बजट स्मार्टफोन्स में इन कंपनियों को बड़ा फायदा, जानें क्या है वजह

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नई दिल्ली
इस फेस्टिवल सीजन में मोस्ट पॉप्युलर ब्रैंड्स से अलग दूसरे स्मार्टफोन खरीदने का मन बना रहे ग्राहकों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि LG, आसुस, कॉर्बन, जिओनी, आईटेल, इंफीनिक्स, टेक्नो, मोटोरोला, नोकिया, सोनी और ऑनर जैसे ब्रैंड्स ने इंडियन मार्केट में अपने कई नए स्मार्टफोन्स लॉन्च किए हैं। कोरोना वायरस संक्रमण और एंटी-चाइना सेंटीमेंट के बीच बजट स्मार्टफोन्स की तगड़ी डिमांड है और ये ब्रैंड्स इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं।

Counterpoint के डेटा के मुताबिक, बीते अगस्त और सितंबर महीने में 43 स्मार्टफोन मॉडल्स और वेरियंट्स लॉन्च में से 25 फीसदी से ज्यादा इन्हीं कपंनियों के मोबाइल फोन थे। पिछले कई सालों में पहली बार ऐसा हुआ है। हालांकि, एनालिस्टों का मानना है कि बड़े ब्रैंड्स अक्टूबर में दमदार वापसी करेंगे।

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छोटी कंपनियों का मार्केट शेयर बढ़ा
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि वॉल्यूम के हिसाब से सितंबर तिमाही में छोटे ब्रैंड्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी 5 फीसदी से बढ़कर 8 फीसदी पहुंच सकती है। फिलहाल, भारत के स्मार्टफोन मार्केट में शाओमी, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और रियलमी जैसे ब्रैंड्स का दबदबा है।

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डिमांड बढ़ने से प्रोडक्शन पर जोर
पॉप्युलर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रैंड एलजी का कहना है कि कोविड से पहले की कैपेसिटी के मुकाबले उसने अपनी फैक्ट्रियों में स्मार्टफोन का प्रॉडक्शन 10 गुना बढ़ा दिया है और दिवाली तक इसे 15 गुना तक बढ़ाया जाएगा। वहीं, लीडिंग फीचर फोन ब्रैंड कॉर्बन का कहना है कि वह ई-लर्निंग गैजेट मार्केट की जरूरतों को पूरा करना चाहता है। कॉर्बन, जियोनी और सैन्सुई जैसे ब्रैंड्स वाले जैना ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप जैना का कहना है, ‘हम नवंबर में 6 इंच की स्क्रीन के साथ कॉर्बन स्मार्टफोन्स लॉन्च करेंगे और टैबलेट सेगमेंट में भी एंट्री करेंगे।’

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चाइनीज कंपनियों को टारगेट करने की कोशिश में कई गैर चीनी कंपनियां

मेड इन इंडिया स्मार्टफोन की तरफ बढ़े कदम
आईसीईए के चेयरमैन पंकज महिंद्रू का कहना है कि लावा, माइक्रोमैक्स, मोटोरोला, नोकिया और Transsion Group के iTel, Infinix और Tecno समेत अन्य छोटी कंपनियों के स्मार्टफोन्स का डोमेस्टिक डिमांड वैल्यू और एक्सपोर्ट वैल्यू 1.8 लाख करोड़ रुपये का है, जिसके साल 2021-22 तक 2.4 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। एलजी, लावा, माइक्रोमैक्स, टेक्नो, इनफिनिकिस, आईटेल, नोकिया, कार्बन और जियोनी भारत में ही स्मार्टफोन असैंबल करती है, वहीं आसुस कॉन्ट्रैक्ट पार्टनर Foxconn की मदद से स्मार्टफोन असैंबल कराती है। लेनोवो और मोटोरोला जैसी कंपनियां भी भारत में ही स्मार्टफोन बनाने पर विचार कर रही है।



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