बीजेपी को मुझसे खतरा लगता है, इसलिए मुझ पर पर्सनल अटैक हुए: आदित्‍य ठाकरे

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हाइलाइट्स:

  • महाराष्ट्र में महाअघाड़ी सरकार ने अपना एक साल का टर्म पिछले हफ्ते पूरा किया
  • इस एक साल में शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी की सरकार लगातार चर्चाओं में रही
  • इस दौरान उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे भी कई मुद्दों पर चर्चा में रहे

महाराष्ट्र में महाअघाड़ी सरकार ने अपना एक साल का टर्म पिछले हफ्ते पूरा किया। इस एक साल में शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी की सरकार लगातार चर्चाओं में रही। उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे भी कई मुद्दों पर चर्चा में रहे। विपक्ष उनपर लगातार हमलावर रहा। हर विवाद में उन्हें जोड़ा गया। इन तमाम मसलों पर एनबीटी के नरेन्द्र नाथ से बात की आदित्य ठाकरे ने। पेश है बातचीत के अहम अंश-

सवाल- कैसा रहा पहले साल कामकाज करने का अनुभव ?
जवाब- अनुभव अच्छा रहा। मुझे प्रशासनिक और गर्वनेंस का बेहतर अनुभव मिला। इसी साल हमें कोविड और तूफान जैसी आपदा का सामना करना पड़ा। एक ही साल में पांच साल की पढ़ाई जैसी हो गई। लेकिन कठिन हालात में भी जनता का सहयोग मिला। कुल मिलाकर बहुत कुछ सीखा और आने वाले साल में इसका लाभ मिलेगा।

सवाल- सरकार में खासकर आम लोगों से सीधे संवाद करने में सोशल मीडिया पर सक्रिय दिखते हैं। कोई खास वजह?
जवाब-हमने सोचा है कि जब गर्वमेंट में आते हैं तो थोड़ा भटक जाते हैं। हवा में रहते हैं। खुद को दूसरों से अलग समझने लगते हैं। लेकिन सीएम के नेतृत्व में इस बात को हमने माना कि हम जनता के बीच से ही हैं, जनता के लिए। इसीलिए हम जनता से हर माध्यम से सीधा संवाद करेंगे। सोशल मीडिया से कम्‍युनिकेशन करते हैं। इससे लोगों का फीडबैक मिलता है। हम अपनी बातों को जनता तक ले जाते हैं और जनता अपनी बात सीधी पहुंचाती है। इससे दोनों को लाभ मिलता है।

सवाल- आरे जंगल जैसे मसले पर आप बहुत आक्रामक रहे, आपको आलोचकों ने विकास विरोधी भी कहा?
जवाब- सरकार के अंदर सभी मंत्री को अपने-अपने विभाग में सर्वश्रेष्ठ देना था। सबने काम किया। किसानों की कर्ज माफी हुई। इसी तरह मेरे विभाग में जो भी काम दिये गए उसे हमने पूरा किया। जहां तक आरे जंगल की बात है वह सिर्फ मेरी नहीं पूरे मुंबईकर की मांग की थी। 800 एकड़ जंगल बचाए, वह एतिहासिक है। हमने पर्यावरण को बचाया। लेकिन ठीक इसी समय हमने 17 हजार करोड़ उद्योग के लिए समझौते इसी दौरान किए। मतलब विकास और पर्यावरण का संतुलन हमने बनाया जो सबसे बेहतर स्थिति है।

सवाल-आप इन एक साल में विपक्ष के निशाने पर भी रहे। कई तरह के आरोप लगे, बहुत हमला हुआ?
जवाब- मैंने सोचा कि उसपर ध्यान नहीं दें तो बेहतर है। काम पर फोकस होने से इस पर ध्यान नहीं गया। आलोचना करना विपक्ष का काम बनता है, उनके पास तो कोई काम नहीं है। हमारे लिए सुकून की बात है कि महाअघाड़ी सरकार अच्छा कर रही और उसपर सवाल नहीं उठे। इसी कारण गलत और पर्सनल अटैक हुए। लेकिन पांच साल हम काम करेंगे राजनीति नहीं। जहां तक मुझपर पर्सनल हमले की बात है, आपने फुटबाल में देखा होगा कि मेसी हो या रोनाल्डो उनपर मैन टू मैन मार्किग किया जाता है, सभी उनको घेरे रहते हैं कि कोई बड़ा गोल न कर दे। शायद मुझसे उन्हें खतरा लगता है।

सवाल- सरकार के अंदर किस तरह का समीकरण है। क्या तीनों दलों में कोऑर्डिनेशन ठीक है?
जवाब- हम जब से साथ आए हैं , अलग स्तर पर बॉन्डिंग है। लगता ही नहीं है कि तीन अलग-अलग दल काम कर रहे हैं। ‘बेस्ट ऑफ इलेवन टीम’ की तरह हम मिलकर काम कर रहे हैं। सभी एक दूसरे को मदद कर रहे हैं। आलोचक कहते हैं कि चुनाव में हमने 150 प्लस का नारा दिया था तो उन्हें हम बता दें कि अभी 162 है। महाराष्ट्र हित के लिए हम समग्र टीम के रूप में काम कर रहे हैं।

सवाल- लेकिन बॉलिवुड से लेकर मुंबई पुलिस भी विवादों आई। आपका भी नाम इन विवादों से जोड़ा गया
जवाब- विपक्ष को लगता है कि जब उनकी सरकार थी तब वे सभी अच्छे थे। प्लेन भर उनके कार्यक्रम में दिल्ली जाते थे। उनके लिए गाने गाते थे। उनसे अच्छे रिश्ते थे। लेकिन जब से उनकी सरकार गई तो मुंबई पुलिस खराब लगने लगी। बॉलिवुड खराब लगने लगा, मुंबई के लोग खराब लगने लगे। मुंबई को ड्रग सेंटर कहा जाने लगा। यह उनका प्रॉब्‍लम है, तकलीफ है। लगता है सरकार के बदलने से उनके चश्मे का नंबर बदल गया। उनके पेट में दर्द हो गया है। मुंबई, महाराष्ट्र में होने वाले हर अच्छे काम से उन्हें परेशनी हो रही है और गलत-गलत आरोप लगा रहे हैं।

सवाल- बीजेपी का आरोप यह भी है कि गलत ताकतों का साथ देने लगी है शिवसेना। आपके राष्ट्रवाद तक पर सवाल उठा दिए?
जवाब- यह सुनकर दर्द होता है। वाइब्रेंट डेमोक्रेसी में ऐसा नहीं होता है। हम सरकार में हैं। हमारा काम सबको साथ लेकर चलना होता है। किसी को बदनाम करना सही नहीं है। देश के मुद्दे को देखें, चीन का मसला ही देखें। कभी कहते हैं कि चीन अंदर आया। कभी नहीं आया। अभी चल रहे किसानों के आंदोलन को देखें। उन्हें रोकने के लिए सड़क खोदी जा रही हैं। उन्हें एंटी नेशनल कहा जाता है। यह आंखों में धूल झोंकने की बात है। जनता के असल मुद्दे अलग होते हैं, नैरेटिव अलग बनाए जाते हैं। सरोकार की बात करने वाले को बदनाम किया जाता है। अभी देखिए सिर्फ डेढ़ लाख सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए महाराष्ट्र को बदनाम करने के लिए। लेकिन इससे आवाज नहीं रुकेगी।

सवाल- आपके हिंदुत्व पहचान पर भी सवाल उठाए गए?
जवाब-हमारा हिंदुत्व बीजेपी से अलग है। हर किसी का आदर करो, सम्मान करो। कर्म में आस्था है। यही मेरा हिंदुत्व है। बीजेपी का हिंदुत्व राजनीतिक हिंदुत्व है। वे ‘माई वे या हाई वे’ सिद्धांत को मानते हैं। अगर वे अपने हिंदुत्व को सही मानते हैं तो पीडीपी से कैसे समझौता किया? बिहार से लेकर कई राज्यों में जिनके साथ लड़े फिर उनके साथ गठबंधन किया। हम जो उनके साथ थे, हमारी पीठ में छुरा मारा। क्या उनका यही हिंदुत्व है? एक राज्य में उनका अलग हिंदुत्व होता है दूसरे राज्य में अलग। हमारे लिए हिंदुत्‍व राजनीतिक वस्तु नहीं है।

सवाल- महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस का प्रयोग राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के लिए हो सकता है?
जवाब- हम तीन दलों ने मिलकर देश को नया समकीरण दिखाया है। सभी कहते थे ये तीन पक्ष मिलकर एक साल काम कर सकेंगे? लेकिन हुआ। अलग-अलग विचारधारा के लोग जनता के नाम पर जुडे हैं। यह उम्मीद बंधाता है कि पूरे देश में कई पक्ष बिना अपनी जड़-बुनियाद छोड़े एक साथ मिलकर बेहतर विकल्प देंगे। बीजेपी वाले हर हफ्ते तारीख तय करते हैं कि सरकार कब गिरेगी। लेकिन हम पांच साल मजबूती से सरकार चलाकर विकल्प देंगे।

सवाल-अभी देश में कई युवा नेता सामने आ रहे हैं। युवाओं के मुद्दे भी सियासत को प्रभावित कर रहे हैं। बतौर युवा नेता इस ट्रेंड को किस तरह देखते हैं?
जवाब- तेजस्वी यादव ने बिहार में जो टक्कर दी वह काबिले तारीफ है। पूरी ताकत उनके खिलाफ थी। युवा
जोश क्या होता है उन्होंने दिखा दिया। युवाओं के मुद्दे पर चुनाव लड़े। यूथ हमारे आयुवर्ग का है। वह अलग-अलग दलों की विचारधारा नहीं देखता है। वह अपने जुड़े मसलों को देखता है। उसपर कोविड ने आर्थिक संकट गहरा दिया है। कोविड के बाद आर्थिक सरोकार और रोजगार से जुड़े मुद्दे हावी होने लगे हैं। मुझे उम्मीद है कि युवा आने वाली राजनीति की दिशा तय करेंगे और हम उनके साथ होंगे।आने वाले समय की राजनीति ‘एक्ट ऑफ यूथ’ होगी। ‘एक्ट ऑफ गॉड’ से नहीं ‘एक्ट ऑफ यूथ’ से इकॉनमी सुधरेगी। हमें उनकी बात सुननी ही होगी।

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