फ्रांस से राफेल खरीदने जा रहा चीन का एक और ‘दुश्मन’, ड्रैगन की दादागिरी के दिन गए

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चीन के आक्रामक रवैये से परेशान इंडोनेशिया अब फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदने जा रही है। फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने एक इंटरव्यू में इस डील की पुष्टि करते हुए कहा कि 36 राफेल विमान बेचने को लेकर दक्षिण पूर्वी एशियाई देश इंडोनेशिया के साथ डील फाइनल हुई है। लंबे समय से दोनों देशों के बीच राफेल विमानों की ब्रिकी को लेकर बातचीत चल रही थी। अब साउथ चाइना सी में न केवल ड्रैगन के युद्धपोतों बल्कि उसके फाइटर जेट्स के लिए भी खतरा बढ़ जाएगा।

48 की जगह 36 राफेल खरीद रहा इंडोनेशिया

फ्रांस की ला ट्रिब्यून फाइनेंशियल वेबसाइट ने पहले ही इस डील का खुलासा किया था। लेकिन उसकी रिपोर्ट में 36 के बजाय 48 राफेल का उल्लेख था। इसमें लिखा था कि जकार्ता अपने व्यापक रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए फ्रांस के साथ राफेल विमानों की डील को अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक है। उस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस साल के अंत तक राफेल विमानों की डील पर सहमति बनने की संभावना जताई गई थी।

हेलिकॉप्टर डील के बाद से जारी थी बातचीत

फ्रांस और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंधों की हाल में ही शुरुआत हुई है। राफेल डील के पहले 2019 में इंडोनेशियाई एयरफोर्स के लिए आठ की संख्या में एयरबस हेलीकॉप्टर H225M हेलिकॉप्टर का सौदा हुआ था। निक्केई एशियन रिव्यू के अनुसार, इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री पार्बोवो सुबिआंतो की अक्टूबर में पेरिस दौरे के समय इस डील को लेकर बातचीत हुई थी।

सितंबर में इंडोनेशिया ने खदेड़ा था चीन का युद्धपोत

चीन और इंडोनेशिया के बीच दक्षिणी चीन सागर में नातुना द्वीप को लेकर विवाद है। सितंबर में ही इंडोनेशिया ने अपने जलीय सीमा में पहुंचे चीन के एक युद्धपोत को खदेड़ दिया था। इसके बाद से चीन ने इंडोनेशिया के चारों ओर घेराबंदी को बढ़ा दिया था। साउथ चाइना सी में चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए इंडोनेशिया लगातार अपनी सेना को मजबूत कर रहा है।

नातुना द्वीप को लेकर चीन से है विवाद

इंडोनेशिया ने चीन के जहाज को नातुना द्वीप के पास से खदेड़ा था। यह क्षेत्र इंडोनेशिया के एक्सक्लूसिव इकनॉमी जोन में आता है। इंडोनेशियाई समुद्री सुरक्षा एजेंसी के जहाज चीनी युद्धपोतों और मछुआरों के इस क्षेत्र में लगातार घुसपैठ करने के कारण लगातार गश्त करती रहती हैं। इससे जलीय क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ चीन की हरकतों पर भी नजर बनी रहती है।

नातुना द्वीप पर चीन करना चाहता है कब्जा

नातुना द्वीप के पास चीनी झंडे वाले मछली पकड़ने की नौकाएं अक्सर देखी जाती हैं। चीनी सरकार समर्थित ये नौकाएं ड्रैगन के दावे को लेकर भेजी जाती हैं। जिनकी रखवाली करने के लिए चीनी पेट्रोल वेसल भी तैनात होते हैं। जिसके बाद इस इलाके में इंडोनेशिया ने भी अपनी नौसेना की तैनाती बढ़ा दी है।

साउथ चाइना सी में चीन का इन देशों से विवाद

साउथ चाइना सी के 90 फीसदी हिस्से पर चीन अपना दावा करता है। इस समुद्र को लेकर उसका फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई और वियतनाम के साथ विवाद है। वहीं, पूर्वी चाइना सी में जापान के साथ चीन का द्वीपों को लेकर विवाद चरम पर है। हाल में ही अमेरिका ने साउथ चाइना सी पर चीन के दावे को खारिज कर दिया था।

चीन समुद्र में चला रहा पावर गेम

साउथ चाइना सी में ‘जबरन कब्‍जा’ तेज कर दिया है। कुछ महीने पहले ही चीन ने साउथ चाइना सी की 80 जगहों का नाम बदल दिया। इनमें से 25 आइलैंड्स और रीफ्स हैं, जबकि बाकी 55 समुद्र के नीचे के भौगोलिक स्‍ट्रक्‍चर हैं। यह चीन का समुद्र के उन हिस्‍सों पर कब्‍जे का इशारा है जो 9-डैश लाइन से कवर्ड हैं। यह लाइन इंटरनैशनल लॉ के मुताबिक, गैरकानूनी मानी जाती है। चीन के इस कदम से ना सिर्फ उसके छोटे पड़ोसी देशों, बल्कि भारत और अमेरिका की टेंशन भी बढ़ गई है।



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