फिर चीन की गोद में जा रहा श्रीलंका, मनाने के लिये बड़ा ऑफर देंगे अमेरिकी विदेश मंत्री

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हाइलाइट्स:

  • श्रीलंका को अपने खेमे में करने के लिए अमेरिका सक्रिय, देगा बड़ा ऑफर
  • 27 अक्टूबर को दिल्ली पहुंच रहे हैं अमेरिकी विदेश मंत्री, भारत से करेंगे चर्चा
  • हिंद महासागर में चीन के विस्तार का केंद्र है श्रीलंका, बन सकता है सैटेलाइट स्टेट

कोलंबो
कर्ज और आर्थिक तंगी से जूझ रहा श्रीलंका फिर एक बार चीन के करीब जाता हुआ दिख रहा है। देश को चलाने के लिए श्रीलंका की राजपक्षे सरकार के पास पैसे नहीं बचे हैं। ऐसे में चीन ने खुलेआम श्रीलंका को 50 करोड़ डॉलर के लोन का ऑफर दिया है। कर्ज के कारण ही श्रीलंका को अपना हंबनटोटा बंदरगाह चीन को सौंपना पड़ा था। ऐसे में अगर फिर से श्रीलंका चीन के कब्जे में चला जाता है तो इससे हिंद महासागर में भारत और अमेरिका के ळिए खतरा बढ़ जाएगा।

श्रीलंका को साधेंगे अमेरिकी विदेश मंत्री
27 अक्टूबर को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भारत पहुंचने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान श्रीलंका को अपने खेमे में खींचने को लेकर डील हो सकती है। अमेरिका और भारत मिलकर श्रीलंका सरकार पर दबाव बना सकते हैं। वहीं अमेरिका 480 मिलियन डॉलर की स्टेटस ऑफ फोर्सेज एग्रीमेंट (SOFA) और एक्वीजिशन ऑफ क्रॉस सर्विसिंग एग्रीमेंट (ACSA) को बढ़ाने के लिए कह सकता है।

अमेरिका के साथ श्रीलंका ने कम किया संबंध
2017 से पहले श्रीलंका और अमेरिका के बीच घनिष्ठ संबंध थे। अमेरिकी समर्थक सिरिसेना-विक्रीमसिंघे प्रशासन ने कई समझौते भी किए थे। इसमें ACSA डील के कारण अमेरिका को हिंद महासागर क्षेत्र में अपने ऑपरेशन के लिए रसद आपूर्ति, ईंधन भरने और ठहराव की सुविधा मिली थी। लेकिन, अब गोटबाया-महिंदा राजपक्षे प्रशासन ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को कमतर कर दिया है।

श्रीलंका पर कुल 55 अरब डॉलर का कर्ज
श्रीलंका पर दुनियाभर के देशों का कुल 55 अरब डॉलर का कर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार, यह धनराशि श्रीलंका की कुल जीडीपी की 80 फीसदी है। इसमें सबसे अधिक कर्ज चीन और और एशियन डिवेलपमेंट बैंक का है। जबकि इसके बाद जापान और विश्व बैंक का स्थान है। भारत ने श्रीलंका की जीडीपी क 2 फीसदी कर्ज दिया है।

भारत ने भी दिया है 96 करोड डॉलर का कर्ज
भारत ने श्रीलंका को 96 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है। इस कर्ज को चुकाने को लेकर भारत और श्रीलंका के बीच बातचीत हो रही है। हालांकि भारत ने इसे लेकर अभी कोई आश्वासन नहीं दिया है। महिंदा राजपक्षे ने भारत से कहा है कि आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण कर्ज चुकाने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। वैश्विक स्तर पर श्रीलंका को 2.9 अरब डॉलर के कर्ज का भुगतान करना है।

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हिंद महासागर में चीन के विस्तार का केंद्र है श्रीलंका
चीन की इंडो पैसिफिक एक्सपेंशन और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में चीन ने श्रीलंका को भी शामिल किया है। श्रीलंका ने चीन का कर्ज न चुका पाने के कारण हंबनटोटा बंदरगाह चीन की मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को 1.12 अरब डॉलर में साल 2017 में 99 साल के लिए लीज पर दे दिया था। हालांकि अब श्रीलंका इस पोर्ट को वापस चाहता है।

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महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में चीन से बढ़ी नजदीकियां
महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका और चीन के बीच नजदीकियां खूब बढ़ी। श्रीलंका ने विकास के नाम पर चीन से खूब कर्ज लिया। लेकिन, जब उसे चुकाने की बारी आई तो श्रीलंका के पास कुछ भी नहीं बचा। जिसके बाद हंबनटोटा पोर्ट और 15,000 एकड़ जगह एक इंडस्ट्रियल जोन के लिए चीन को सौंपना पड़ा। अब आशंका जताई जा रही है कि हिंद महासागर में अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए चीन इसे बतौर नेवल बेस भी प्रयोग कर सकता है।



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