं, सभी लोग मुझसे पूछते हैं कि आईपीएल टीम बायो बबल में होने का क्या मतलब है। तो यह 6 दिन के क्वॉरंटीन से शुरू होता है, हर 3-4 दिन में कोविड टेस्ट होते हैं और बाहर नहीं जा सकते- सिवाय अपने कमरे के, KIXP के लिए जिम और रेस्ट्रॉन्ट्स हैं उन्हीं में जा सकते हैं, स्टेडियम अपनी कार से जाना होता है।

नहीं खा सकते हैं बाहर का खाना, ना बाहरियों से बातचीत
प्रीति ने बताया कि ड्राइवर्स, शेफ वगैरह भी बायो बबल में हैं और क्वॉरंटीन हैं तो बाहर का खाना और लोगों से बातचीत भी नहीं हो सकती। अगर आप मेरी तरह खुले घूमने वाले इंसान हैं तो थोड़ा मुश्किल है लेकिन 2020 में आपको इसकी भी तारीफ करनी चाहिए।

कोरोना इन्फेक्शन से बचने के लिए बने हैं बायो बबल
बता दें कि बायो बबल एक सेफ जोन है जो कि कोरोना इन्फेक्शन से बचाव के लिए बाहरी दुनिया से अलग-थलग रखा गया है। इसमें सिर्फ स्पोर्ट्स पर्सन और उनका सपोर्टिंग स्टाफ ही जा सकता है। यहां भी कोरोना से सुरक्षा के लिए समय-समय पर टेस्ट कराने होते हैं।



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