बिहार चुनाव में मणिपुर फॉर्म्युला अपनाएगी LJP, दिल्ली में बनी रहेगी गलबहियां और पटना में करेंगे तकरार

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पटना/नई दिल्ली
बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण की वोटिंग में अब एक महीने से भी कम समय बचा है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन बनने और टूटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने रविवार को नया फॉर्म्युला लेकर आई है। एलेजपी एनडीए के घटक दल के रूप में बनी रहेगी, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में वह इस गठबंधन के नेता मुख्यमंत्री नीतीश के चेहरे के खिलाफ वोट मांगेगी। इसके लिए एलजेपी बिहार में मणिपुर फॉर्म्युला आजमाएगी।

सूत्र का कहना है कि दिल्ली में हुई लोक जनशक्ति पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में सभी सदस्य मौजूद रहे। कोरोना और ऑपरेशन के कारण पशुपती पारस और कैसर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला हुआ है। एलजेपी बीजेपी सरकार का प्रस्ताव पारित हुआ है। एलजेपी के सभी विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को और मज़बूत करेंगे। एक साल से ‘बिहार 1st, बिहारी1st’ के माध्यम से उठाए गए मुद्दों पर एलजेपी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

क्या है मणिपुरी फॉर्म्युला
दरअसल, एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान कई बार साफ कर चुके हैं कि वह एनडीए का हिस्सा हैं। हालांकि उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि उनका गठबंधन केवल बीजेपी के साथ है। वह जेडीयू और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (हम) के साथ अपना गठबंधन नहीं मानते हैं। इस लिहाज से साफ है कि एलजेपी ने मूड बना लिया है कि वह हम और जेडीयू के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारेगी। मणिपुर फॉर्मूले के तहत दिल्ली सरकार में एलजेपी एनडीए का घटक दल बनी रहेगी, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर बीजेपी के खिलाफ दोस्ताना मुकाबला भी करेगी। यानी दिल्ली में एलजेपी मोदी सरकार में साझेदार होगी, लेकिन बिहार में नहीं।

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सूत्रों ने बताया कि एलजेपी ने तय कर लिया है कि वह बिहार विधानसभा चुनाव में अपने विजन डॉक्यूमेंट के साथ उतरेगी। पार्टी जेडीयू के विजन के साथ चुनाव में वोट नहीं मांगेगी। लोजपा और बीजेपी में कोई कटुता नहीं है। एनडीए के घटक दलों के बीच कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट हो सकती है।
चुनाव बाद एलजेपी के सभी विधायक मणिपुर की तर्ज पर बीजेपी का समर्थन करेगी।

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लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। लोक जनशक्ति पार्टी चाहती थी कि इसको लागू किया जाये, जिसपर जेडीयू राज़ी नहीं है। इससे पूर्व में भी कई बार देखा गया है कि जो पार्टियां केन्द्र में गठबंधन का हिस्सा होती है, वो विभिन्न राज्यों में एक दूसरे के सामने चुनाव लड़ती हैं।

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बीजेपी ने जहां दिल्ली विधानसभा का चुनाव लोक जनशक्ति पार्टी के साथ लड़ा, वहीं झारखण्ड एवं मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी व लोक जनशक्ति पार्टी में कोई गठबंधन नहीं था। मणिपुर में चुनाव परिणामों के पश्चात बीजेपी और एलजेपी ने मिलकर सरकार बनाई। लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए का हिस्सा है और आगे भी रहेगी। यहां बता दें कि एलजेपी बिहार चुनाव में 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की बात कई बार कर चुकी है।



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