फोन पर 100 से ज्यादा बार बात, हाथरस कांड में आए नए ट्विस्ट का सच आखिर है क्या

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हाइलाइट्स:

  • हाथरस केस में नया मोड़, सामने आया कॉल डिटेल रिकॉर्ड
  • पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़िता के भाई के नंबर पर मुख्य आरोपी से 100 से ज्यादा बार बातचीत
  • बता दें कि अभी SIT इस मामले की जांच कर रही है
  • उधर, राज्य सरकार ने हाथरस केस में SC में हलफनामा देकर सीबीआई जांच की मांग की

हाथरस
यूपी के हाथरस कांड पर जारी बवाल के बीच इस मामले में अब ट्विस्ट भी आने लगे हैं। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि मृतक लड़की के भाई के मोबाइल नंबर और आरोपी के बीच हाल तक फोन पर बात हुई थी। 19 वर्षीय लड़की का दिल्ली के अस्पताल में 29 सितंबर को मौत हो गई थी। परिवारवालों ने आरोपियों पर गैंगरेप और मारपीट का आरोप लगाया था। इस बीच, यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उधर, शीर्ष अदालत ने पीड़ित फैमिली की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा

पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के में पता चला है कि पिछले 5 महीने में मुख्य आरोपी और पीड़ित के भाई के नाम पर रजिस्टर्ड नंबर पर कम से कम 100 बार बात हुई है। जांच में पता चला है कि संदीप को पीड़िता के भाई के नाम से एक नंबर से नियमित कॉल आए। पीड़िता के भाई के नंबर 989xxxxx और संदीप के 76186xxxxx के बीच 13 अक्टूबर, 2019 से टेलीफोनिक बातचीत शुरू हुई। अधिकांश कॉल चंदपा क्षेत्र में स्थित और सेल टॉवरों से किए गए थे, जो पीड़िता के गांव बूलगढ़ी से बमुश्किल 2 किमी दूर थे।

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CDR रिपोर्ट में क्या है?
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के पास अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच दोनों नंबरों पर 5 घंटे से ज्यादा वक्त तक बातचीत के रिकॉर्ड हैं। कुछ कॉल महज कुछ देर में खत्म हो गए हैं। अब पुलिस पीड़ित के भाई से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है ताकि उसकी आवाज की पुष्टि की जा सके। उधर, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि अभी SIT की जांच जारी है और इस वक्त इसपर कमेंट करना सही नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि पुलिस CDR के आधार पर जल्दी ही जांच शुरू करेगी।

दम तोड़ने से पहले पीड़िता के ये था बयान

दम तोड़ने से पहले पीड़िता खुद बयान दिया था कि उसके साथ रेप हुआ है। ‘एक महीना पहले भी मेरा रेप करने की कोशिश की। तब मैं बच गई। रवि (आरोपी) फोन पर कह रहा था, कुछ हुआ नहीं। तब भाग गया था। उस दिन रेप हुआ। वही दोनों थे। बाकी सब मम्मी को देखकर भाग गए थे। थोड़ा होश था। मम्मी ने मुंह में पानी डाला पूछा क्या हुआ? रेप हुआ…।’

SIT कर रही है जांच
हाथरस कांड की जांच कर रही SIT को जांच के लिए 10 दिन और मिल गए हैं। पहले SIT आज ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट सौंपने वाली थी। मंगलवार को एसआईटी पांचवी बार पीड़िता के गांव बूलगढ़ी पहुंची और पीड़िता के परिवार के लोगों से मुलाकात की। साथ ही टीम के सदस्यों ने घटनास्थल के साथ उस स्थान का फिर से मुआयना किया, जहां पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार किया गया था।

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पीड़ित परिवार और मिलते थे आरोपी!
एक अन्य अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि जांच में कुछ गांववालों ने बताया कि हाथरस कांड में गिरफ्तार आरोपी पीड़ित परिवारवालों से मिलते-जुलते भी रहते थे।

हाथरस कांड पर SC में योगी सरकार का हलफनामा
यूपी सरकार की ओर से गृह विभाग के विशेष सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया और कहा कि राज्य सरकार ने हाथरस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए तमाम कदम उठाए हैं। कुछ लोगों ने अपना हित साधने के लिए गलत नेरेटिव फैलाने की कोशिश की है। इस कारण राज्य प्रशासन ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। डीआईजी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी जांच कर रही हैं।

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राज्य सरकार बोली, SC करे जांच की निगरानी
हलफनामे में यूपी सरकार ने कहा कि मामले की छानबीन के लिए केस की सीबीआई जांच की सिफारिश किया जा चुका है। मामले में सच्चाई का पता लगाने के लिए राज्य की एसआईटी लगातार जांच में जुटी है। राज्य सरकार ने खुद सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। मामले में सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार गुहार लगाती है कि वह खुद मामले की जांच को मॉनिटर करे और सीबीआई से मामले की जांच कराए ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके और फर्जी कयास और नेरेटिव पर विराम लगे

हलफनामे में पूरे घटना का विवरण
यूपी सरकार ने बताया कि 14 सितंबर को घटना हुई। शुरुआत में लड़की के बयान के आधार पर हत्या का प्रयास और छेड़छाड़ का केस दर्ज किया गया। बाद में 22 सितंबर 2020 को लड़की का दोबारा आईओ ने बयान लिया तब उसने बताया कि चार लड़कों ने उसका रेप किया और गला दबाने की कोशिश की। फिर उस बयान के आधार पर गैंग रेप की धारा जोड़ी गई और लड़की का सेक्सुअल असॉल्ट फॉरेंसिक टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि पहली नजर में रेप नहीं लगता। इसके बाद स्थिति खराब होने पर विक्टिम को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी 29 सितंबर को मौत हो गई।

रात में शव को क्यों जलाया, यह भी बताया
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जिला प्रशासन को गुप्त सचूना मिली कि जातीय रंग दिया जा रहा है और हिंसा और लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने का अंदेशा है। फिर जिला प्रशासन ने विक्टिम परिवार को रात में अंतिम संस्कार कराने के लिए मनाने की कोशिश की। फिर रात में ही रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया ताकि लॉ एंड ऑर्डर का खतरा टाला जा सके। जिला प्रशासन ने कोई भी अनहोनी को टालने के लिए ये विशेष परिस्थिति में कदम उठाया और रात को ही रीति रिवाज से परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

फाइल फोटो



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